विकास कुमार:
तीन दिवसीय युवा महोत्सव का आयोजन दलित शक्ति केंद्र, अहमदाबाद (गुजरात) में 27-29 सितंबर, 2024 को किया गया। श्रुति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 16 राज्यों के 35 संगठनों से जुड़े करीब 160 प्रतिभागियों ने भाग लिया। युवा महोत्सव एक खास मौका है, जिसमें विभिन्न भाषा-क्षेत्रों (हिंदी, ओड़िया, तमिल) से जुड़े सामाजिक परिवर्तन शाला (स्कूल फॉर सोशल चेंज, एसएससी) के प्रतिभागियों के साथ एक राष्ट्रीय स्तर का समावेश होता है। इससे पहले युवा महोत्सव 2018 में मानगाँव (रायगढ़, महाराष्ट्र), 2019 में नासिक (महाराष्ट्र), और 2023 में सेवाग्राम, महाराष्ट्र में आयोजित किया गया था।
जलवायु परिवर्तन आज दुनिया के सबसे ज्वलंत मुद्दों में एक है। इसका प्रभाव अब किसी क्षेत्र, राज्य या देश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक समस्या बन चुका है। समाज के गरीब और शोषित समूह इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस पर एक व्यापक समझ विकसित करनी ज़रूरी है ताकि सामूहिक रूप से इसके समाधान के लिए युवा पीढ़ी प्रेरित हो सके। इसी के मद्देनजर इस बार के युवा महोत्सव का थीम “जलवायु परिवर्तन, विकास की अवधारणा और लोग” (Climate Change, Development Paradox and People) रखा गया। इसी थीम के इर्द-गिर्द महोत्सव के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। महोत्सव का नारा, “वह सुबह हमीं से आएगी“, युवाओं के अंदर परिवर्तन की असीम संभावनाओं को दर्शाता है।
- पहले दिन एसएससी प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव, आयोजित हुआ युवा अड्डा –
फेस्टिवल की शुरुआत गुजरात के आदिवासी एकता परिषद की सांस्कृतिक टीम द्वारा पारंपरिक धरती पूजन के साथ हुई। इसके बाद श्रुति टीम से मोहन भाई ने सामाजिक परिवर्तन शाला के उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी। सामाजिक परिवर्तन शाला 2023-24 बैच के विभिन्न भाषा क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने अपनी एसएससी यात्रा के अनुभव साझा किए और बताया कि एसएससी के द्वारा उन्हें समाज को देखने और उसमें बदलाव लाने के लिए एक नया दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिला।
सामाजिक परिवर्तन शाला की प्रक्रिया का विस्तार कई राज्यों में शुरू हो चुका है। हिंदी भाषा के विभिन्न क्षेत्रों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड के अलावा महाराष्ट्र में भी एसएससी का विस्तार हुआ है। एसएससी की प्रक्रिया से जुड़े कई साथी अब ट्रेनर की भूमिका में हैं। पहले सत्र में विभिन्न राज्यों के प्रशिक्षक साथियों ने अपने एसएससी यात्रा के अलावा ट्रेनर के रूप में उनके अनुभव और आ रही चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। इसके बाद एसएससी की नींव रखने वाले वरिष्ठ साथियों ने भी एसएससी प्रतिभागियों को कुछ बहुमूल्य सुझाव दिए।
युवाओं के बीच संवाद और बहस के लिए “युवा अड्डा” सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें कुछ प्रासंगिक विषयों पर चर्चा की गई। इन विषयों के जरिए युवाओं को प्रेम, राजनीतिक भागीदारी जैसे वोट करने का अधिकार और धर्म के पाखंड/वैज्ञानिक सोच के विकास पर खुलकर अपनी राय रखने का अवसर मिला। साथ ही, गीत, कविता, नाटक, शायरी के माध्यम से अपनी भावनाओं और रचनात्मकता को भी व्यक्त किया।
- विख्यात पर्यावरणविद् सौम्या दत्ता ने जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं पर दी सारगर्भित व्याख्यान –

दूसरे दिन मशहूर पर्यावरणविद् सौम्या दत्ता ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय न्याय पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक पहलुओं, इसके कारण और इसके वैश्विक और स्थानीय प्रभावों पर चर्चा की और नागरिक समाज जलवायु संकट से कैसे लड़ सकता है, इस पर प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखी। उनके संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान पाया। क्लाइमेट फ्रंट इंडिया से जुड़े युवा कार्यकर्ता रुचिथ और अनमोल ने भी रोचक तरीके से जलवायु संकट के प्रति युवाओं को जागरूक किया।
युवा महोत्सव के दौरान प्रतिभागी गुजरात के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य से भी परिचित हुए। गुजरात के रिटायर्ड प्रोफेसर हेमंत शाह एवं आदिवासी एकता परिषद के कार्यकर्ता अशोक चौधरी ने गुजरात के जन आंदोलन और छात्र आंदोलन की विरासत पर प्रकाश डाला, इसके अलावा राज्य की मौजूदा चुनौतियों पर भी अपने विचार साझा किए।
- पहचान और जलवायु परिवर्तन” विषय पर कैम्पस अभियान, आखरी दिन जनसुनवाई का रोलप्ले –
“पहचान और जलवायु परिवर्तन” विषय पर एक कैम्पस अभियान आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को अलग-अलग पहचान की पर्चियां दी गईं, जैसे – दलित महिला, आदिवासी पुरुष, किसान, मज़दूर, मुस्लिम, ट्रांसजेंडर, डॉक्टर, पूंजीपति आदि। सभी ने अपनी पहचान से मिलते-जुलते लोगों के साथ समूह बनाया और चर्चा की कि जलवायु परिवर्तन उनके जीवन को कैसे प्रभावित करता है। इन विचारों को उन्होंने पोस्टर, गीत, नारे, नाटक और फ्लैश मॉब के रूप में रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।
अगले दिन जन सुनवाई का रोल प्ले किया गया, जिसमें एक गाँव में पावर प्लांट लगने पर अलग-अलग पहचान के लोगों पर उसके प्रभाव को दिखाया गया। अंत में हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ कार्यकर्ता अक्षय भाई ने भूमि अधिग्रहण, वन अधिकार कानून, ग्राम सभा के अधिकार के कानूनी पक्षों के बारे में जानाकारी दी।
- फेस्टिवल वेन्यू पर लगी प्रदर्शनी, आखरी दिन सांस्कृतिक रैली रहा आकर्षण का केंद्र –
फेस्टिवल वेन्यू पर प्रदर्शनी का भी आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न राज्यों के साथियों ने अपने क्षेत्रों की पारंपरिक चीज़ों जैसे पारंपरिक बीज, धान, परिधान, आभूषण आदि के स्टॉल लगाए। जलवायु परिवर्तन के अलावा जन संघर्षों और सामाजिक मुद्दों पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई। आयोजन स्थल पर महान व्यक्तियों के प्रमुख विचारों के आकर्षक बैनर भी लगाए गए थे।
महोत्सव के अंतिम दिन एक सांस्कृतिक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने पारंपरिक परिधानों में नृत्य, गीतों, नारों के साथ आयोजन स्थल तक मार्च किया।
फेस्टिवल के तीनों दिन प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं, जिनमें नाटक, नृत्य, गीत-संगीत और कविताएं शामिल थीं। इसने प्रतिभागियों को अपनी सांस्कृतिक विविधता और कलात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया।
आखिरी दिन सामाजिक परिवर्तन शाला 2023-24 बैच के प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। मुख्य अतिथियों के अलावा महोत्सव के आयोजन में विशेष भूमिका निभाने वाले साथियों को भी मेमेंटो प्रदान किया गया।
महोत्सव के दौरान कई बार तेज बारिश ने बाधाएं खड़ी कीं, लेकिन इससे युवाओं के जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। उनकी असीम ऊर्जा ने यह साबित कर दिया कि देश और समाज में चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, वे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। नई सुबह लाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। देर-सवेर, वह सुबह हमीं से आएगी।


















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