सत्यम : आज ‘युवानिया’ का सौवां अंक आपके साथ साझा हो रहा है। इस पाक्षिक वेब पत्रिका ने एक लंबा… READ MORE
सत्यम: कविता क्या है? जब हम यह सोचने एक दिन बैठे तो कई खयाल आए। लेकिन जब हमें हिन्दी के… READ MORE
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सत्यम श्रीवास्तव: आज़ादी का अमृत महोत्सव चारों दिशाओं में अपनी अनुपम छटा बिखेर रहा है। देश तिरंगामय है और समस्त… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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