ज़ेबा वसी:
बचपन से ही हम सभी सुनते आयें हैं कि अप्रैल फूल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है। हम सब की बचपन की बहुत सी यादें जुड़ी हैं इस दिन से, कैसे हम अपने दोस्तों के साथ, रिशतेदारों के बीच उन्हें मूर्ख बनाने के बहाने ढूंढते थे। हम हमेशा इस दिन को एक हँसी–खुशी के माहौल में देखते हैं। एक अप्रैल को स्कूल के समय में अगर किसी बच्चे का जन्मदिन आता था तो हम सभी उसे मूर्ख बोल कर पुकारते थे, और इस तरह हसीं–ठिठोले मे पूरा दिन चला जाता था। जब मोबाइल फोन परिचलन में आया तो मोबाइल फोन के जरिये एक दूसरे को संदेश देकर भी अप्रैल फूल की बधाई देना शुरू हुआ। हमारे भारत में हिन्दी सिनेमा जगत मे अप्रैल फूल पर फिल्म भी हैं और गाने भी गायें गए हैं “अप्रैल फूल मनाया उनको गुस्सा आया।” और हम जब किसी को मूर्ख बनाने मे सफल हो जाते हैं तो ये गाना उस व्यक्ति के लिए गाते हैं। अप्रैल फूल मनाने का चलन सिर्फ शहरी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, इसे लोग ग्रामीण क्षेत्रों मे भी अधिक मना रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है इसके पीछे की कहानी? अप्रैल फूल को मनाने के पीछे लोग कई तरह के तर्क देते आयें हैं। आइये जानते हैं इसके पीछे की कहानी, इसकी शुरुआत कैसे और कहाँ से हुई।
अप्रैल फूल डे की शुरुआत 1381 में हुई थी। बताया जाता है कि उस समय इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी ने घोषणा करवाई कि वो दोनों 32 मार्च 1381 को सगाई करने वाले हैं। सगाई की खबर सुनकर जनता खुशी से झूम उठी, लेकिन 31 मार्च 1381 के दिन लोगों के समझ आया कि 32 मार्च तो आता ही नहीं है। इसके बाद लोग समझ गए कि उन्हें मूर्ख बनाया गया है। बताया जाता है कि तभी से 32 मार्च, यानी 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। कुछ किस्सों के मुताबिक, अप्रैल फूल डे की शुरुआत 1392 में ही हो चुकी थी।
कुछ कहानियों के अनुसार, यूरोपीय देशों में पहले 1 अप्रैल को न्यू ईयर मनाया जाता था। लेकिन, पोप ग्रेगरी 13 ने जब नया कैलेंडर अपनाने के आदेश दिए तो नया साल 1 जनवरी से मनाया जाने लगा। कुछ लोग अभी भी 1 अप्रैल को ही नया साल मना रहे थे। तब ऐसे लोगों को मूर्ख समझकर उनका मजाक उड़ाया जाता था। इस तरह अप्रैल फूल डे की शुरुआत हुई। हालांकि, 19वीं शताब्दी तक अप्रैल फूल डे काफी प्रचलित हो चुका था।
कुछ इतिहासकारों ने इसे हिलेरिया से भी जोड़ा है। हिलेरिया एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब आनंदित होता है। प्राचीन रोम में एक समुदाय द्वारा एक त्योहार मनाया जाता है, जिसे हिलेरिया कहा जाता है। इस त्योहार में लोग अपना वेश बदलकर लोगों को पागल बनाने की कोशिश करते हैं। ये त्योहार भी मार्च के आखिर में मनाया जाता है। ऐसे में इसे भी अप्रैल फूल से जोड़ा जाता है।
धीरे धीरे यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जाने लगा और उनमें से एक हमारा भारत देश भी है। दुनियाभर में 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे मनाने के अलग-अलग तरीके हैं। अगर बात करें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और अफ्रीकी देशों की, तो वहां अप्रैल फूल डे सिर्फ 12 बजे तक ही मनाया जाता है। इटली, बेल्जियम और फ्रांस में इसे अलग तरह से मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे की पीठ पर कागज से बनी मछली चिपका देते हैं। जिस वजह से कई जगहों पर अप्रैल फूल को अप्रैल फिश भी कहते हैं। (1) वहीं, कनाडा, अमेरिका, और बाकी यूरोपीय देशों में 1 अप्रैल को दिनभर अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में इस दिन की शुरुआत 19वीं सदी में अंग्रेजों ने की थी। आज के समय में भारत में भी लोग इस दिन लोग मस्ती-मजाक करते हैं।(2)

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