प्रेरणा:

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित आधारशिला बालिका आवासीय शिक्षण केंद्र की बालिकाओं ने 13 जुलाई 2024 से प्रतापगढ़ के 20 गाँव में, दो टीम बनाकर, लोगों में संविधान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए संविधान जागरूकता नुक्कड़ नाटक किये। राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में आज भी बाल विवाह एक बड़ा मुद्दा है, इस पर भी बालिकाओं ने नाटक किए। 

मनोरंजन के लिए चिटू के पापा नाम के किरदार का उपयोग किया गया जिसके द्वारा लोगों में जागरूकता फ़ैलाने का काम किया गया । इन सभी नाटकों का गाँव वालों पर एक अच्छा प्रभाव पड़ा। लोग अधिक संख्या में बालिकाओं का नाटक देखने आये थे। सभी जगह पर नुक्कड़ नाटकों ने दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ जोड़े रखा। नाटक में  लोगों से सवाल भी किया जाता था – कि क्या आपने संविधान पढ़ा है? 

नाटक में बालिका बोलती है कि “मैं संविधान हूँ और मैं लाल किले से बोल रहा हूँ। जब से मैं आजाद हुआ हूँ, अपनों से बर्बाद हुआ हूँ।”  इस कथन पर भी लोगों को सवाल पूछे गए, और लोगों के जवाब कुछ इस प्रकार से सामने आये – आज का नेता संविधान को लेकर झूठी कसमें खाता है, नेतागण अपने वादे नहीं निभाते हैं। जवाबों में यही निकल कर सामने आया और सभी लोगों ने कहा कि हम नाटक के द्वारा यह समझ पाए हैं कि अगर संविधान को जानेंगे, तो हम एक जागरूक इंसान बनेंगे। अपने हक़ और अधिकार के लिए लड़ेंगे। 

नाटक एक माध्यम बना जिसमें लोग, बालिकाओं के परिचय, उनकी पढ़ाई-लिखाई और निडरता से अपनी बात को रख पाने को देखते हुए देखा । गाँव के लोगों ने अपने बच्चों को ऐसा बनाने की अपनी इच्छा जताई, जो अपनी बात रख सकें। गाँव की कईं बालिकाएं भी हमारी पहल से जुड़ी और यह सब नुक्कड़ नाटक सीखने की अपनी रूचि जताई। 

आधारशिला केंद्र की बालिकों की नाटक मण्डली पहल अभी तक 20 गाँव में नाटक प्रस्तुत कर चुकी हैं और सभी का अनुभव बहुत अच्छा रहा। मण्डली आगे चलकर 20 और गाँव में नुक्कड़ नाटक करेंगी।   यह प्रक्रिया एक अच्छी शुरुआत है किशोरियों व गाँव के लोगों को अपने हक़, अधिकार और संविधान के बारे में जागरूक करने की । साथ ही नाटक में पूछे जा रहे सवालों का जवाब ढूँढने के चलते बालिकाएं खुद ही इसके बारे में इन्टरनेट पर पढ़कर अपनी सोच और समझ को विक्सित भी कर रही हैं।

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