गोपाल वर्मा:

हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा ज़िले की पालमपुर तहसील के एक छोटे से गाँव में स्थित है संभावना संस्थान। हिमाचल प्रदेश का नाम आते ही सबके मन में वहाँ की खूबसूरत वादियाँ, बर्फ से ढके पहाड़, नदियाँ और झरने याद आने लगते हैं। संभावना संस्थान के परिसर से कुछ ऐसा ही दृश्य दिखाई देता था — नीचे बहती हुई नदी और धौलाधार की बर्फ से ढकी चोटियाँ। संभावना संस्थान को जिस खूबसूरती और जैविक (ऑर्गेनिक) तरीके से बनाया गया है, वह मनमोहक है।

बुनियाद कार्यक्रम – हर साल की तरह, इस वर्ष भी संभावना संस्थान द्वारा बुनियाद कार्यक्रम की कार्यशाला का आयोजन किया गया। बुनियाद कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जैसे विषयों पर जानकारी देना है। इसमें युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को समाज के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा, समूह गतिविधियों, डॉक्युमेंट्री आदि के माध्यम से अपनी समझ को विकसित करने और मुद्दों की बेहतर समझ बनाने का अवसर मिलता है। इस कार्यक्रम में सांप्रदायिकता, विकास, धर्म, लोकतंत्र, जेंडर, जाति आदि जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की जाती है।

बुनियाद कार्यक्रम एक ऐसी कार्यशाला है, जिसमें हर प्रतिभागी को 11 दिनों तक संभावना संस्थान के परिसर में रहना होता है। इस दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को कुछ दायित्व दिए जाते हैं, जिनका पालन करना कार्यशाला का हिस्सा होता है। इस बार की बुनियाद कार्यशाला में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली आदि राज्यों से 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

संभावना संस्थान में 11 दिन की बुनियाद कार्यशाला हर प्रतिभागी के जीवन में एक यादगार और व्यक्तिगत जीवन में मददगार अनुभव रही। इस कार्यक्रम के दौरान सांप्रदायिकता, विकास, धर्म, लोकतंत्र, जेंडर, जाति, प्राकृतिक संसाधनों का हनन एवं अधिग्रहण और थिएटर जैसे मुद्दों पर व्यक्तिगत और समूह गतिविधियों के माध्यम से गहन चर्चा की गई और उनके ऊपर एक ठोस समझ विकसित करने का प्रयास किया गया। इस कार्यशाला के दौरान मज़दूर किसान शक्ति संगठन के संघर्ष, सूचना का अधिकार और मनरेगा जैसे कानूनों के लागू होने तक के संघर्ष और उनके कार्यान्वयन पर जानकारी साझा की गई। मज़दूर किसान शक्ति संगठन के साथियों द्वारा दी गई जानकारी प्रतिभागियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।

इस कार्यक्रम में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कई बुद्धिजीवियों एवं विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया, जिनमें दुनु रॉय, तीस्ता सीतलवाड, हिमांशु कुमार, राहुल सोंपिम्पले, मोहम्मद, उत्पला, रचित, रितिका और फातिमा शामिल थे। सभी साथी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में काफी अनुभवी थे और उन्होंने प्रत्येक मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी। सभी मेंटर्स ने अपने अनुभव साझा किए और व्यक्तिगत व समूह गतिविधियों के माध्यम से एक-दूसरे को समझने का प्रयास किया।

कार्यक्रम के समापन पर, प्रतिभागियों की केवल मुद्दों की समझ ही नहीं बनी, बल्कि उनमें एक अटूट आपसी रिश्ता भी पनपा, जो आगे भी निरंतर बना रहेगा। इस कार्यक्रम ने विभिन्न राज्यों के लोगों को एक जगह इकट्ठा होकर न केवल एक-दूसरे को समझने का, बल्कि एक मजबूत रिश्ता बनाने का अवसर भी दिया। जब प्रतिभागी अपने-अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहे थे, वे अकेले नहीं थे, उनके साथ कुछ नए दोस्त भी थे। इस प्रकार के कार्यक्रम केवल बौद्धिक ज्ञान बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि नए रिश्ते बनाने का भी काम करते हैं। मेरा संभावना संस्थान का सफर बहुत यादगार रहा, जहाँ मैंने कुछ नए दोस्त बनाए, जो अब मेरे साथ जीवन भर रहेंगे।

Author

  • गोपाल वर्मा, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के नवासी हैं। गोपाल वर्तमान में युवाओं के साथ काम करते हैं।

    View all posts

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading