डॉ. जितेंद्र मीणा: 

प्रस्तावना : भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में वर्ष 2023–24 को एक ऐसे निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा सकता है, जब आदिवासी राजनीति ने स्वयं को केवल आरक्षित प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी राज्य की परिधि से बाहर निकालते हुए राजनीतिक आत्मनिर्णय, स्वशासन और संवैधानिक अधिकारों की स्पष्ट तथा संगठित मांग के रूप में प्रस्तुत किया। इसी ऐतिहासिक संदर्भ में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का उदय हुआ है। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे आदिवासी-बहुल राज्यों में 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गठित यह पार्टी न केवल एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक शक्ति के रूप में सामने आई, बल्कि उसने भारतीय राजनीति की प्रचलित प्रतिनिधित्व संरचनाओं, संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवहार को गंभीर चुनौती भी दी।

भारत आदिवासी पार्टी का महत्व केवल इसके चुनावी प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह पार्टी उस गहरे असंतोष, ऐतिहासिक उपेक्षा और संवैधानिक अवहेलना की राजनीतिक अभिव्यक्ति है, जो स्वतंत्र भारत में आदिवासी समाज के अनुभव का अभिन्न हिस्सा रही है। जल, जंगल और ज़मीन पर अधिकार; ग्राम सभा की सर्वोच्चता; पेसा अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन; तथा सांस्कृतिक पहचान की रक्षा-ये प्रश्न दशकों से आदिवासी आंदोलनों के केंद्र में रहे हैं, किंतु मुख्यधारा की राजनीति ने इन्हें अक्सर हाशिए पर रखा। BAP का उदय इसी ऐतिहासिक रिक्तता को भरने का प्रयास है।

उदय की सामाजिक–राजनीतिक पृष्ठभूमि : स्वतंत्र भारत में आदिवासी समाज की स्थिति एक गहरे विरोधाभास से चिह्नित रही है। एक ओर राज्य और समाज ने उन्हें “प्रकृति का संरक्षक” और “प्राचीन संस्कृति का वाहक” के रूप में महिमा-मंडित किया, वहीं दूसरी ओर उन्हीं की भूमि, जंगल और खनिज संसाधनों को विकास परियोजनाओं, औद्योगीकरण और खनन के नाम पर व्यवस्थित रूप से छीना गया। इस प्रक्रिया में आदिवासी समाज बड़े पैमाने पर विस्थापन, आजीविका संकट, गरीबी और सामाजिक असुरक्षा का शिकार हुआ।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर भी आदिवासी समाज की भागीदारी प्रायः प्रतीकात्मक रही है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रीय पार्टियों में आदिवासी नेता उभरे, किंतु उनकी राजनीतिक भूमिका अक्सर पार्टी हाई कमान की नीतियों के क्रियान्वयन तक सीमित रही। समुदाय के प्रति जवाबदेही के बजाय पार्टी अनुशासन को प्राथमिकता दिए जाने से यह धारणा मज़बूत होती गई कि आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है, न कि राजनीतिक निर्णयों के सक्रिय सहभागी के रूप में।

इसी पृष्ठभूमि में गुजरात स्थित भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP, बीटीपी) ने 2018 में दक्षिण राजस्थान में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की। किंतु पार्टी के भीतर केंद्रीयकरण, स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा और राजनीतिक निर्णयों में बाहरी हस्तक्षेप ने असंतोष को जन्म दिया। 2020 के राजनीतिक संकट और राज्यसभा चुनावों के दौरान यह असंतोष खुलकर सामने आया, जिसके परिणामस्वरूप राजकुमार रोत और रामप्रसाद डिंडोर जैसे नेताओं ने बीटीपी से अलग होकर एक नई पार्टी भारत आदिवासी पार्टी के गठन का निर्णय लिया।

गैंजी घाटा सभा: राजनीतिक आत्मघोषणा : राजस्थान के डूंगरपुर जिले के गैंजी घाटा मैदान में 10 सितंबर 2023 को आयोजित सभा BAP के राजनीतिक आगाज़ का प्रतीक बन गई। लगभग डेढ़ लाख लोगों की उपस्थिति वाली इस सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि बीएपी (BAP) केवल एक संगठनात्मक प्रयोग नहीं, बल्कि एक व्यापक जनाधार वाला आंदोलन है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार से आए आदिवासी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने पार्टी की अंतर-राज्यीय महत्वाकांक्षा को रेखांकित किया।

सभा में दिया गया यह नारा – “अब दारू, मुर्गा या नोट से आदिवासी का वोट नहीं खरीदा जाएगा” – आदिवासी राजनीति के नैतिक पुनर्निर्माण का आह्वान था। यह घोषणा कि आदिवासी उम्मीदवारों का चयन दिल्ली, जयपुर या भोपाल के बंद कमरों में नहीं, बल्कि समुदाय द्वारा जाजम पर बैठकर किया जाएगा। प्रतिनिधि लोकतंत्र को सहभागी लोकतंत्र से जोड़ने का प्रयास है। यह वक्तव्य भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक निर्णय-निर्माण की मौजूदा केंद्रीकृत प्रवृत्ति के विरुद्ध एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत करता है।

संगठनात्मक संरचना और नेतृत्व : BAP की संगठनात्मक संरचना इसकी समावेशी और बहु-राज्यीय दृष्टि को प्रतिबिंबित करती है। मोहनलाल रोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष और जितेंद्र असलकर को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। 51 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बनाई गई, जिनमें राजकुमार रोत, रामप्रसाद डिंडोर, कांतिलाल रोत, प्रो. जितेंद्र मीणा, दिलीप वसावा, हरिलाल गोदा, और माया कलासुआ जैसे नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया।

यह संरचना इस बात का संकेत देती है कि BAP स्वयं को केवल राजस्थान या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा तक फैले आदिवासी भूगोल को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने की महत्वाकांक्षा रखती है। यह प्रयास आदिवासी राजनीति को क्षेत्रीय सीमाओं से मुक्त कर एक व्यापक राष्ट्रीय विमर्श में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

वैचारिक कोर: भील प्रदेश की मांग :  BAP का सबसे केंद्रीय और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण एजेंडा है- भील प्रदेश का निर्माण। यह प्रस्ताव राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के 43 ज़िलों को मिलाकर एक नए राज्य की मांग करता है। पार्टी इसे केवल प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय के सुधार और संवैधानिक अधिकार के रूप में प्रस्तुत करती है। भील प्रदेश की मांग का ऐतिहासिक संदर्भ 1913 के मानगढ़ नरसंहार और गोविंद गुरु के आंदोलन तक जाता है। BAP इसे संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची और आदिवासी स्वशासन की भावना से जोड़ती है।

ग्राम सभा, पेसा और लोकतंत्र की पुनर्परिभाषा : BAP की राजनीति का वैचारिक आधार ग्राम सभा की सर्वोच्चता और पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है। क्योंकि भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची तथा पेसा कानून को दशकों से व्यवस्थित रूप से नज़रअंदाज़ किया गया है। अनुसूचित क्षेत्रों में अवैध खनन, भूमि अधिग्रहण और संसाधनों का दोहन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन है।

जब तक ग्राम सभाओं को वास्तविक निर्णयकारी शक्ति नहीं दी जाती, तब तक आदिवासी समाज का सशक्तिकरण संभव नहीं है। इस दृष्टि से, पार्टी का एजेंडा प्रतिनिधि लोकतंत्र की सीमाओं को रेखांकित करते हुए सहभागी लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का प्रयास करता है।

भारतीय राजनीति में बीएपी (BAP) का महत्व :  भारत आदिवासी पार्टी का महत्व केवल उसकी चुनावी सफलता में नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की संरचनात्मक सीमाओं को चुनौती देने में निहित है। पहला, BAP कांग्रेस–भाजपा केंद्रित द्विध्रुवीय राजनीति को चुनौती देती है और एनडीए तथा ‘इंडिया’ गठबंधन दोनों से दूरी बनाकर वैचारिक स्वायत्तता का दावा करती है। दूसरा, यह प्रतिनिधित्व की राजनीति को जवाबदेही की राजनीति में रूपांतरित करने का प्रयास करती है।

तीसरा, भील प्रदेश की मांग के माध्यम से पार्टी संघवाद, पहचान और स्वशासन पर राष्ट्रीय विमर्श को पुनर्जीवित करती है। चौथा, BAP आदिवासी राजनीति को दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य हाशिए के समुदायों के साझा संघर्ष से जोड़ने की संभावना प्रस्तुत करती है।

चुनावी प्रदर्शन और राजनीतिक विस्तार : BAP की राजनीतिक प्रासंगिकता उसके चुनावी प्रदर्शन से भी स्पष्ट होती है। 2023 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान में तीन और मध्य प्रदेश में एक सीट पर जीत ने पार्टी को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया। 2024 के लोकसभा चुनाव में बांसवाड़ा से राजकुमार रोत की जीत ने पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

उपचुनावों में बागीदौरा, चौरासी विधानसभा सीट पर जीत और सलूम्बर में पार्टी का बढ़ता हुआ प्रभाव यह दर्शाता है कि BAP केवल विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि शासन की वैकल्पिक संभावना के रूप में उभर रही है। राजस्थान में राज्य पार्टी का दर्जा मिलना और मध्य प्रदेश विधानसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना इसके बढ़ते प्रभाव का संकेत है।

संसद में BAP की भूमिका: राष्ट्रीय मंच पर आदिवासी आवाज : BAP की राष्ट्रीय उपस्थिति को सुदृढ़ करने में राजकुमार रोत की संसद में भूमिका निर्णायक रही है। 2024 में उनकी लोकसभा जीत केवल एक संसदीय सफलता नहीं, बल्कि उस राजनीति की संसद में एंट्री थी, जिसे लंबे समय तक क्षेत्रीय या सीमांत मानकर नज़रअंदाज़ किया गया।

संसद में उनके हस्तक्षेप जल–जंगल–जमीन, पेसा अधिनियम, वनाधिकार कानून, अवैध खनन और पांचवीं अनुसूची के उल्लंघन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली भावनात्मक अपील से अधिक संवैधानिक तर्क और नीति–आधारित विमर्श पर आधारित है। इस प्रकार, वे संसद और ग्राम सभा के बीच एक राजनीतिक सेतु निर्मित करते दिखाई देते हैं।

निष्कर्ष

भारत आदिवासी पार्टी, भारतीय लोकतंत्र में एक नए राजनीतिक क्षण का प्रतिनिधित्व करती है। यह पार्टी उस बदलाव की प्रतीक है, जहाँ आदिवासी समाज स्वयं को केवल कल्याण का पात्र नहीं, बल्कि राजनीतिक कर्ता के रूप में स्थापित कर रहा है। BAP ने भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व, संघवाद, स्वशासन और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर एक नई, गंभीर और अपरिहार्य बहस को जन्म दिया है। यही इसका सबसे बड़ा ऐतिहासिक महत्व है।

Author

  • डॉ. जितेंद्र मीणा, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और ‘राष्ट्र निर्माण में आदिवासी’ पुस्तक के लेखक हैं। आदिवासी समाज, उसकी भूमिका और राष्ट्र निर्माण में समाज के योगदान से जुड़े विषयों पर वे निरंतर लेखन और वैचारिक हस्तक्षेप करते रहे हैं।

    View all posts

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading