मुकेश जीनगर :
खेमराज जी अब हमारे बीच नहीं हैं। परन्तु विचारों के रूप में सदैव हमारे बीच रहेंगे उनके साथ काम करते हुए उनको समझने, जानने का अवसर प्राप्त हुआ, उनके विचार सदैव उनके कार्य में परिलक्षित होते थे। उनके विचारों तथा कार्यों में कभी विरोधाभास प्रतीत नहीं हुआ। गरीबों, दलितों तथा असंगठित लोगों के हित व अधिकारों के लिए उनके द्वारा निरंतर प्रयास किए गए, जिन्हें सदैव याद किया जाएगा। वे सामाजिक कुरीतियों जैसी छुआ-छूत, अशिक्षा, भेदभाव, मृत्युभोज आदि के कट्टर विरोधी थे। वे किसी विशेष धर्म, जाति, तथा समुदाय के पक्षधर नहीं थे। स्वभाव से वे अत्यंत सरल और सहज थे, हमने उन्हें विषम परिस्थितियों में भी कठोर निर्णय लेते हुए देखा है।
वे हमेशा कहा करते थे, कि हमें हमारे हक़ व अधिकारों को प्राप्त करना है, तो हमें हमेशा संगठित रहना होगा। वे डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा कार्ल मार्क्स से अत्यंत प्रभावित थे तथा उनके कार्यों व विचारों में इन दोनों महापुरुषों के व्यक्तितिव की छवि दिखाई पड़ती थी।
मैं सदैव गर्व महसूस करता हूँ कि मुझे ऐसे महान व्यक्तित्व के साथ काम करने तथा उनके अनुभवों द्वारा सीखने का अवसर प्राप्त हुआ।

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