युवानिया संपादक मंडल द्वारा संकलित:

देश के अलग-अलग हिस्सों में बच्चों, किशोरियों और युवाओं ने अपने-अपने तरीके से भगत सिंह को याद किया। कहीं रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए उनके विचारों पर बात हुई, तो कहीं पर्यावरण, संविधान, पढ़ने की आदत और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों पर गतिविधियां हुईं। बच्चों ने खुद कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली, किशोरियों ने रैली निकाली और संविधान पर चर्चा की, युवाओं ने खुले मंच पर अपनी बात रखी और पर्यावरण को लेकर छोटे-छोटे संकल्प लिए। विद्यार्थियों ने भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया, तो कुछ जगहों पर जयंती के साथ लाइब्रेरी और पढ़ने से जुड़ी गतिविधियां भी हुईं। इन सभी गतिविधियों में भगत सिंह को याद करने के साथ-साथ उनके विचारों को समझने और आज के समय से जोड़कर देखने की कोशिश भी दिखाई दी।

अलग-अलग जगहों पर हुई इन पहलों में बच्चों, किशोरियों और युवाओं की भागीदारी कई रूपों में सामने आई। कहीं उन्होंने मंच पर अपनी बात रखी, कहीं समूह में चर्चा की और कहीं लिखने-पढ़ने जैसी गतिविधियों के जरिए अपने विचार व्यक्त किए। जमशेदपुर में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर युवाओं ने अपने विचार रखे और छोटे-छोटे कदमों के जरिए बदलाव की बात की। वहीं, अलग-अलग स्कूलों और युवा केन्द्रों में भगत सिंह के जीवन, संघर्ष, समानता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विचारों पर बातचीत हुई। इन आयोजनों के जरिए बच्चों और युवाओं को भगत सिंह के जीवन और विचारों को जानने, उन पर बातचीत करने और अपनी बात रखने का अवसर मिला।

आइए, जानते हैं अलग-अलग जगहों पर हुई इन पहलों के बारे में।

Two women celebrating a birthday with a banner in a classroom, surrounded by students engaged in the event.

साक्षर एकेडमी, झारखंड: बच्चों ने खुद संभाली कार्यक्रम की जिम्मेदारी

साक्षर एकेडमी में भगत सिंह जयंती का दिन बच्चों के लिए खास रहा। इस बार कार्यक्रम की तैयारी से लेकर आयोजन तक की जिम्मेदारी बच्चों ने खुद संभाली। फूल लाने, मालाएं गूंथने, दीपक सजाने और दीप प्रज्ज्वलित करने तक, हर काम में बच्चों ने अपनी भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम के दौरान जब बच्चों ने अपनी आवाज़ में “मेरा रंग दे बसंती चोला…” गीत गाया, तो माहौल देशभक्ति से भर गया।

इस मौके पर बच्चों के साथ एक खास गतिविधि भी हुई। इसमें उन्होंने भगत सिंह के जीवन और उनके विचारों को समझने की कोशिश की। बच्चों ने केवल नारे लिखने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके विचारों और दर्शन को जानकर पोस्टर और स्लोगन चार्ट तैयार किए।

बच्चों की इस पहल में उनकी रचनात्मकता और खुद से काम करने की कोशिश साफ दिखाई दी।

इसी अवसर पर झारखंड SSC के प्रतिभागी साथी अजय बेसरा ने गांव में बच्चों के साथ भी भगत सिंह जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया।

आरंभ युवा मंच, जमशेदपुर, झारखंड: ‘UNMUTE’ में युवाओं ने खुलकर रखी अपनी बात

Group of people gathered in a park, some standing and others seated on the grass, engaged in conversation or activities.

जमशेदपुर के जुबिली पार्क में आरंभ युवा मंच की ओर से भगत सिंह जयंती पर ‘UNMUTE’ खुले मंच का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए।

इस मंच पर युवाओं को अपनी बात रखने के लिए किसी एक तरीके तक सीमित नहीं रहना था। किसी ने गीत सुनाया, किसी ने कविता और शायरी के जरिए अपने विचार रखे, तो किसी ने कहानी, पोस्टर, पेंटिंग और पोस्टकार्ड के माध्यम से अपनी बात कही।

कार्यक्रम की शुरुआत TTTPA लाइब्रेरी के सदस्यों की भगत सिंह की शहादत पर केंद्रित प्रस्तुति से हुई। इसके बाद इप्टा जमशेदपुर के साथियों ने कोरस गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की संचालक निधि मुंडा ने ‘UNMUTE’ के उद्देश्य को साझा करते हुए बताया कि यह मंच युवाओं को बिना झिझक अपने विचार, सवाल, सपने और आकांक्षाएं साझा करने का अवसर देता है।

इसके बाद खुले सत्र में युवाओं ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। भगत सिंह के जन्मदिन पर केक काटकर उन्हें याद भी किया गया।

कार्यक्रम में भगत सिंह के विचारों और आज के समय में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि उनके लिए आजादी का मतलब केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति नहीं था, बल्कि एक ऐसे समाज का निर्माण भी था जहां बराबरी हो और शोषण न हो। युवाओं के बीच उनके लेखन को पढ़ने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और सवाल पूछने की जरूरत पर भी बात हुई।

कार्यक्रम का एक खास हिस्सा पर्यावरण को लेकर युवाओं की भागीदारी रहा।

A group of people holding posters and a cake during an event, with a woman lighting a candle, surrounded by trees and a banner in the background.

JASSOY (Just a Step Seed Our Youth) के साथियों ने ‘Youngsters Green Voice Zone’ आयोजित किया। इसके तहत ‘Idea-Action Wall’ पर युवाओं ने पोस्ट-इट नोट्स के जरिए पर्यावरण से जुड़े अपने विचार लिखे और यह भी बताया कि वे अपने स्तर पर क्या कदम उठा सकते हैं। प्रदूषणमुक्त शहर, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, कचरा न फैलाना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली जैसे मुद्दे सामने आए।

‘Paint the Future’ गतिविधि में सामूहिक चित्रकारी हुई, वहीं ‘One Seed – One Voice’ के तहत सीड बॉल्स और संदेश कार्ड के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के अंत में लोगों ने जाति, धर्म और नस्ल से ऊपर उठकर एक न्यायपूर्ण समाज बनाने, पर्यावरण की रक्षा करने और सकारात्मक सामाजिक बदलाव के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

समता किशोरी युवा मंच, वाराणसी, उत्तर प्रदेश: किशोरियों ने निकाली जागरूकता रैली

A large crowd of people, including many children and women, gathered outdoors for an event, sitting on the ground with banners and signs in the background.

भगत सिंह जयंती की पूर्व संध्या पर वाराणसी में समता किशोरी युवा मंच से जुड़ी किशोरियों ने जागरूकता रैली और सभा का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में कईं किशोरियां शामिल हुईं। सभा के दौरान उन्होंने भगत सिंह के बारे में अपने विचार रखे और उनके जीवन को याद किया।

किशोरियों की बड़ी संख्या में भागीदारी के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें एक साथ आने और अपनी बात रखने का अवसर मिला।

आर्य कन्या इंटर कॉलेज की गर्ल्स वेलफेयर कमेटी: भगत सिंह के विचारों और संविधान पर चर्चा

A classroom scene with several students, primarily girls, wearing blue uniforms and white scarves, engaged in studying and writing at wooden desks. The walls are decorated with educational posters and artwork.

आर्य कन्या इंटर कॉलेज में भगत सिंह जयंती के अवसर पर गर्ल्स वेलफेयर कमेटी से जुड़ी किशोरियों के साथ उनके जीवन और संघर्ष पर चर्चा की गई।

बातचीत के दौरान किशोरियों ने भगत सिंह के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, जेल में बिताए समय और वहां रहते हुए लिखे गए लेखों, निबंधों और पत्रों के बारे में बात की। उन्होंने भारतीय कैदियों के अधिकारों के लिए की गई उनकी लंबी भूख हड़ताल को भी याद किया। भगत सिंह केवल 23 वर्ष की उम्र में फांसी पर चढ़ गए थे, इस बात का भी ज़िक्र हुआ।

इसके बाद चर्चा को संविधान से जोड़ा गया। किशोरियों ने इस बात पर बातचीत की कि भगत सिंह के लिए आजादी का अर्थ केवल अंग्रेजों से मुक्ति नहीं, बल्कि एक बराबरी वाले समाज का निर्माण भी था। भूख, अशिक्षा और भेदभाव से मुक्ति के सवालों को भी इस चर्चा में शामिल किया गया।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के जरिए समानता और भेदभाव से जुड़े अधिकारों पर बात हुई। अनुच्छेद 19 के संदर्भ में अपनी बात रखने की आजादी और अनुच्छेद 21A के संदर्भ में शिक्षा के अधिकार पर चर्चा की गई।

इस तरह भगत सिंह के विचारों को आज के संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर समझने की कोशिश की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी किशोरियों ने ‘एक खत भगत सिंह के नाम’ लिखा। इस गतिविधि के जरिए उन्हें अपने विचारों को लिखकर व्यक्त करने का अवसर मिला।

कम्पोजिट विद्यालय, रामनगर, उत्तराखंड: बच्चों के साथ मनाई गई जयंती

रामनगर, उत्तराखंड के कम्पोजिट विद्यालय में बच्चों के साथ शहीद भगत सिंह जयंती मनाई गई।

इस अवसर पर विद्यालय में बच्चों के साथ भगत सिंह को याद किया गया।

श्रमजीवी संघटना, लातूर, महाराष्ट्र: भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

महाराष्ट्र के लातूर जिले के रेणापुर तालुका स्थित सर्वोदय विद्यालय, खलंग्री में श्रमजीवी संघटना की ओर से शहीद भगत सिंह जयंती मनाई गई।

इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए भगत सिंह के जीवन पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके जीवन के बारे में बोलने और अपने विचार रखने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के अंत में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार और सम्मान पत्र दिए गए।

साहबदीन राम सीताराम इंटर कॉलेज की गर्ल्स वेलफेयर कमेटी: भगत सिंह को याद करने के साथ पढ़ने पर जोर

साहबदीन राम सीताराम इंटर कॉलेज में भगत सिंह का जन्मदिन मनाया गया। इस दौरान उनके समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष विचारों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के साथ गर्ल्स वेलफेयर कमेटी की बैठक भी आयोजित की गई। इसमें सक्रिय रूप से पढ़ने वाली किशोरियों को नेतृत्व की जिम्मेदारी देने पर बात हुई। साथ ही लाइब्रेरी कार्ड बनाने और पढ़ी गई किताबों की सूची कार्ड में दर्ज करने को लेकर चर्चा की गई।

लाइब्रेरी में बेहतर अध्ययन की व्यवस्था और लाइफ स्किल सेशन आयोजित करने जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे। प्रस्तावना की समझ पर भी चर्चा हुई।

इस आयोजन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि 17 किशोरियों ने लाइब्रेरी से किताबें इश्यू करवाईं।

भगत सिंह जयंती के अवसर पर हुई यह पहल उनके विचारों पर चर्चा के साथ पढ़ने और लाइब्रेरी से जुड़ने की गतिविधियों को भी सामने लाती है।

कदियापुर युवा केन्द्र: युवाओं ने भगत सिंह के जीवन और विचारों पर की बातचीत

A group of eight individuals sitting on a striped mat, raising their fists in a show of solidarity or protest, with a backdrop of plants and outdoor lighting.

कदियापुर युवा केन्द्र पर युवाओं के साथ शहीद भगत सिंह का जन्मदिवस मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगत सिंह के चित्र पर फूल चढ़ाकर की गई। इसके बाद युवाओं के साथ उनके जीवन, संघर्ष और विचारों पर बातचीत हुई।

युवाओं को बताया गया कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव में हुआ था। वे बचपन से ही देश की आजादी और समाज में बदलाव के बारे में सोचते थे। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके संघर्ष और युवाओं में जागरूकता पैदा करने के उनके प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

बातचीत में इस बात को भी शामिल किया गया कि भगत सिंह केवल आजादी ही नहीं, बल्कि ऐसा समाज चाहते थे जहां सभी लोगों को बराबरी और सम्मान मिले। शिक्षा, समानता और सामाजिक बदलाव उनके विचारों के महत्वपूर्ण हिस्से थे।

युवाओं ने भगत सिंह के जीवन से जुड़ी बातें साझा कीं और इस पर विचार किया कि आज के समय में उनके विचारों को अपने जीवन और समाज में किस तरह अपनाया जा सकता है।

इस चर्चा के जरिए युवाओं को अपने आसपास हो रहे बदलावों को समझने, सवाल पूछने और अपने स्तर पर पहल करने की जरूरत पर बात करने का अवसर मिला।

A group of people sitting in an orange tent with a colorful patterned mat. They are gathered around a banner featuring a soldier and text promoting an event.

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भगत सिंह को याद करने की ये पहलें दिखाती हैं कि उनके विचार आज भी बच्चों और युवाओं के बीच बातचीत का हिस्सा हैं। उन्हें जानने, समझने और अपने आसपास के सवालों से जोड़ने की ये कोशिशें आगे भी जारी रहें, यही उम्मीद है।

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