समिक्षा गणवीर: मैं एक महिला हूँ और वर्तमान भारत में मैं और मेरी जैसी बहुत-सी महिलाएँ यह महसूस करती हैं… READ MORE
समीक्षा: (मराठी कविता) हा कोरोना कधी जाईल व माय ….. आम्ही गरीबांनी सांगा खाव काय.. नाही चिल्लर ,नाही नोट मोदी… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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