उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद (बदला हुआ नाम अयोध्या) क्षेत्र में कार्य कर रहे अवध पीपुल्स फोरम ने अपने युवा संसाधन केन्द्रो पर किशोरियों और असंगठित क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं के साथ में होली और रोज़ा इफ्तार प्रोग्राम मनाया।
आरज़ू:
होली मिलन और रोज़ा इफ्तार प्रोग्राम, युवा संसाधन केंद्र, पहाड़गंज
समुदाय में किशोरियों और महिलाओं के साथ होली मिलन और रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया। सभी किशोरियों ने कार्ड बनाकर अपने समुदाय में लोगों निमंत्रण देते हुए बताया कि हम सभी लोग मिलकर होली मिलन और रोज़ा इफ्तार का कार्यक्रम कर रहे हैं।
होली मिलन में सभी धर्म की किशोरियाँ शामिल हुई। सभी ने अपना-अपना परिचय देते हुए होली की बधाई दी। सभी लोगों ने होली पर चर्चा की, होली मिलन समारोह हम क्यों मनाते हैं इस पर भी चर्चा की गई। किशोरियों ने बताया कि होली के दूसरे या तीसरे दिन हम आपस में होली मिलन करते हैं जिसमें सभी धर्म की किशोरियाँ शामिल होती हैं। उनका कहना था कि होली के दिन मुस्लिम किशोरियाँ शामिल नहीं हो पाती हैं। जिसके कारण हम सभी समुदाय की किशोरियों और महिलाओं के साथ होली मिलन का आयोजन करते हैं। इस कार्यक्रम में हम सभी को गुलाल लगाते हुए होली की बधाई देते हैं। किशोरियों का यह भी कहना था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों के घर गुजिया नहीं बनती है। होली मिलन में हिंदू धर्म की किशोरियों और महिलाएं अपने-अपने घरों से गुजिया इकट्ठा करके हम आपस में बैठकर होली पर चर्चा करते हुए गुजिया खाते हैं।
किशोरियों और महिलाओं के साथ यह गतिविधि की गई।
1. लीडर लीडर एक्शन चेंज
2. 12345678
3. जिप – जैप
4. आम जाम लकी जमाल लकी नंबर 1
इन चारों गतिविधियों को किशोरियों ने काफी उत्साह के साथ किया और वह काफी खुश थी, लेकिन उनका कहना था कि लीडर लीडर एक्शन चेंज काफी मज़ेदार खेल है। जिसमें हम लीडर को पहचानने में गड़बड़ी कर रहे थे, अगर हम ठहर के देखते हैं तो हमें लीडर की पहचान आसानी से हो सकती थी, लेकिन हम किसी कार्य को ठहर कर करना पसंद ही नहीं करते हर चीज़ जल्दबाज़ी में करते हैं। पहाड़गंज में होली मिलन समारोह समापन के बाद सभी किशोरियों ने यूथ रिसोर्स सेंटर पर आकर रोज़ा इफ्तार में भाग लिया।
यूथ रिसर्च सेंटर पर होली मिलन के साथ-साथ रोज़ा-इफ्तार प्रोग्राम का आयोजन किया गया, जिसमें सभी परिवारों को और किशोरियों को निमंत्रण दिया गया। सिम्मी (सेंटर को-ऑर्डिनेटर) ने कहा कि हम अपने केंद्र पर सभी तरह से किशोरियों को एक्सपोज़र देने का काम करते हैं। इसके तहत हम होली और रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन अपने केंद्र पर करते हैं। इनमें बनने वाले पकवान सभी लड़कियाँ अपने घरों से लाती हैं। हम समुदाय में एक दूसरे को त्योहारों के माध्यम से साथ आने, बात करने और मिलकर अपनी दुनियाँ बनाने का काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में लगभग 65 किशोरियों, महिलाएँ शामिल हुई। सभी धर्म के लोगों ने एक साथ बैठकर रोजा इफ्तार किया और आपस में एक दूसरे को होली की बधाई दी।
जागृति सोनकर:
होली मिलन और रोज़ा इफ्तार प्रोग्राम, दिलकुशा
हमने अवध पीपुल्स फोरम द्वारा होली मिलन समारोह की तैयारी सामुदायिक स्तर पर करने के लिए एक निमंत्रण पत्र बनाया। इसमें कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई थी। इस निमंत्रण पत्र को समुदाय के सभी परिवारों को किशोरियों द्वारा पहुंचाया गया, साथ ही मुस्लिम परिवारों को निमंत्रण देने और इस कार्यक्रम में उनका जुड़ाव बनाने का प्रयास किया गया, ताकि यह कार्यक्रम समावेशी बन सके। आपस में मिलकर इस पर्व को मनाने और सभी धर्म के परिवारों को जोड़ते हुए उनमें बंधुत्व की भावना बढ़ाने का कार्य किया जा सके।
होली मिलन समारोह का आयोजन 29 मार्च 2024 दिलकुशा केंद्र में किया गया। समारोह में सभी किशोरियाँ अपने अभिभावकों के साथ तैयार होकर आई थी और शुरुआत में सभी किशोरियों और उनके अभिभावकों का परिचय हुआ। अभिभावकों से किशोरियों के केंद्र के बारे में चर्चा करते हुए सभी महिलाओं से पूछा गया कि लड़कों के लिए इस मोहल्ले में कौन-कौन सी जगह हैं जहाँ पर वह इकट्ठा होकर बात करते हैं? महिलाओं ने बताया कि अंशु की दुकान, धारा, कल्लू अंडा की दुकान, छोटा चौराहा हैं जहाँ पर लड़के इकट्ठा होकर बात करते हैं। इस प्रश्न के बाद सभी से दूसरा प्रश्न किया गया कि ऐसी कौन सी जगहे हैं जहाँ किशोरियाँ इकट्ठा होकर आपस में बात करती हैं? इस सवाल पर सभी महिलाओं और किशोरियों ने बहुत सोचने के बाद बताया कि किशोरियों को बात करने के लिए एक दूसरे के घर जाना होता है, जिसकी अनुमति सभी को नहीं होती, ऐसी कोई भी जगह नहीं है जहाँ किशोरिया इक्कठा होकर आपस में बात कर सकें।
इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हमने बताया कि इस केंद्र को किशोरियों के लिए एक ऐसी सार्थक जगह बनाने की कोशिश की जा रही है जहाँ पर वह अपनी समस्याओं पर बात कर सकें और अपने कौशल पर कार्य कर सकें। उसके पश्चात सभी किशोरियों ने मिलकर ‘किसी की मुस्कुराहटो पे हो निसार’ गीत गाया, इसमें किशोरियों के अभिभावकों ने भी साथ दिया। कार्यक्रम की शुरुआत के बाद सभी महिलाओं से किशोरियों के जीवन में आने वाली चुनौतियों के संदर्भ में चर्चा की गई। उन्हें बताया गया कि उनके घर की किशोरियों के द्वारा बताई गई प्रमुख चुनौतियां क्या हैं। महिलाओं ने यह कहा कि हम अपने घर की बेटियों को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं, पर खुद की ज़्यादा जानकारी न होने के कारण कहीं ना कहीं हम पीछे रह जाते हैं। हम उनके भविष्य को बनाने के लिए इस केंद्र पर आकर सुझाव मांगते हैं और उनके भविष्य को बनाने के लिए जितनी मदद हो सकती है वह प्रयास कर रहे हैं, पर समाज में उनकी सुरक्षा को लेकर बहुत डर बना रहता है जिसके कारण हम अपने घर की बेटियों को बाहर भेजने में डरते हैं। इसी कड़ी में उषा देवी का कहना था कि हम अपनी बेटियों को बहुत विश्वास के साथ पढ़ने के लिए भेजते हैं पर उनके कई फैसलों के कारण हमें उनके लिए चिंता होती है। बाहर की दुनिया बहुत सुरक्षित नहीं है जिसके कारण हम हम चिंतित होते हैं, लेकिन हमारे घर की लड़कियों को लगता है कि हम उन पर रोक-टोक लगाते हैं।
इस चर्चा के बाद सभी महिलाओं से यह पूछा गया कि जिस प्रकार का जीवन वह जी रही हैं, क्या यह जीवन वह अपनी बेटियों को देना चाहती हैं? इस सवाल पर सभी महिलाओं का कहना था कि हम अपनी बेटियों को आगे बढ़ते हुए और भविष्य में अच्छी नौकरी या कार्य करते हुए देखना चाहते हैं। शालिनी सिंह का कहना था कि हमें ज़रूरत है अपने घर की बेटियों पर विश्वास करने की और उन्हें सभी प्रकार के बातों में सहयोग करने की, जिससे वह सहज महसूस कर सके और मुसीबत आने पर पहले परिवार से बात कर सकें। इन सभी चर्चाओं के साथ-साथ किशोरियों द्वारा होली व किशोरियों से संबंधित कविताओं को भी पढ़ा गया। इन कविताओं को पढ़ने देखकर सभी के अभिभावक बहुत खुश हुए और उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का केंद्र किशोरियों के लिए काफी अच्छा है। जिसमें वह अपने पढ़ने-लिखने और समझने के बारे में सोच सकती हैं।
इन चर्चाओं के बाद सभी किशोरी और महिलाओं ने आपस में मिलकर एक दूसरे को गुलाल लगाया और गुजिया पापड़ व अन्य व्यंजनों को खाया। अंत में सभी महिलाओं का कहना था कि इस प्रकार का समारोह हमें करना चाहिए जिससे हम महिलाओं को भी उत्सव मनाने का मौका मिल सके और अपनी बात रखने की जगह मिल सके। उन्होंने कहा कि त्योहारों में वह घर के कामों में ही लगी रहती हैं, जिससे उन त्योहारों का लुत्फ़ नहीं उठा पाती। उन्होंने यह भी बताया कि इस समारोह में आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा और उन्होंने यह भी देखा कि उनकी बेटियां कविताओं को पढ़ रही हैं और अच्छी बातें कर रही हैं। मुस्लिम महिलाओं को कहना था कि इस तरह का उत्सव मनाना बहुत ज़रूरी है और उन्होंने यह भी कहा कि ईद मिलन समारोह के लिए वह पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
मानसी यादव:
होली मिलन और रोज़ा इफ्तार प्रोग्राम, मेहदौना
मेहदौना में होली मिलन समारोह का आयोजन प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र पर किया गया। हमने महिलाओं और लड़कियों के साथ कार्यक्रम किया, इसके लिए लोगों को आमंत्रित करने के लिए हम गाँव में गए। हमने यह कार्यक्रम 28 मार्च को आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मेहदौना के आस-पास के गाँव की महिलाएं और लड़कियाँ शामिल हुई। सभी लोगों ने मिलकर खाने-पीने की व्यवस्था किया। एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया गया। हम त्योहारों के बहाने से एक दूसरे से अपने गिले-शिकवे मिटाने का काम करते हैं।
पूजा ने कहा, “गाँव में थोड़ी-थोड़ी बातों को लेकर झगड़ा-लडाई हो जाती है। होली जैसे त्योहारों से हम अपने लोगों को साथ जोड़ते हैं। उनसे अपनी दिल की बात करते हैं और पुरानी बाते भूल जाते हैं।”
इसलिए यह त्योहार हमको मिलकर जीवन जीने की सांस्कृति सिखाता है। यह त्योहार हमको जाति, धर्म भुलाकर साथ आने का निमंत्रण देता है। हाँ हमको त्योहार मानते समय अपनी खुशी में लोगों के लिए खुशी मनाने का स्थान बनाना चाहिए, ऐसा ना हो कि इससे उनको दु:ख हो। सभी के साथ आने के इन अवसरों को हमको और कारगर बनाने का काम करना चाहिए। यह संविधान के मूल्य बंधुत्व को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
नैन्सी ने कहा, “हम लड़कियाँ मिलकर होली मिलन कर रहे हैं, यह नई बात हैं। मुझे तो मज़ा आया हैं। मैं आगे और फैस्टिवल में अपने दोस्तों को शामिल करूँगी।”









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