नाज़नीन:
मुझे लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य से कलंक को दूर करना वास्तव में महत्वपूर्ण है…मेरा दिल और दिमाग मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे नहीं पता कि मैं उन चीजों को अपने दांतों की तरह स्वस्थ रखने के लिए मदद क्यों नहीं मांगूंगा?केरी वाशिंगटन

सभी तनाव, चिंता, अवसाद तब होते हैं जब हम अनदेखा करते हैं कि हम कौन हैं, और दूसरों को खुश करने के लिए जीना शुरू करते हैं।पाउलो कोएल्हो

परिचय:

क्या आप जानते हैं कि लगभग 5 में से 1 महिला अपने जीवन में किसी न किसी समय मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती है?

हाल ही में 26 साल की एक कामकाजी महिला की मौत ने एक गंभीर मुद्दे को उजागर किया है, जो लाखों कामकाजी महिलाओं को सोचने पर मजबूर करता है। चेन्नई में एक फार्म में काम कर रहे 38 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने 15 साल की मेहनत के बाद अपना जीवन समाप्त कर लिया। यह देखकर दुख होता है कि कई लोग, जिनका करियर सफल होता है, फिर भी वे मानसिक तनाव से परेशान हैं।

भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। द लांसेट साइकियाट्री कमीशन के अनुसार, 197 मिलियन से ज्यादा लोग अवसाद, चिंता और नशे की आदत जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आर्थिक विकास ने नए अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ-साथ सामाजिक दबाव और उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। जैसे-जैसे भारत की तरक्की की चाह बढ़ती है, मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

दोस्तों, जैसी कि ऊपर लिखी पंक्तियों से आपने थोड़ा बहुत अनुमान लगा लिया होगा कि आखिर में  किस बारे में बात करने जा रही है। हम जानेंगे मानसिक स्वास्थ्य के बारे में और साथ ही, मैं अपनी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यात्रा भी आपके साथ साझा करूंगी। इसके साथ मैं आपसे ये भी साझा करूंगी कि कैसे आप अपनी मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं।

 ●  मानसिक स्वास्थ्य को समझना

मानसिक स्वास्थ्य को एक ऐसी स्थिति के रूप में समझा जा सकता है जहां व्यक्ति जीवन के आम तनावों का सामना कर सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अच्छा काम कर सकता है और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

आपका मानसिक स्वास्थ्य आपके कल्याण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह आपके जीवन में कैसे काम करते हैं, भावनाओं को कैसे संभालते हैं और दूसरों के साथ कैसे जुड़े रहते हैं, इस पर असर डालता है।

●   मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

1. जीवन संतोष (Life Satisfaction)

जीवन संतोष का मतलब है कि आप अपनी जिंदगी से कितने खुश हैं। जब आप अपनी परिस्थितियों, रिश्तों और अपने काम से संतुष्ट होते हैं, तो आपको खुशी महसूस होती है। यह आपको आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों की ओर काम करने के लिए प्रेरित करता है।

2. समर्थन (Support)

समर्थन का मतलब है कि आपके पास ऐसे लोग हैं जो आपकी मदद करते हैं, जैसे दोस्त, परिवार या सहकर्मी। जब आप मुश्किल समय से गुजरते हैं, तो इनका समर्थन आपको बेहतर महसूस कराता है और समस्याओं का सामना करने में मदद करता है।

3. लचीलापन (Flexibility)

लचीलापन का मतलब है कि आप बदलावों के लिए तैयार हैं और नई परिस्थितियों के साथ समंजस्य बैठा सकते हैं। जब आप लचीले होते हैं, तो आप नई चीजों को आसानी से अपनाते हैं और विभिन्न परिस्थितियों में सफल होते हैं ।

महिलाओं के आमतौर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों, जैसे:

1. आत्म-सम्मान (Self-esteem)

आत्म-सम्मान का मतलब है कि आप खुद को कितना महत्व देते हैं और अपने प्रति कितना सकारात्मक महसूस करते हैं, मतलब है कि हम अपने आप को और अपनी कीमत को कैसे मूल्यांकित करते हैं ।

2. चिंता (Anxiety)

चिंता एक ऐसा भाव है जब आप किसी चीज़ के बारे में बहुत अधिक सोचते हैं या डरते हैं। यह एक सामान्य भावना है, लेकिन अगर यह बहुत ज्यादा हो जाए, तो यह आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।

3. अवसाद (Depression)

अवसाद एक गंभीर मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति लगातार उदासी और निराशा महसूस करता है। इससे व्यक्ति की रुचियां कम हो जाती हैं, और सामान्य गतिविधियों में भी मजा नहीं आता। अवसाद के लक्षणों में थकान, नींद में बदलाव, और आत्म-सम्मान में कमी शामिल हो सकते हैं। अगर यह लंबे समय तक रहता है, तो विशेषज्ञ से मदद लेना ज़रूरी है।

ऊपर हमने कुछ सामान्य मुद्दों की बात की, जो आजकल लोग आसानी से अनुमान लगाते हैं या जल्दी पहचान लेते हैं। लेकिन अगर हम कुछ अन्य चीज़ों पर ध्यान दें, तो मुझे लगता है कि समाज में और भी ऐसे विषय हैं जो महिलाओं के मानसिक तनाव को बढ़ाने में बहुत प्रभावी साबित हुए हैं।

इन विषयों में पारिवारिक अपेक्षाएँ, कार्य-जीवन संतुलन, सामाजिक दबाव और खुद पर संदेह जैसे मुद्दे शामिल हैं। ये सभी कारक महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, हमें इन मुद्दों पर भी गहराई से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि हम मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ

महिलाओं पर सामाजिक दबाव कई प्रकार के होते हैं, जो उनकी जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। यहां कुछ मुख्य दबावों का उल्लेख किया गया है:

1. पारिवारिक जिम्मेदारियाँ –  महिलाओं से अक्सर यह उम्मीद की जाती है कि वे घर और परिवार की देखभाल करें। कामकाजी महिलाओं को दोनों जिम्मेदारियों को संभालना काफी समय मुश्किल हो जाता है और अधिकांश महिलाएं अपने काम और व्यक्तिगत जीवन में एक संतुलन बनाते-बनाते मानसिक रोग की शिकार हो जाती हैं।

2. सुंदरता  – समाज में महिलाओं की सुंदरता के लिए कई मानक होते हैं। महिलाओं पर यह दबाव होता है कि वे आकर्षक दिखें, जो कभी-कभी उनकी आत्म-सम्मान को प्रभावित करता है।

3. शिक्षा और करियर – कुछ समाजों में महिलाओं को शिक्षा और करियर के मामले में सीमित अवसर मिलते हैं। उन्हें कभी-कभी अपनी पढ़ाई या करियर को परिवार की जरूरतों के लिए छोड़ना पड़ता है। अक्सर यह देखा गया है कि शादी के बाद महिलाएं अपना करियर बीच में छोड़कर अपने परिवार की देखभाल करती हैं। इससे कई बार वे जो अपने जीवन में करना चाहती हैं, वह रुक जाता है, और इसका प्रभाव उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति दोनों पर पड़ता है।

4. विवाह का दबाव – महिलाओं पर विवाह का दबाव भी होता है, खासकर युवा उम्र में।

5. . सुरक्षितता और स्वतंत्रता – महिलाओं को अक्सर समाज में सुरक्षित रहने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मैंने अपने आस-पास भी देखा है कि जब महिलाओं को अपनी पढ़ाई या करियर के लिए बाहर जाना होता है, तो उन्हें अक्सर कहा जाता है कि समय पर घर आना, ज्यादा देर तक बाहर न रहना और ज्यादा घूमना नहीं। इसके अलावा, कई बार उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षित महसूस करने में भी कठिनाई होती है।

मेरी मानसिक परेशानी की यात्रा :

कई महिलाओं की तरह मैंने  भी अपने 23 साल के स्कूल, कॉलेज और जॉब के सफर में इतना मेंटल हेल्थ पर कभी ध्यान नही दिया, इसका मतलब ये नही है कि मैं इन सभी सिचुएशन से गुजरी नहीं, पर मुझे पता ही नही था कि इस पर बात भी की जा सकती है। टेंशन तो खैर मैं बचपन से ही लेती थी पर आज जब तनाव  इतना बढ़ जाता है कि रोने का दिल करता है, सिर भारी-सा लगता है, सुबह जब सोकर उठो तो एक अजीब-सी घबराहट सी होती है । ऐसा लगता है कि ये रात ख़त्म  क्यू हो गयी,  नही उठना, कुछ भी नही करना, बस सोते रहना है, किसी से बात नही करनी ओर न जाने क्या -क्या। कई बार तो सैल्फ डाउट होने लगता है..

पर एक समय आते -आते मुझे लगा कि ऐसा क्या हो रहा है, मैं पहले तो ऐसे नहीं  सोचती थी। क्या मैं उम्र  भर हर परिस्थिति के लिए ऐसे रिएक्ट करूँगी। ऐसे तो शायद मैं लाइफ की बड़ी और छोटी मुश्किल पार ही न कर पाऊँ। धीरे- धीरे मैंने  चीजों को समझा और थोड़ा खुद को समय दिया कि कैसे हैंडल करू, कैसे ठीक करूँ अपनी मेंटल हेल्थ को।

पहले तो मुझे लगा कि ये शायद नॉर्मल है और  मैंने ध्यान नहीं  दिया। आज जब मैं  मेंटल हेल्थ से गुजर रही हूँ, मैं  महसूस कर पा रही हूँ  कि कई बार बहुत मुश्किल होता है बात करना। कई बार तो ऐसा लगा की मैं बात करूंगी  तो लोग मुझे पागल ना कहे या मेरी बात को न सुने या फिर मेरा मजाक बनाये। पर अब मैं इस पर बहुत सोचती हूँ, कैसे मैं अपनी मेंटल हेल्थ मे सुधार ला सकती हूँ ।

समाधान और सुझाव –

मैंने जो चीज़ें अपनी मानसिक स्वास्थ्य की सुधार के लिए अपनाई हैं, वो मैं आपके साथ साझा करना चाहती हूँ।

  1. मदद मांगना – मैंने जो पहला कदम उठाया है, वो है मदद मांगना। अब मैं इसके लिए झिझकती नहीं हूँ। अगर आपको लगता है कि आपको चिकित्सा (थेरेपी) लेनी चाहिए, तो आपको बिना किसी हिचकिचाहट के यह करना चाहिए। बस कोशिश करें कि आप इस पर जरूर ध्यान दें और मदद अवश्य मांगें। कुछ संस्थाएँ जो मानसिक स्वास्थ्य पर काम कर रही हैं, उनके संपर्क आप नीचे दिए गए लिंक से देख सकते हैं Link – World Mental Health Day 2024: Helplines to seek support in India – CNBC TV18 
  2. किसी अपने के साथ साझा करना – कई बार मैंने सोचा कि किससे बात करूं, लेकिन मैंने अपने कुछ खास दोस्तों को खोज लिया है, जिनके साथ मैं खुलकर अपनी मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात कर सकती हूँ। कई बार मुझे समाधान नहीं भी मिलता, लेकिन मुझे यह जानकर सुकून मिलता है कि कोई मेरी बातें सुन रहा है। 
  3. अपने दैनिक लक्ष्यों पर काम करना – मुझे एहसास हुआ कि मेरे तनाव का एक बड़ा कारण उन अधूरे कामों का बोझ है। इसलिए, मैंने एक दैनिक कार्य सूची बनाना शुरू किया, जिससे मैं अपने कार्यों को प्राथमिकता दे सकूं और उन्हें समय पर पूरा कर सकूं|
  4. ब्रेक लेना – पूरे हफ्ते पढ़ाई करना और काम करना वास्तव में एक कठिन कार्य बन जाता है। इसके लिए मैं अब हफ्ते में एक बार बाहर जाकर अकेले कुछ नया एक्सप्लोर करती हूँ।
  5. अपनी हॉबी पर काम करना – अब मैं थोड़ा समय अपनी हॉबीज को देती हूँ, जैसे पेंटिंग करना। जब मैं यह करती हूँ, मेरा संतोष स्तर अपने आप बढ़ जाता है।
  6. ना कहना सीखना – शायद मेरे तनाव का एक कारण यह भी था कि मुझे किसी भी चीज़ के लिए ना कहना नहीं आता आता था और मै दुसरे क्या कहेंगे यह ज़्यादा सोचती थी, मगर मुझे लगता हैं कि हमें ना कहना भी आना चाहिए।
  7. सोशल मीडिया से ब्रेक – मैंने अपने तनाव का एक कारण सोशल मीडिया को भी समझा है। खुद पर संदेह और दूसरों से तुलना करने की प्रवृत्ति शायद मैंने सोशल मीडिया के उपयोग से बढ़ाई। लेकिन अब मैं सोशल मीडिया पर बहुत कम समय बिताती हूँ।
  8. परिवार के साथ समय बिताना – मैं कोशिश करती हूँ कि जितना भी समय मुझे अपनी परिवार के साथ मिलता है, उसे पूरी तरह से जीऊं। बातचीत करूँ और आनंद उठाऊं। इससे मुझे बहुत अच्छा लगता है।
  9. काम और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन – इस पर मैं अभी भी काम कर रही हूँ और आगे भी करती रहूँगी। थोड़ा समय लगेगा, लेकिन मुझे विश्वास है कि मैं इसे हासिल कर लूँगी।
  10. स्वयं पर संदेह न करना – अब मुझे लगता है कि खुद पर संदेह करना कितनी हद तक ठीक है। अगर ऐसा करना है, तो खुद को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, जहाँ भी हमें अपने बारे में संदेह होता है। मैं धीरे-धीरे इन सभी चीज़ों को अपनाने की कोशिश कर रही हूँ।

इन सभी उपायों के जरिए, मैं अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हूँ। यह एक यात्रा है, लेकिन हर छोटे कदम का महत्व है।

निष्कर्ष…….

आखिर में, मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि अगर आप मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो इसका दोष खुद पर न डालें। आज के बढ़ते विकास और कई चीज़ों के अनुमानित प्रभावों के कारण यह देखा जा रहा है कि हर दो में से एक व्यक्ति इससे परेशान है। इसलिए, बस कोशिश करें कि इस पर खुलकर बात करें।

अपने दैनिक जीवन के लक्ष्यों में अपनी मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने पर भी ध्यान दें। ध्यान रखें कि सबसे महत्वपूर्ण आपके लिए आपकी मानसिक स्वास्थ्य है। यदि वह ठीक रहेगी, तो आप सभी कार्यों को अच्छे से कर पाएंगे। अपनी भलाई का ख्याल रखें, क्योंकि यह आपके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करेगा।

अक्टूबर का महीना मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का प्रतीक है, और यह हमें याद दिलाता है कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना कितना महत्वपूर्ण है। इस महीने, आइए हम अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और एक-दूसरे का समर्थन करें।

अंत में यही कहूँगी कि आपकी सबसे बड़ी शक्ति आपकी मानसिक स्थिति में है। इसे सकारात्मक बनाएं और जीवन को अपने तरीके से जीने का साहस रखें।” इस यात्रा में कदम बढ़ाते रहें, क्योंकि हर छोटे प्रयास का बड़ा असर हो सकता है।

Author

  • नाज़नीन, हरियाणा के फरीदाबाद जिले से हैं और एक गैर सरकारी संस्था में मीडिया ट्रेनर के तौर पर काम करती हैं l उन्होंने अभी दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक किया है और उनका सपना खुद को एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में देखना हैं। नाज़नीन अपने पूरे परिवार में दूसरी महिला हैं जिन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की हैं और वह अपने परिवार की पहली कामकाजी महिला हैं।

    View all posts

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading