रोहित जैन:

विमला गाँव के बच्चों के साथ लंगड़ी खेल रही थी। उसकी नानी ने आवाज़ दी, “ओ विमला, ओ विमला”, विमला दौड़ी-दौड़ी नानी के पास चली आयी। भरी धूप में खेलने से उसके गाल लाल हो गए थे। वो कुछ तो गुन-गुना रही थी, लेकिन मुझ अनजान व्यक्ति को देखकर वो शरमा गयी और चुप हो गयी।

मैंने कहा, “बहुत प्यारा गुन गुना रही थी, कौन सा गीत है?”

फिर धीरे से मुस्कुराकर उसने अपनी आँखें भींच ली… नानी के कहने पर उसने अपना पसंदीदा गीत सुनाया। मुझे उस मेवाड़ी गीत का अर्थ समझ नहीं आया, लेकिन गीत सुनकर ख़ुशी से मेरी आँखें भर आयी थी।

दस बरस की नन्ही सी है वो। दूसरी कक्षा में पढ़ती है। चित्र भी बहुत सुंदर बनाती है, उन चित्रों में रंग भी भरती है। चित्रों में भिन्न-भिन्न रंगों की चिड़िया उड़ती हैं, फूल खिलते हैं, सूरज उगता है और हरे रंग की पत्तियों का पेड़ सूरज से छाया देता है। उन चित्रों में ख़ुद एक जगह खड़े होकर वो ये सब देखती है, सच में इतनी प्यारी सी है विमला। वो अपने नाना-नानी की लाड़ली है और उनके जीने की वजह भी। नाना-नानी हैं, इसीलिए वो भी है।

विमला का जन्म सड़क के किनारे एक पेड़ की छाया में हुआ था। जब सभी की उम्मीद टूट चुकी थी, तब उसकी नानी ने उसे माँ के पेट से निकाला था। वो बहुत कमज़ोर पैदा हुई थी और कुछ घंटो तक रोयी भी नहीं थी। सभी ने कह दिया था कि ये नहीं बचेगी। नानी ने सबको डाँट दिया था, “ऐसे कैसे नहीं बचेगी!” किसी ने कहा कि इसे डाक्टर के यहाँ ले जाओ तो उसकी माँ ने कहा, “‘उसे कहीं मत ले जाओ, मेरे पेट का काँटा तो निकल गया। अब जो होना है हो जाए इसके साथ।”

उसके दादा-दादी ने भी कह दिया, “ये ज़्यादा दिन तक बचने वाली नहीं है, हम नहीं पाल पायेंगे इसे।” इस पर नाना-नानी ने कहा कि हम पालेंगे इसे। तब से वो अपने नाना-नानी और उनके बहुत सारे जानवरों के साथ जंगल में रहने लगी। विमला जानवर चराती और वहीं खेलती, धीरे-धीरे उनके सभी जानवर बिक गए। नाना-नानी की पांच बेटियाँ थी और उनकी शादी में खर्चा बहुत हो गया था। फिर वो सब जंगल से हमेशा के लिए वापस आ गए और अपने गाँव में घर बनाकर रहने लगे।

शादियों में खर्चा-पानी, लेन-देन की परंपरा गरीब को और गरीब बना देती है, लेकिन ये परंपरा जीवन का सलीका बन चुकी है। गाँव में बाल विवाह का यह एक मुख्य कारण भी है। छोटी-बड़ी बेटियों को एक साथ एक ही मंडप में बैठा देते हैं, ताकि खर्च एक ही बार हो। शहरों में भी, ख़ासतौर से बेटी की शादी इसीलिए ज़िम्मेदारी लगती है।

पांच बरस की उम्र में विमला का भी ब्याह हो गया था। ‘आटा-साटा’ परंपरा के तहत पहले से तय था कि अगर विमला के खानदान में लड़की होगी तो वो उसे फलाँ परिवार में ब्याहेंगे, क्योंकि विमला के खानदान ने फलां परिवार की लड़की से अपने परिवार का लड़के का ब्याह किया था। जब विमला थोड़ी बड़ी हुई थी तब ही उसकी शादी पक्की कर दी गयी। अभी उसका गौना नहीं हुआ है, लेकिन जब भी उसका दूल्हा गाँव में आता है तो वो शर्माकर छिप जाती है और दुल्हा भी शर्मा जाता है जब गाँव में उसके रिश्तेदार उससे कहते हैं कि अपनी विमला से मिल लो। विमला ने शरमाकर अपना मुँह छिपा लिया था जब नानी उसकी शादी की बात मुझे बता रही थी।

“विमला, आपने देखा है उनको?”, मैं पूछता हूँ उससे। उसने तीन उँगलियों से मेरी ओर इशारा कर दिया। नानी ने कहा, “तीन बार देखा है।” ये सुन कर विमला ने हँसकर नानी के घाघरे में अपने आप को छिपा लिया। विमला उसे पसंद करती है। नाना भी विमला की शरमाहट का आभास कर उसे थपथपाने लगे। जंगल में उन्हें सांप ने डस लिया था, तब से वो देख नहीं सकते। उनकी उम्र लगभग पैंसठ-सत्तर के क़रीब होगी, नानी भी पैंसठ के आस-पास है। नानी आंगनवाड़ी में एक हज़ार रूपए के मासिक वेतन पर काम करती है। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के कारण उन्हें पिछले तीन महीने से कोई काम नहीं मिला।

विमला भी नानी की हर संभव मदद करती है। विमला को घर के सभी कामकाज आते हैं, वो खाना बना लेती है, घर की साफ़ सफाई कर लेती है। शरीर से कमज़ोर पड़ चुके नाना को चलने-फिरने में मदद करती है और उनका पूरा ध्यान रखती है। अब तो उसकी माँ भी उसे अपने पास बुला लेती है, जब कभी वो बीमार पड़ जाती है, लेकिन उसे माँ के पास जाना पसंद नहीं है। वहाँ जाती है तो नाना-नानी को याद करती है और कुछ ही दिनों में वापस आ जाती है। नानी की गोद में बैठी, उनके सीने पर अपना सर टिकाए वो बोली, “जब नानी के पास होती हूँ तो सुबह आठ बजे खाना खा लेती हूँ। माँ के यहाँ तो दस बजे मिलता है।”

एक दिन विमला बहुत रोयी जब नानी को कुत्ता ने काट लिया था। नानी हँसते हुए विमला के शब्दों को याद कर दुहराने लगी, “ओ नानी, तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम नहीं मरोगी।” थोड़ी सी चिढ़कर वो भी हँस पड़ी और नानी को लाड़ में मारने लगी। नानी ने उसे सीने से लगा लिया। नाना खाट पर बैठे उन दोनों की नोंक-झोंक को अपने कानों से आभास कर हँस पड़े थे। विमला नाना के पास जाकर उनके कन्धों से लिपट गयी। उसकी नानी ऐसे ही उसके साथ मज़ाक करती रहती है और वो भी नानी को तंग करने में नहीं चूकती है।

इस तरह से वो तीनों अपनी एक झोपड़ी में ख़ुशी-ख़ुशी प्यार बाँटते रहते हैं। उनकी नोंक-झोंक और प्यार के कुछ पल मैंने अपने कैमरा में संजो लिए तो उन्हें देखकर वो बहुत खुश हुए थे।

नाना ने उन पलों को कैमरा की स्क्रीन पर उँगलियाँ फेरकर महसूस किया। उनके चेहरे पर मुस्कान आई जब उनकी उँगलियाँ विमला की तस्वीर पर गयी। पास बैठी अपनी नातिन की ओर उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया तो विमला नाना के पास आ गई। बगल में बैठी नानी ने विमला के बालों को सहलाते उसके माथे को चूम लिया।

नाना–नानी की लाड़ली एक पल भी उनसे दूर नहीं रह सकती। जब वो दिन की भरी धूप में गाँव के बच्चों के साथ खेलती है तो नानी बीच-बीच में आवाज़ लगाकर ‘विमला ओ विमला’ जाँचती रहती है कि वो ठीक तो है ना। विमला के माँ-बाबा पूछते हैं कि अब विमला को उनके पास भेज दो। नानी उन्हें बोल देती है, “अब तो वो यहाँ से सीधा ससुराल जायेगी।”

विमला दसवीं तक पढ़ाई करेगी, उसके बाद ससुराल जायेगी। नाना-नानी की उम्र भी उसे थोड़ा सा सताती है। कुछ पल ठहरकर नानी अपने ही ढंग में ज़ोर से हँसकर बोली, “जब तक हम हैं विमला को पूरी ख़ुशी देंगे… उसकी ख़ुशी में ही हमारी ख़ुशी है।”

Author

  • रोहित जैन ललितपुर, उत्तरप्रदेश से हैं। वह लेखक और फोटो जर्नलिस्ट हैं। रोहित भारत के अलग-अलग राज्यों में जाकर तस्वीरों के माध्यम से मुद्दों पर बात करते हैं।

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