अमित :

ज़रा सोच कर देखिये, क्या कोई शहर या हवाई अड्डे का नामकरण किसी कवि के नाम पर हुआ हो ऐसा याद आता है? क्यूबा नाम के छोटे से देश का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वहाँ के राष्ट्रीय कवि, होसे मार्टी के नाम पर रखा गया है – होसे मार्टी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हवाना।

तो कौन था यह शक्स, चलिये आज आपका इनसे परिचय करवाता हूँ। लेकिन इनके बारे में बताने के पहले आपको एक मशहूर गीत गुआन्तानामेरा के बारे में बताता हूँ। होसे मार्ती की कहानी इस गीत की कहानी के बिना अधूरी है।

गुवेयरा गुआन्तानामेरा, क्यूबा का एक पुराना लोक गीत था, एक गाँव की लड़की के बारे में जो अपने पति से तंग आकर उसे छोड़ देती है। गुआन्तानामेरा का अर्थ है, गुआनतानामो की महिला। यह उस शैली का गीत था जिसमें पहली कड़ी के बाद गाने वाले अपने हिसाब से लाइनें जोड़ते जाते थे। अक्सर लोक गीत ऐसे ही होते हैं और समय और परिस्थितियों के हिसाब से इनमें शब्द बदलते रहते हैं। 

1891 में होसे मार्ती के कविता संग्रह, वर्सोस सेन्सीलोस ; सरल कविताएँद्ध में होसे ने एक कविता लिखी – 

मैं एक सीधा सादा आदमी हूँ, उस देश से जहाँ पाम के पेड़ उगते हैं, 

मरने के पहले मैं अपनी आत्मा की कविताएँ सबके साथ साझा करना चाहता हूँ, 

मेरी कविता शांत हरा रंग भी है और भड़क क्रिम्सन भी, 

मेरी कविता एक घायल हिरन का बच्चा है जो सहायता ढूंढ रहा है, 

….मैंने अपना दिल दुनिया के गरीबों के साथ लगा लिया है… मुझे छोटी पहाड़ी नदियाँ, समुद्र से ज़्यादा अच्छी लगती हैं। 

1920 में इस कविता की पंक्तियों को जोसीटो फ़र्नैन्डिस ने गीत के रूप में एक रेडिया प्रोग्राम में गाया। 1963 में अमरीका के मशहूर विद्रोही गायक पीट सीगर नें इस गीत को गा कर बहुत लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद तो यह गीत इतना फैल गया कि अमरीका में भी हर किसी की ज़ुबान पर चढ़ गया। बाद में बहुत से ग्रुप्स ने इसे गाया और यह गीत दुनिया भर में मशहूर हो गया। क्यूबा का तो यह अनौपचारिक राष्ट्रीय गीत ही बन गया। जैसे आज, हम होंगे कामयाब…. गीत है, कुछ वैसे ही इसके समय का यह गीत बन गया। यह गीत केवल एक प्रेम गीत न होकर, क्यूबा की आत्मा बन गया। इसके सादे शब्द लोगों को अपनी ज़िन्दगी को बदलने के लिये प्रेरित करने लगे।

तो साथियों ऐसा जादू था होसे मार्ती के शब्दों में।

होसे मार्ती क्यूबा के आज़ादी आंदोलन का एक मशहूर नाम है। जैसे हमारे देश में, भगतसिंह और सुभाषचन्द्र बोस हैं जिनका नाम बच्चा बच्चा जानता है, उसी तरह की हस्ती होसे मार्ती थे। आप सोचेंगे कि क्यूबा, जिसका नाम भी नहीं सुना, उस देश के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में हमें जानने में क्यों रूचि होनी चाहिये? थोड़ा ठहरिये, इतनी जल्दी मत कीजिये पन्ना पलटने की। एक तो यह कि विचार की कोई सीमा नहीं होती और दूसरा यह कि जैसे प्यार करने वालों के लिये जाति, देश की सीमाएँ कोई मायने नहीं रखतीं वैसे ही संघर्षों में लगे लोगों के लिये भी जाति, कुल, भाषा, देश की सीमाओं का कोई अर्थ नहीं होता। इन सीमाओं को लांघ कर हम दोस्तियाँ बनाते हैं और एक दूसरे के अनुभवों, विचारों से सीखते हैं।

होसे मार्ती का जन्म 28 जनवरी 1853 के दिन क्यूबा में हुआ। क्यूबा एक छोटा सा द्वीप है जो उस समय स्पेन का उपनिवेश था, बिलकुल वैसे ही जैसे भारत इंगलैण्ड का उपनिवेश था। हालाँकि होसे के माता पिता स्पैनिश थे लेकिन वे क्यूबा में नौकरी करते थे। बचपन से ही यह बात उसे बहुत कचोटती थी कि स्थानीय क्यूबन लोगों को गुलाम बनाकर घरों में, गन्ने के खेतों में काम करवाया जाता है और उनके साथ बहुत ही बद्तमीज़ी का व्यवहार किया जाता है। ये अन्याय के दृश्य उसके दिमाग पर छप गये और उसने स्कूल के पढ़ाई करते हुए ही इन बातों के बारे में कविताएँ और लेख लिखने शुरू कर दिये। उनकी कलम में जादू था। वे स्पैनिश हुकूमत के शोषण और ज़ुल्मों के बारे में कविताएँ और लेख लिखने लगे। उनके शब्द, गुलाम जनता के दिल और दिमाग को उद्वेलित कर देते और उन्हें हालात को बदलने के लिये सोचने पर मज़बूर कर देते थे। उनकी कविताओं में प्यार, प्रकृति, आज़ादी और इन्सानियत – सब कुछ है। उनकी कविताओं में क्यूबा की मिट्टी से प्यार की बहुत स्ट्राॅन्ग वाइब झलकती थी। मार्ती की कविताएँ इतनी पावरफु़ल थीं कि उन्हेंं क्यूबा का राष्ट्रीय कवि घोषित कर दिया गया। आज भी लोग उनकी कविताओं और गीतों को गाते हैं और उन्हें एक हीरो की तरह देखते हैं। युवाओं से लेकर बुज़ुर्गों तक, सब उनकी कविताओं के दीवाने थे। उनकी लेखन शैली ऐसी थी जिसने पुराने ढर्रे को तोड़कर कुछ नया और क्रियेटिव लाया। इस नई शैली – माॅडर्निस्मों – का उन्हें बिग बाॅस भी कहा जाता है। 

अब यह सोच के देखो कि एक सोलह साल का लड़का, जिसकी कलम के जादू ने जनता को इतना मोटिवेट कर दिया कि स्पैनिश हुकूमत को यह डर लगने लगा कि कहीं जनता बगावत न कर दे। इस डर के कारण स्पैनिश हुकूमत ने वही किया जो ऐसी स्थिती में हुकूमतें किया करती हैं – होसे मार्ती को जेल में डाल दिया। तीन साल जेल में रहने के बाद उनको देश निकाला दे दिया। मज़े की बात यह है कि होसे, स्पेन जाकर रहने लगा और अपनी कविता और लेख लिखता रहा। वहाँ के शासन ने उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि उन्हेंं पता था कि वहाँ उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। इस दौरान उन्होंने यूरोप व दक्षिण अमरीका के बहुत से देशों का दौरा किया। दूसरे देशों को गुलाम बनाने वाले देशों की मानसिकता व सोच को भी समझा और गुलाम बने देश के लोगों के कष्ट को भी बारीकी से समझा। इसके बाद वे अमरीका के न्यू याॅर्क शहर में रहने लगे। जेल में सही यातनाओं के कारण उनका स्वास्थ भी ठीक नहीं रहता था। लेकिन स्पेन के चंगुल से क्यूबा को मुक्त करवाने का जुनून अब भी उनके सिर पर सवार था और वहाँ रहकर वे उनके जैसे समविचारी लोगों से जुड़े रहे। 

क्यूबा में स्पेन के खि़लाफ़ लड़ाई तेज़ हो गई थी और बहुत से युवा मारे जा रहे थे तो न्यू याॅर्क में बैठे बैठे मार्ती को चैन नहीं मिल रहा था। उसे लगा कि उसे भी लड़ाई में उन युवाओं के साथ खड़े रहना ज़रूरी है और वे 1895 में वापिस क्यूबा चले गये। वहाँ जाते ही वे स्पेन की सेना के साथ एक संघर्ष में शहीद हो गये।

लेकिन कलाकार कभी मरते नहीं हैं। कलाकारों की कलाकृतियाँ आने वाले पीढ़ियों से भी संवाद करती रहती हैं। आज भी होसे मार्ती की लिखी कवितायें युवा पीढ़ी को प्रभावित करती हैं।

गीतों के शब्दों में, आम जनता को जोड़ने की और उन्हें प्रेरणा देने की अद्भुत ताकत होती है। बहुत बार जिन बातों को हम महसूस करते हैं लेकिन सटीक ढंग से कह नहीं पाते, उन भावों को गीत के शब्द बयाँ कर देते हैं और उन्हें सुनते ही हमारा उस गीत से कनेक्शन बन जाता है। जब कोई गीत बड़े पैमाने पर लोगों की ज़ुबान पर चढ़ जाये, मतलब कि उसने आम जन के भावनाओं को व्यक्त किया होगा। ऐसे बहुत से गीत, अलग-अलग देशों में, दबे कुचले लोगों के, गुलामी की ज़ज़ीरों को तोड़ने के संघर्षों से उपजे हैं। आशा करते हैं हम आगे भी आपका परिचय ऐसे गीतों से करवाते रहेंगे।

होसे मार्ती के जीवन से हमें यह प्रेरणा लेनी चाहिये के कम उम्र में भी यदि हमारे मन में किसी बड़े आइडिया का सपना है तो उसके पीछे हमें पूरे जोश से लग जाना चाहिये।

होसे मार्ती के गीत को निचे लिंक पर जाकर सुन सकते हैं –

  1. Joseito Fernandez Guantanamera HQ – https://youtu.be/craeb9A7MQ8?si=J3x2WFEbziRFjIHh
  2. Pete Seeger Guantanamera 1963 Lyrics – https://youtu.be/CiQLcoXRxcI?si=r8rZH_UyQnGkV36h
  3. Guantanamera | Playing For Change | Song Around The World – https://www.youtube.com/watch?v=blUSVALW_Z4

फीचर्ड फोटो आभार : विकिपीडिया

Author

  • अमित, सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं और मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले में एक वैकल्पिक शिक्षा के प्रयोग पर शुरू हुआ स्थानीय स्कूल – आधारशिला शिक्षण केन्द्र चलाते हैं।

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