दीपांशु नेगी:
वीरू नेगी ग्राम पुखरोड़ा, बारबीसी क्षेत्र, तहसील देवलथल, ज़िला पिथौरागढ़ के किसान हैं। लंबे समय से किसानी का काम करते-करते उनके पास अच्छा अनुभव था। लेकिन जलवायु परिवर्तन और जंगली जानवरों के प्रभाव से वह खेती छोड़ने का मन बना लिया था। पर मिट्टी की पुकार और नई तकनीक ने उनके कदमों को रोक दिया।
यह कहानी है उत्तराखंड के एक पहाड़ी गाँव की जहाँ बदलते मौसम में पहाड़ों की पारंपरिक जलवायु परिवर्तन व जंगली जानवरों की मार से किसानो की कमर तोड़ दी थी।
पहाड़ों पर मौसम की मार
वीरू नेगी सदियों पुराने सीढ़ीदार खेतों (terrace farming) में मड़वा, रागी, झंगोरा, गहत की दाल और लाल चावल उगाते थे। लेकिन पिछले एक दशक में पहाड़ का मिजाज पूरी तरह बदल गया। पहाड़ों में बदलते मौसम ने तीन बड़े संकट खड़े कर दिए थे।
- बारिश का गायब होना: सर्दियों में जो बारिश खेतों की मिट्टी में नमी बनाए रखती थी, वह अब ना मात्र की रह गई है।
- सूखे गधेरे (जल स्रोत): बारिश का पैटर्न बदलने से पहाड़ों के पारंपरिक “नौले” और “धारे” (जल स्रोत) सूखने लगे।
- जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचाना भी वीरू नेगी के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया था।
पहले के समय में किसान बैल और हल की सहायता से खेत जोतते थे, और जानवरों के गोबर से खाद बनाते थे। परंतु ग्रामीणों के पलायन करने से युवा शहर की ओर चले गए हैं। गाँव में सिर्फ बुजुर्ग ही रह गए हैं। जिस कारण खेती में असर पड़ रहा है। गाँव के किसानों को परेशानी हो रही है।
बादल फटना और ओलावृष्टि: जब बारिश होती है तो इतनी तेज़ होती है की खड़ी फसल के साथ-साथ पहाड़ों की उपजाऊ मिट्टी भी बह जाती है।
अब इन पहाड़ों में ना तो बारिश हो रही है, ना फसल की अच्छी पैदावार हो रही है। इस सूखी मिट्टी को खोदकर अब परिवार का पेट नहीं भरता। वीरू नेगी ने एक शाम भारी मन से पलायन (शहर जाने) की बात सोचकर कहा।
जब पहाड़ों ने बदल ली अपनी करवट, तो गाँव के कई लोगों ने पलायन कर लिया था, लेकिन वीरू नेगी अपनी जड़ों को छोड़ना नहीं चाहते थे।
जब 2020 में कोरोना महामारी भारत में आई, तो शहर के लोगों का आगमन गाँवों की तरफ हुआ और लोग अपना जीवन गाँव में व्यतीत करने लग गए। बहुत सारे लोग गाँव में फल, फूल इत्यादि बेचकर अपना जीवन जी रहे हैं। सरकार द्वारा किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज, पौधे और कृषि से संबंधित यंत्र दिए गए हैं। और गाँव के खेतों तक पानी पहुँचाने की सुविधा दी गई है।

विगत तीन-चार वर्षो से मैं देख रहा हूँ वीरू नेगी जैसे अन्य किसान ने आजिविका मिशन के तहत व्यापार समूह बनाकर अनाज, फल और सब्ज़ियों को बाज़ार में बेचना शुरू किया है। आजीविका योजना के तहत किसानों द्वारा किए गए उत्पादन का प्रचार-प्रसार भी किया गया है।
आज पहाड़ों में किसानों को लेकर युवाओं में भी काफी उत्सुकता दिखाई दे रही है। पहाड़ के युवा शहर जाकर कृषि के विषय में जानकारी व डिग्री लेकर पहाड़ों के खेतों में नए-नए आविष्कार कर रहे हैं। जिससे पैदावार भी अच्छी हो रही है तथा फसल, फल और पौधों की गुणवत्ता में सुधार भी हो रहा है। आशा करता हूँ कि वीरू नेगी जैसे किसान पहाड़ों के हर गाँव में कृषि के काम को बढ़ावा देकर लोगों को अधिक रूप से मज़बूत करेंगे।
विरु नेगी की मुलाकात एक दिन कृषि प्रसार अधिकारी से हुई। उन्होंने समझाया कि मौसम बदल रहा है, इसलिए हमें क्लाइमेट स्मार्ट हिल फार्मिंग (climate-smart hill farming) अपनानी होगी। वीरू नेगी ने हार मानने के बजाय अपने सीढ़ीदार खेत में वैज्ञानिक विधि से काम करना शुरू किया।
- चाल-खाल का पुनर्जीवन: उन्होंने ढलान वाले खेतों के ऊपरी हिस्से में छोटे-छोटे गड्ढे (चाल-खाल) और वृक्षारोपण किया। इससे बारिश का पानी सीधे बहने के बजाय ज़मीन के अंदर रुकने लगा और सूखे धारे-नौलों में पानी फिर से फूट पड़ा और आने लगा।
- पारंपरिक अनाजों की ताकत: उन्होंने मड़वा और झंगोरा जैसे पारंपरिक फसलों का रकबा बढ़ाया और मोटे अनाजों को प्राथमिकता दी, जो कम पानी और तीखी धूप को झेलने में सक्षम होती हैं।
- कीवी और जड़ी बूटी: जो फसल जंगली जानवरों और जलवायु परिवर्तन की मार को झेल सकते हैं, जैसे अदरक, हल्दी, कीवी (kiwi) के पौधे और औषधीय जड़ी-बूटियाँ लगाना शुरू किया। जिनके बाज़ार के दाम भी अच्छे मिलते हैं।
पहाड़ सा हौसला जीत गया
2 साल की कड़ी मेहनत रंग लाई। जहाँ गाँव के अन्य खाली पड़े खेतों में जंगली झाड़ियाँ उग आई थीं। वीरू नेगी के सीढ़ीदार खेत कीवी के फलों और मडुवे की बालियों से लद चुके थे। जल संचय (water harvesting) की वजह से उनके खेतों को संकट के समय भी पानी मिलता रहता है।
पहाड़ का मौसम ज़रूर गर्म और अनिश्चित हुआ था, लेकिन वीरू नेगी ने दिखा दिया कि अगर हौसला पहाड़ जैसा हो, तो बदलती हवा में भी अपनी मिट्टी को आबाद रखा जा सकता है। अब शहर गए गाँव के दूसरे युवा भी वीरू नेगी की ‘स्मार्ट किसानी’ को देखने वापस लौटने लगे हैं।

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