विकास फॉर युवानिया डेस्क:

बिहार के अररिया में, जन जागरण शक्ति संगठन ने  रैली और सभा का आयोजन किया

8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, जन जागरण शक्ति संगठन द्वारा रैली और सभा का आयोजन किया। रैली बस स्टैंड से चांदनी चौक तक आयोजित की गई थी, जहां वह सभा में परिवर्तित हो गई। रैली में “पितृसत्ता धोखा है, खतम करो मौका है, आज की नारी कैसी है, फूल नहीं चिंगारी है” जैसे नारों से वातावरण गुंजयमान रहा। सभा को संबोधित करते हुए, जन जागरण शक्ति संगठन की सलाहकार कामायनी स्वामी ने कहा कि महिलाओं का आंदोलन बराबरी पाने का प्रयास है। आज भी महिलाएं दोयम दर्जे की हैसियत रखती हैं। उन्हें मजदूरी भी कम मिलती है, उनके काम का सम्मान भी उन्हें नहीं मिलता, जिसकी वह हकदार हैं। इसलिए, आज सभी महिलाओं को साथ आकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाना चाहिए और अपने हक की बात करनी चाहिए।

संगठन की युवा कार्यकर्ता डोली ने कहा कि जब देश की महिला पहलवानों को भी न्याय नहीं मिल पाया है, हमें समझ जाना चाहिए कि महिलाओं को कितना लंबा रास्ता तय करना है। महिला पहलवानों का यौन शौषण करने का आरोपी बृज भूषण शरण सिंह अभी भी संसद में हैं और बेटी बचाओ का नारा देने वाली पार्टी ने उसको पार्टी से निकाला तक नहीं। आशा यूनियन की किरण झा ने कहा कि महिलाओं के श्रम का मूल्य जब तक पूरा नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा। सभी महिलाओं को इस संघर्ष को बढ़ाने के लिए एक साथ आना होगा। सभा को तन्मय, सुनील, शिवनारायण, वार्ड पार्षद रंजीत ने भी संबोधित किया। शिवनारायण ने अपने गीतों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सब्यसाची, पवन, सुलोचना, मांडवी, रंजय का विशेष योगदान रहा।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में महिला जन संवाद यात्रा की शुरुआत हुई

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के संदर्भ में 13 मार्च को ग्राम छितौना केराकत, जौनपुर में, दिशा फाउंडेशन कबीर पीस सेंटर के साथ ही GCDW (ग्लोबल कैंपेनिंग दलित वूमेन) और तारा एजुकेशनल ट्रस्ट ने संयुक्त रूप से “हमार माटी, हमार स्वाभिमान, हमार अस्मिता, हमार अधिकार” विषय पर महिला जन संवाद यात्रा का पहला पड़ाव किया। यात्रा के दौरान कई गांवों की महिलाएँ शामिल हुईं, जिनमें शामिल महिलाओं ने अपने जीवन के अनेक पहलुओं पर चर्चा की। चर्चा के दौरान पूनम ने अपनी बात रखते हुए बताया कि समाज में जो किसी के पास धन और संपत्ति है, वहीं सब कुछ करता है, और निर्णय भी वहीं करता है। महिलाएँ सिर्फ पुरुषों की सेवक हैं। साधना यादव ने कहा कि गांव की महिलाएँ सबसे ज्यादा श्रम करती हैं। सही तौर पर देखा जाए, तो खेती से लेकर घर आंगन तक सबसे अधिक लगाव यदि किसी का है, तो वह महिला ही है, जो घर में सबसे अधिक श्रम करती है, लेकिन उसके श्रम का कोई मोल नहीं होता है। शोभना स्मृति ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संविधान ने जो भी अधिकार दिए, वह भी हमसे छिना जा रहा है। खासकर महिलाओं के ऊपर हर तरफ से हमले किए जा रहे हैं, सावित्री बाई फुले से शुरू हुआ महिलाओं के हक की लड़ाई आज पूरे भारत में फैल गई है। हम दुनिया में बराबरी और अमन चैन की स्थापना तभी कर सकते हैं, जब हमें बराबरी का अधिकार मिल जायेगा।

वहीं बुजुर्ग महिला मीरा देवी ने कहा कि सत्तर साल से हम यही माटी में अपना जीवन खपा देहली है, लेकिन अभी तक मेरे पास कुछ भी नहीं है। जो जमीन जयादात है, वह सब बेटों और पति के ही नाम से है, मैने उनमें ही अपनी खुशी और सुख देखती रही, लेकिन कोई जीवन का सुख और खुशी नहीं मिली। कामरेड बचाऊ राम ने कहा कि समाज जैसे जातियों, धर्मों, संप्रदायों में बटा है, ठीक उसी प्रकार से महिलाएं भी बटी हुई हैं। इसी बटवारे की वजह से शोषण भी मौजूद है। समाज में विशेष कर जितने भी श्रम और निर्माण करने वाले हैं, वह चाहे महिला हो चाहे पुरुष, वह किसी भी जाति धर्म के हों भाषा, क्षेत्र के हों सभी को एक साथ आकर अपने हकों और अधिकारों के लिए आवाज़ उठानी पड़ेगी। संतोष पांडे ने संविधान पर बढ़ते खतरे की ओर इशारा करते हुए कहा कि हम अपने जन प्रतिनिधियों से सवाल भी नहीं पूछ पाते हैं, वे पांच साल के बाद ही दिखाई देते हैं। आकांक्षा ने महिलाओं से जुड़ी कविता सुनाई और अध्यक्षता कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता नीरा आर्या ने संविधान में महिलाओं के अधिकारों पर बात करते हुए कहा कि समाज में सबसे खराब स्थिति महिलाओं की हैं। महिलाएं घर से बाहर तक सभी जिम्मेदारियां निभाती हैं, इसके बाद भी महिलाएं उपेक्षित रहती हैं। उन्हें कोई समान भी लेना हो, तो वह महिला पति और बेटे की अनुमति के बिना नहीं ले सकती है, जबकि संविधान ने सभी को बराबरी का अधिकार दिया है।

कार्यक्रम का संचालन सविता कर रहीं थीं। इस मौके पर पूनम, अंबिका, चंद्रकला, सुषमा, करिश्मा, रजिया, सीमा, लाल प्रकाश राही, लीला मौर्य, मंजू, सारदा, सीता, दयाराम, कैलाश, रामजीत अंस समेत सैकड़ों की संख्या में महिलाओं समेत दर्जनों पुरुष और युवा भी शामिल रहे।

छत्तीसगढ़ के सोना खान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन

शहीद नारायण सिंह की ऐतिहासिक भूमि सोना खान में सजग समाज सेवी संस्था के बैनर तले बड़े अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का धूमधाम से मनाया गया। आसपास के गांवों से आए 400 महिलाओं की मौजूदगी में भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के पुण्यतिथि पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम शहीद वीर नारायण सिंह के स्मारक पर माल्या अर्पण कर तथा सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब अंबेडकर के फोटो पर माल्याअर्पण कर कार्यक्रम को प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम में दूरदराज से आए हुए जितने भी महिला संगठन के मुखिया बहनों द्वारा क्षेत्र में हो रहे महिला हिस्सा एवं जमीन अधिकार पर अपने-अपने बात रखें। सजग समाज से संस्था के संस्थापक सुश्री प्रेरणा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास बताया कि 8 मार्च एक ऐतिहासिक दिन है। हम महिलाओं के लिए इस दिन को लाने के लिए हमारे आदि माता ने अमेरिका के शिकागो शहर में काम के घंटे को लेकर संघर्ष किए थे, जिसका नेतृत्व क्लारा जैकलिन जैसे विरंगिणी महिला ने किया था। उसी का फल है कि हमें जो पहले 15 से 20 घंटा तक काम करते थे आज काम का समय 8 घंटे तय हुआ है। पूरे देश में 1910 में पहली बार इस जीत के बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया उसे दिन से हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। आगे उन्होंने कहा कि आज भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि है। सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को आगे लाने के लिए उन्होंने बहुत कुर्बानी दी है। हम महिलाओं को पहले शिक्षा से दूर रखा जाता था, महिलाओं को वोट देने का भी अधिकार नहीं था, छाती के ऊपर कपड़ा पहनने के भी अधिकार नहीं थे। शादी के बाद पहली रात हमें गांव के ही मालगुजार के यहां अपनी पत्नियों को भेजना पड़ता था। पति के मरने के बाद पत्नी को पति के साथ जिंदा जलाया जाता था जिसे सती प्रथा कहते थे, तथा महिलाएं विधवा होने पर पुनर्विवाह नहीं कर सकती थी। जिसकी लड़ाई सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले ने महिलाओं को सम्मान देने और उनके अधिकार देने की लड़ाई लड़ी गई जिसके चलते आज समाज में हम सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। सजग समाज सेवी संस्था ने इस साल 1 मार्च से लेकर 10 मार्च तक घरेलू हिंसा पर जागरूकता अभियान चलाया है, जिसमें ब्लॉक के 25 गांवों में बैठक, रैली, नुक्कड़, गीत, नारे, दीवार लेखन किया गया। इसके अलावा महिलाओं का घरेलू हिंसा कानून जो 2005 में बना है, आज 20 साल होने के बाद भी महिलाओं के ऊपर घर के अंदर शारीरिक हिंसा, मानसिक हिंसा, आर्थिक हिंसा और लैंगिक हिंसा का किस तरह से सामना करना पड़ता है, जिसके लिए महिलाओं को जागरूक करना तथा अपने हक और अधिकार के लिए घर से लड़ने के लिए प्रेरित करने का काम सजग समाज सेवी संस्था कर रही है। 

कार्यक्रम में आए हुए चांदन की मितानिन दीदी ने कहा कि आज हम बड़े हर्ष उल्लास के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं। आज महिलाएं पुरुष के साथ बराबरी का कंधे से कंधा मिलाकर हर पद में हैं। आज हमारे देश की राष्ट्रपति भी एक महिला है, आज एरोप्लेन से लेकर ट्रेन, बस, ऑटो और बड़े-बड़े पद में हमारे महिला दीदी हैं। आज किसी भी परिस्थिति में महिला कमजोर नहीं है। तत्पश्चात चनाट से आई हुई महिला मुखिया पुष्पा दीदी ने कहा की आज भी पितृ सत्ता महिलाओं के सामने मंडरा रही है। महिलाओं को आज भी स्वतंत्र रूप आजादी नहीं है। घर में आज भी लड़की लड़कियों के साथ पर भेदभाव है, पति द्वारा महिलाओं के साथ शारीरिक हिंसा मारपीट रोजाना होता रहता है। हम महिलाएं आज भी अपने आप को कमजोर समझते हैं। हमें हिंसा का मुकाबला करना है और हिंसा हमें बिल्कुल नहीं सहना है। महिलाएं बोलेगी, मुंह खुलेगा तभी जमाना बदलेगा। तत्पश्चात महाराजी से सामाजिक कार्यकर्ता कौशल्या चौहान ने सभा को प्रकाश डालते हुए कहा कि हम जंगल में रहने वाली महिलाएं हैं जो कि वनों उपज और वनों से हमारी जीविका चलती है। वनों उपज का समर्थन मूल्य मिलना चाहिए ताकि हम अपने महिला ग्रुप को मजबूत कर सकें, आर्थिक रूप से उनको स्वालंबन बना सकें। इसके बाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सोना खान की मदरसा मैडम द्वारा सभा को प्रकाश डाला गया कि शिक्षा हम महिलाओं के लिए एक मात्र हथियार है। हम सब महिलाएं अगर ठान ले की अपने बच्चों को पढ़ाई में आगे लेंगे, तो जितने भी अंधविश्वास है कुरीतियां है वह अपने आप खत्म हो जाएगी। हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चलना चाहिए। महिलाओं को सीखना पड़ेगा आज हर पद में महिला है, महिलाओं को आगे आना है और जितनी भी सरकारी योजनाएं हैं इसका लाभ उठाना है। तत्पश्चात कार्यक्रम में आए दलदली की शिक्षिका पूर्ति मैडम, मन कोनी से रंभा बाई, पुनीराम पिंकी, अमृत सोना खान से थाना प्रभारी तथा दलित आदिवासी मंच की संयोजिका राजिम दीदी द्वारा अपने अपने विचार रखे गए। अंत में सभी गांवों से आए हुए संघर्षील महिलाओं को सजग समाज सेवी संस्था की ओर से प्रसस्थि पत्र एवं इनाम वितरण कर उनको सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सजग समाज सेवी संस्था के अध्यक्ष श्री देवेंद्र बघेल द्वारा किया गया। अंत में कार्यक्रम में सभी महिलाओं, युवाओं द्वारा बड़े हर्ष उल्लास के साथ नृत्य करते हुए कार्यक्रम को समाप्त  किया गया।

उत्तर प्रदेश में सरजू फाउंडेशन ने महिला दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया

कादिया पुर गरिमा केंद्र में, महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने के साथ-साथ भेदभाव को खत्म करने और रचनात्मक माहौल में समय बिताने के लिए उत्साह दिखाया। कार्यक्रम में, महिलाएं मिलकर भोज का आयोजन किया, प्रेम के गीत गाए, रंगोली बनाई, और एक-दूसरे के प्रति कविताएं और लेखों को समर्पित किया।

ओड़िशा के बलांगीर ज़िले में ज़िंदाबाद संगठन ने महिला दिवस पर निकाली जागरूकता रैली

बलांगीर ज़िले में ज़िंदाबाद संगठन द्वारा महिला दिवस के अवसर पर एक बड़ी रैली के साथ-साथ, आम सभा का आयोजन हुआ, जहाँ क्षेत्र में महिलाओं के मुद्दों व उनके अधिकारों को लेकर बातचीत की गयी

राजस्थान के चित्तोड़गढ़ ज़िले में आयोजित हुआ महिला दिवस पर कार्यक्रम

महिला दिवस के अवसर पर, महिलाओं व युवतियों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। आधारशिला स्कूल की बच्चियों ने पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लेकर कईं पोस्टर बनाये। साथ ही संगठन ने महिलाओं की मीटिंग आयोजित कर, संवाद किया व महिलाओं के मुद्दों को लेकर ज़िला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

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