शाज़िया परवीन:

एक जल थल एक वायु
एक ही कुदरत बनी।
एक सी हैं किरणें देती
भोर में सबको जगा।
एक सी है रात देती
सबको लोरी दे सुला।
एक सी ही धूप पाते
हो चमेली या गुलाब।
एक रंग है खून सबके
चाहे गोरे हो या काले।
एक सी हरियाली बिखरी
चाहे पूरब हो या पश्चिम।
एक ही जीवन सब हैं पाते
चाहे अमीर हो या गरीब।
एक जल थल एक वायु
एक ही कुदरत बनी।
इसलिए-
निरंतर प्रयत्न करते हैं और
एक श्रेष्ठ समाज बनाते हैं।।

फीचर्ड फोटो आभार: सिद्धार्थ

Author

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading