आशीष कुमार:
प्राइवेट सफाई कर्मियों की पूरी ज़िंदगी प्राइवेट कर्मचारी के रूप में गुज़रती है। हम अगर अपने शहर फैज़ाबाद की बात करें तो लोगों के काम ज़्यादा होते हैं, परंतु पैसा कम। ऐसे में कर्मचारियों की स्थिति हमेशा जैसी की तैसी बनी रहती है। इन सफाई कर्मियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी बराबर का सहयोग करते हुए काम करती हैं। पूरे फैज़ाबाद-अयोध्या की अगर बात करें तो लगभग हर एक वार्ड में 20 से 25 महिला व पुरुष मिलकर कार्य करते हैं। कार्य के दौरान इन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती है। जैसे कोरोना में सभी प्रकार के विभागीय कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई थी या वह काम पर नहीं जा रहे थे परंतु प्राइवेट सफाई कर्मी चाहे वह जिस भी संस्थान में काम कर रहे थे उनको छुट्टी नहीं मिल पा रही थी । उनसे बराबर काम लिया जा रहा था और सुरक्षा के नाम पर उन्हें कोई भी तरीके की सुविधा नहीं मिल पा रही थी । बहुत कर्मचारियों की कार्य के दौरान मौत भी हो गई थी और उनको कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया।
फैज़ाबाद-अयोध्या में काफी बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के यह कर्मचारी अलग-अलग मोहल्ले में रहते हैं और यह इसी काम के आधार पर अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई व खान-पान को पूरा करते हैं । लेकिन सही ढंग से अगर देखा जाए तो नायह अपने बच्चों को पढ़ा पाते हैं और न ही अच्छा खिला पाते हैं । बस जिंदगी को जिए जा रहे हैं। ऊपर से अगर कोई व्यक्ति इनको बुलाता है तो उनका नाम लेकर भी नहीं बुलाना चाहता । कोई उन्हें भंगी कहता है तो कोई मेहता, जमादार, डोम, बुलाते हैं । इनका कोई नाम ही नहीं है और ना ही कोई वजूद । कीड़े-मकोड़े की तरह यह जिंदगी जीने वाले इंसान जिनका कोई अस्तित्व नहीं होता इन्हें हमेशा निचले दर्जे में से देखा जाता है।
फैज़ाबाद-अयोध्या में हमने इन सफाई कर्मियों का सर्वे किया तो पता चला लगभग 8,000 से 10,000 की संख्या में फैज़ाबाद-अयोध्या में प्राइवेट सफाई कर्मचारी रहते हैं जो की अलग-अलग मोहल्ले में निवास करते हैं। इन सभी कर्मचारियों को 8000 से 10000 तक की वेतन पर रखा जाता हैं । इतने पैसों से परिवार न चल पाने के कारण यह कर्मचारी अपना अलग कुछ काम तलाशते रहते हैं जिनसे उन्हें थोड़े अलग पैसे मिल जाते हैं । इससे उनका कुछ खर्चा कम तो हो जाता है लेकिन पूरा नहीं हो पता । प्राइवेट सफाई कर्मियों की काम करने की क्षमता काफी होती है लेकिन अलग-अलग संस्थानों में इनके साथ शोषण भी कर लिया जाता है। इन सफाई कर्मियों को एक मजदूर के बराबर भी पैसा नहीं मिल पाता है अगर दिहाड़ी मजदूर की हम बात करें तो उन्हें भी एक दिन का ₹500 मिलता है परंतु सफाई कर्मियों को एक दिन का ₹200 से ₹250 तक ही मिल पाता है और ऊपर से विभाग के सुपरवाइजर कुछ पैसा महीना पूरे होने पर ले लेता है जिससे उनके पैसे और भी कम हो जाते हैं।
किसी भी विभाग, संस्थान में हम अगर जाए तो पता चलता है कि बिना इन सफाई कर्मियों के कोई भी संस्थान ठीक से चल नहीं चल पाता हैं लेकिन जो इस समाज, मोहल्ले, गांव तथा शहर को चमकाने व स्वच्छ बनाने में लगे रहते हैं उनको उनका सही मेहनताना भी नहीं मिलता । इनको अलग से भी किसी प्रकार की सहायता नहीं दी जाती हैं । कई बार हमने देखा है कि कार्य के दौरान इन कर्मचारियों की दुर्घटना भी हो जाती है जिसमें उन्हें चोंटे भी लग जाती है और मौत भी हो जाती है। ऐसी स्थिति में न तो इनका कोई स्वास्थ्य या दुर्घटना बीमा होता हैं और न ही कोई अन्य बीमा की सुविधा कहीं से मिल पाती हैं । अगर कोई महिला कर्मचारी प्रेगनेंसी के दौरान कार्य से बैठ जाती है तो उसे स्वास्थ्य का भी कोई लाभ नहीं मिलता और उसके साथ-साथ काम से भी निष्कासित कर दिया जाता है जबकि सरकारी व अन्य संस्थाओं में यह नियम है कि उन्हें डिलीवरी के पूरे 9 महीने तक का वेतन दिया जाता है। उसके साथ एक दो महीने की और छुट्टी देकर उसे कम पर वापस बुलाया जाता है। परंतु इन प्राइवेट सफाई कर्मी महिलाओं को नगर निगम ठेका पट्टा पर या फिर प्राइवेट अस्पतालों में या अन्य जगहों पर कोई सुविधा नहीं मिलती है बल्कि उन्हें काम से हटा दिया जाता है। उसकी जगह दूसरा कर्मचारी ढूंढ कर लगा दिया जाता है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसी स्थिति में इन प्राइवेट सफाई कर्मियों की किस प्रकार क्षतिपूर्ति की जाए। इस पर कोई ध्यान भी नहीं दे रहा हैं ।
नौकरियों की कमी की वजह से इन प्राइवेट सफाई कर्मियों को जहां भी काम मिल जाता है उन्हें करना पड़ता है । उन्हें अपने हक़-अधिकारों के बारे में जानने की बहुत ज़रूरत हैं, इस पर हम प्रयासरत हैं।
अयोध्या नगर निगम में शहर बदलने के उपरांत बहुत सारे प्राइवेट कर्मचारियों को अलग-अलग वार्डो में काम पर लाया गया है हमने उनसे थोड़ी जानकारी प्राप्त की तो पता चला की इनको दूर दराज गांव से भर्ती करके लाया गया हैं जिन्हें यह कह कर लाया गया है कि आपको संविदा पर नौकरी मिल रही है और आपको भर्ती किया जा रहा है । कुछ समय के उपरांत आपकी यह नौकरी पक्की हो सकती है। इसी लालच में बड़ी संख्या में नौजवान महिला-पुरुष अपना सभी दस्तावेज लेकर नगर निगम में भर्ती हो गए हैं। उनसे दोनों टाइम काम लिया जाता है लेकिन वेतन बढ़ोतरी के नाम पर कोई बात नहीं की जाती हैं ।
उनका कहना हैं कि “हमें एक-डेढ़ साल से ऊपर हो गया है और यह कहा गया था की 1 साल के बाद आप लोगों का पैसा बढ़ाया जाएगा और पक्का होने के लिए आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है। आप सरकारी हो जाएंगे पर ऐसा होने वाला नहीं है क्योंकि अब इन लोगों का रवैया धीरे-धीरे पता चलने लगा है।”
अयोध्या नगर निगम में शहर और सड़के बड़ी की गई हैं । इसके चलते काफी तोड़फोड़ भी हुई है । पूरे शहर की सड़क खस्ता हालत में है। सड़कों पर हुई अतिक्रमण तोड़फोड़ में मलबे, ईट-पत्थर तथा अन्य भारी चीज उठाई जा रही हैं, जिससे कई बार इन कर्मचारियों को चोटें भी आई । उनके सुपरवाइजर या फिर नगर निगम के किसी अधिकारी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया हैं बस एक मजदूर की तरह इन्हें काम दिया जा रहा है और वह नौकरी की लालच में काम करते चले जा रहे हैं।
अयोध्या नगर निगम में बहुत सारे मॉल, होटल, बड़ी-बड़ी इमारतें बन गई हैं जिसमें इन प्राइवेट सफाई कर्मियों को भर्ती किया जा रहा है परंतु सही पैसा न देने के नाम पर ठगी की जा रही है। पूरे दिन काम करने के दौरान जब वह अपना पूरा पैसा बताते हैं तो उन्हें कम ही दिया जाता है और ऊपर से यह कहा जाता है कि तुम नहीं करोगे तो कोई और कर लेगा, हम तुम्हारी जगह किसी ओर को लगा लेंगे। काम न छूट जाए इस डर से इन कर्मचारियों को उसी में लगा रहना पड़ता है ।
इन प्राइवेट सफाई कर्मियों का एक सम्मानजनक वेतन निर्धारित किया जाना चाहिए और इनके लिए छुट्टी निर्धारित की जानी चाहिए । इनको स्वास्थ्य बीमा देने के साथ-साथ इनके बच्चों के लिए पढ़ाई-लिखाई की सुविधाएँ भी प्राप्त कराई जाने की ज़रूरत हैं । समाज में उन्हें भी सम्मान की नज़र से देखा जाना चाहिए । हमारे देश को साफ रखने वाले इन कर्मचारियों को भी समाज में सभी जरूरी सुविधाएँ और सम्मान से जीने का हक़ हैं ठीक वैसे ही जैसे बाकि वर्ग के लोग जी रहे हैं ।
फीचर्ड फोटो आभार : telegraphindia.com

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