नंदिनी शर्मा :
समाज कहता, समझ से बढ़ो,
शांति और एकता का दीप जलाओ।
हर दिल में प्रेम का संचार हो,
हर मन में स्नेह का विस्तार हो।
पर राजनीति की राह अलग होती,
जहां शक्ति और प्रभाव की बात होती।
समझ के बदले टकराव का जोर,
विकास की जगह संघर्ष का शोर।
धर्म, भाषा, संस्कृति के नाम,
बन जाते राजनीति के काम।
समझ कहती, एक हो जाओ,
पर राजनीति तो बंटवारे के बीज बो जाए।
एकता की चाह सबको है,
शांति का सपना सबके मन में है।
फिर क्यों राजनीति के खेल,
भेदभाव और लड़ाई के मेल?
समाज की धरना कहती,
हम सबको मिलकर चलना होगा।
हर दिल से बैर हटाना होगा,
साथ मिलकर देश सजाना होगा।
राजनीति को भी समझ की राह दिखानी है,
विकास की ओर कदम बढ़ानी है।
शक्ति की हो जगह, सहयोग का मोल,
तभी देश बनेगा मजबूत और अनमोल।
हाथ बढ़ाओ, दिल से दिल जोड़ो,
समझ और शांति से जीवन संवारो।
समाज और राजनीति का यही संगम हो,
एकता का दीप हर दिशा में प्रज्वलित हो।
अब हमें तय करना है,
समझ की राह पर बढ़ना है।
राजनीति को भी सिखाना है,
हर दिल में प्रेम जगाना है।
समाज की धरना, सरल हो जाए,
राजनीति भी प्रेम से जुड़ जाए।
तब ही देश में विकास होगा,
हर दिशा में प्रकाश होगा।

Leave a Reply