नीतिशा खलखो : दृश्य : चाय की चुस्कियों में घुला हुआ माहौल। वीर : पता है कल वीसी ऑफिस में… READ MORE
नीतिशा खलखो: नौकरी के खातिर – लघुकथा 1कुमार : डॉ अमरेंद्र जादव का फेसबुक प्रोफाइल जाने क्यों इन दिनों फेसबुक… READ MORE
नीतिशा खलखो: दृश्य: एक भगदड़ का वीडियो मुंडी गड़ाए हुए सभी दोस्त देखने में व्यस्त है। संकरी बन्द गलियों में… READ MORE
नीतिशा खलखो: #1 चलो पितृसत्ता तोड़ें कुमार : ये स्कूल वाले हर दिन क्या ही बच्चों को हु हा सिखाते… READ MORE
नीतिशा खलखो: कुमार : पता है कल यूनिवर्सिटी में फ़िल्म स्क्रीनिंग के दौरान मारपीट हो गई? नितिन : कौनसी फ़िल्म… READ MORE
नीतिशा खलखो: लेख में व्यक्त किए विचार युवा साथी के स्वयं के हैं किसी पत्रकार का फ़ोन आता है आदिवासी… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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