ज़ेबा वसी: भारत में पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से ग्लोबल वार्मिंग तेज़ी से बढ़ी है, उसका असर अब… READ MORE
ज़ेबा वसी: अक्टूबर की हल्की ठंडी सुबह थी। जब मैंने दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन पकड़ी, तो मन में… READ MORE
ज़ेबा वसी: बचपन से ही हम सभी सुनते आयें हैं कि अप्रैल फूल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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