नौशेरवाँ आदिल :
(प्यार और समाज के साथ संघर्ष)
मैं भी प्यार करना चाहता हूँ, पर दिल गवारा नहीं करता है। जब आप किसी की बहन-बेटी से प्यार करते हैं, तो आप प्यार करना अपना हक मानते हैं, उसी तरह कोई और भी आपकी बहन-बेटी से प्यार करना, अपना हक मानता होगा। पर नहीं, उस वक्त हमारे अंदर का इंसान जाग जाता है और उसकी परवरिश और उसके संस्कार पर सवाल उठाने लगते हैं। लोग अपनी बहन-बेटी को मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं। तब वे अपना संस्कार नहीं देखते हैं, इंसानियत नहीं देखते और उसकी वर्तमान स्थिति का जायज़ा नहीं लेते हैं। ना ही विज्ञान की अट्रैक्शन थियरी को समझते हैं और न समझने की कोशिश करते हैं। किशोर अवस्था में वह यह सब पढ़ते तो हैं पर अमल में नहींं लाना चाहते हैं। हमे समझना पड़ेगा विज्ञान और उसकी थियोरी को और अपने जैसे दोस्त, भाई, बहन, बेटी को समझाना है तो खुद को भी समझना होगा। विज्ञान को पढ़ के आगे तो बढ़ते हैं पर उसके हिसाब से चलना स्वीकार क्यूँ नहीं करते?
मुझे गलत न समझें दोस्त, वर्तमान हालात को देख कर यह लिखा हूँ और ऐसा भी नहीं है कि मैं प्यार नहीं करना चाहता हूँ, मैं बिलकुल प्यार करना चाहता हूँ, पर वर्तमान हालात देखकर डर लगता है। प्यार एक ऐसी चीज़ है जिसे करने से, होने से, सारा ज़माना चल सकता है। पर लगता है कि पूरी दुनिया को इन्ही शब्दों से नफरत हो गया है। आज के समय में, सही-गलत का फर्क मिट गया है; इंसान, इंसान का दुश्मन बन गया है और प्यार शब्द सुनने के बाद लोगों को घिन आने लगता है, पता नहीं क्यूँ?
इस प्यार के चलते कितने लोगों ने अपनी जान तक गवा दी है, इसीलिए अब मुझे इस शब्द से दूरी बनाने का मन करता है। फिर कभी सोचता हूँ कि अगर किनारे कर लिया खुद को, तो इस रूढ़िवादी प्रथा के खिलाफ कौन बोलेगा? संवैधानिक और कानूनी दायरे में रह कर इस ज़माने की रीत के खिलाफ प्रेम करूँगा, मगर पहले इस पर अच्छी समझ ज़रूर विकसित करूँगा। और इसे प्रमोट (बढ़ावा) भी करूँगा। समय आने पर अपने सहयोगी साथी और संगठन के सहयोग से सकारात्मक सोच के साथ, न की नकारात्मक सोच के साथ, प्यार करूँगा, उस व्यक्ति से, जिससे हमारी सोच मिलती हो, न कि खानदान। उसमें सच्चा प्रेम और सहयोग करने की भावना से प्रेम करूँगा, ना कि जाति, धर्म, पंथ, संप्रदाय देखूंगा। बस देखूंगा तो उस व्यक्ति का मन और सोच, जो कमर कसके इस रूढ़िवादी सोच के खिलाफ, सदियों से चली आ रही प्रथा को चैलेंज करके, प्रेम के रिश्ते में बंधना चाहती हो।

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