शैलेश:
कभी-कभी हमारे जीवन में ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जिनसे हम यह सोचने लगते हैं कि, हम इस धरती पर क्यों हैं और क्या कर रहे हैं। सवालों से घिर जाते हैं। ऐसे ही एक घटना ने मुझे भी झकझोर दिया और सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।
यह उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले में रहने वाली दो बहनों, संजू और रीता, दो बहनों की कहानी है। समाज में पुरानी मान्यताओं और पुराने रीति रिवाज का जो प्रचलन है, उनमें से एक है बाल विवाह। इस घटना के माध्यम से हम समझ सकते हैं कि बाल विवाह, किशोर अवस्था को मानसिक और शारीरिक तौर पर कैसे प्रभावित करता है। बाल विवाह में तनाव से किशोरी कैसे बली हो जाती है, इस कहानी में यह साफ नजर आ रहा है। इसके अलावा पितृसत्ता कैसे बाल विवाह में होने वाले अनेक तरह के मुद्दों को दरकिनार करके समाज में अपनी पुरानी मान्यताएं और धारणाओं को मजबूती से स्थापित करने की कोशिश करती है, यह बात भी स्पष्ट देखने को मिलती है। इन्हीं मुद्दों पर समझ बनाने के लिए आइये जानते हैं संजू और रीता की कहानी।
यह कहानी है संजू की (यह एक काल्पनिक नाम है), संजू बहराइच के गाँव के गोबार की रहने वाली थी। उसके माँ-पिता खेतों में मज़दूरी करते हैं। संजू की एक बड़ी बहन भी थी रीता, जिसकी शादी 15 साल की उम्र में ही कर दी गई थी। शादी के दो साल बाद उसके ससुराल वालों ने उसको छोड़ दिया था और रीता अब अपने माँ-पिता के साथ ही रहती थी। संजू ने पांचवी कक्षा तक पढ़ाई की और माँ-पिता के साथ खेतों के काम में लग गई। जब वो 12 साल की हुई तो माता-पिता उसकी शादी के बारे में सोचने लगे। बड़ी बहन रीता ने इसके लिए मना किया क्योंकि वह अनुभव कर चुकी थी कि कम उम्र में शादी होने से क्या परेशानियाँ होती हैं। माता-पिता को बहुत समझाने पर भी वह संजू की जल्द शादी को नहीं रोक पाई। पिता ने डांट-डपट कर कहा कि यहाँ तेरी मर्जी नहीं चलेगी, अगर तुझको यहाँ रहना है तो हमारी बात माननी पड़ेगी। अब पिता का कहना बेटी कैसे टाल सकती है और वह भी ऐसी बेटी जिसके पति ने भी उसे छोड़ दिया हो। अंततः बारह साल की उम्र में उसकी छोटी बहन संजू की शादी कर दी गई।
माता-पिता गरीब थे तो वे अपने सिर का बोझ उतारना चाहते थे, फिर आस-पास वालों को भी बारह साल की बच्ची जवान लगने लगी थी। शादी एक जरिया था सभी चीजों से निपटने का। बारह वर्ष की लड़की की शादी चौदह वर्ष के लड़के से कर दी गई। एक वर्ष रीति रिवाज़ में बीत गए। अब संजू तेरह वर्ष की हो गई थी, गौने का समय आ चुका था। फिर संजू का गौना हो गया। अब संजू तेरह वर्ष की कच्ची उम्र में एक बेटी से पत्नी, बहू और भाभी बन चुकी थी। परिवार ज्यादा बड़ा नहीं था सिर्फ़ बारह लोग का खाना ही तो बनाना था…!! रसोई छूने के बाद सासू माँ का पहला उपदेश – गाय को घास-चारा डालना, खेतों में काम – यह कोई बड़ी बात थोड़ी है! बस इतना सा ही तो काम करना है। संजू को शादी के बाद गौने में आने पर सास से मिली ज़िम्मेदारी पर उसकी सास का विचार यह था…संजू ने जैसे-तैसे मिली ज़िम्मेदारियों को संभाला।
संजू के पति का नाम था श्याम। वह दिन भर घूमता था और गाँव के लड़कों के साथ शराब भी पीने लगा था। श्याम के दोस्त भी उसे शराब पीने और जुआ खेलने के लिए उकसाते रहते थे। श्याम की उम्र पंद्रह वर्ष हो गई थी। श्याम के अंदर पत्नी को कैसे धमकाया जाता है, यह सत्ता आ चुकी थी। वह रात में जब शराब पीकर और घूमकर घर आता तो पत्नी को गाली-गलौज भी देने लगा था। श्याम कक्षा 6 तक पढ़ा हुआ था। घर वालों ने बड़ा बेटा बोलकर, उसको घर की ज़िम्मेदारी पूरी करनी है, यह बता दिया था। वह कुछ काम नहीं जानता था। खेतों में मज़दूरी और ईंट भट्टे पर मजदूरी करना उसको ठीक लगा। घर चलाने के लिए वह यह कार्य करने लगा। वह अपनी उम्र से भी ज्यादा मज़दूरी करने लगा। दिन ऐसे ही कटते रहे।
उनकी शादी को 6 साल पूरे हुए। अब 20 वर्ष की उम्र में श्याम ने पलायन करना, और गाँव से बाहर जाने का सोचा। वह शहर कमाने चला गया। संजू घर की जिम्मेदारियों को संभालते हुए अकेले गाँव में बनी रही। एक दिन वह आया जब पहले का माहौल, संस्कार, आदतें और पारिवारिक मूल्यों से घिरे, श्याम ने गाँव आने के लिए संदेश दिया। वह वापस गाँव आया पर बाहर जाकर उसकी आदतों में कुछ भी सुधार नहीं आया था। वह पहले से ज़्यादा अपनी आदतों को बिगाड़ चुका था। वह जब घर को आता तो घूमता फिरता, शराब पीता और संजू के साथ मारपीट, गाली गलौज इत्यादि करता।
एक दिन वह शराब पीकर आया और संजू से बोला – खाना निकाल, मुझे खाना खाना है। संजू ने खाना परोसा और खाना लेकर कमरे में गई। संजू जब खाना लेकर उसके पास गई तो उसको शराब की बू आई। उसने श्याम से पूछा कि वह शराब पीकर क्यों आये हैं? आप रोज-रोज शराब क्यों पीते हैं? उसने श्याम को समझाना चाहा पर श्याम को यह सब बातें कहाँ समझ में आनी थीं। श्याम ने संजू से कहा कि तू अपनी सलाह अपने पास रख, मेरा जो मन होगा मैं वही करूंगा। खाना खाकर श्याम छत पर जाकर सो गया ।
दूसरे दिन संजू की बड़ी बहन उससे मिलने के लिए आई। संजू ने अपनी बड़ी बहन से सारी बातें बताई। बड़ी बहन ने श्याम के माता-पिता से श्याम को समझाने को बोला और मिलकर एक साथ रहने को बोला तो उसके घर वालों ने उसकी बड़ी बहन रीता से झगड़ा कर लिया और उसे भगा दिया। शाम को संजू का घरवाला फिर शराब पीकर आया। संजू ने देखा कि श्याम फिर से शराब पीकर आया है पर संजू ने कुछ भी नहीं बोला और जाकर श्याम से खाना खाने को पूछने लगी। उनके बीच कुछ ऐसी बातचीत हुई –
संजू – खाना लेकर आऊं?
शाम – खाना लाने से पहले तू मेरे सामने तैयार होकर आ।
संजू – आज आप फिर पी कर आए हैं?
श्याम- तुझे इससे क्या तुझे जितना बोला है तू वह कर।
संजू – लो मैं तैयार होकर आ गई।
रोज़ की तरह श्याम ने न तो संजू से यह पूछा कि उसने खाना खाया या नहीं? या घर में क्या हुआ दिन भर? श्याम ने भी नशे की हालत में ठीक तरीके से खाना भी नहीं खाया। बस संजू को शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसके साथ जोर जबरदस्ती करने लगा। संजू से बोला कि मेरे दोस्त की बीवी जो वह सब कहते हैं, वह वैसे ही करती है। तू भी वैसे ही कर…
संजू अब रोज-रोज की इस हैवानियत से तंग आ चुकी थी, उसने इनकार कर दिया और वह वहाँ से चली गई। पर श्याम अपनी बुरी आदतों के कारण, पत्नी के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, यह सोच ही नहीं पा रहा था। परिवार में कभी किसी ने श्याम को यह नहीं समझाया या सिखाया था कि महिलाओं से कैसे बात किया जाता है। उनके साथ कैसे पेश आते हैं और किस तरह से परिवार को समझना चाहिए। श्याम के परिवार वालों को सिर्फ पैसा चाहिए था। श्याम से यह उम्मीद थी कि वह घर की पूरी जिम्मेदारियाँ संभाले।
शारीरिक संबंध बनाने के लिए जब संजू ने मना कर दिया तो, उसके बाद श्याम ने वह किया जो किसी ने सोचा नहीं था। उसने संजू को बहुत पीटा और चाकू से उसके शरीर पर वार किया। जब संजू ने अपनी जान बचाने के लिए हाथ-पांव चलाएं तो श्याम ने लोहे की सरिया से उसके प्राइवेट पार्ट को घायल किया, जिससे उसी समय संजू की मौत हो गई। फिर उसने संजू को फांसी पर लटका दिया और अपनी माँ को बताया, माँ ने भी अपने बेटे का साथ दिया। सुबह होने पर शोर मचा, तहकीकात हुई, पोस्टमार्टम के बाद सच सामने आया। संजू के मायके वालों ने बोला हमें पैसे दे दो, हम सुलहनामा करते हैं और बात वहीं पर शांत हो गई। लेकिन संजू की बहन रीता को यह बात बिल्कुल भी ठीक नहीं लगी। इस घटना के एक दिन पहले ही उसकी बहन ने आकर उसकी हालत देखी भी थी। उसने केस दर्ज करवाया जबरदस्ती और हत्या का। केस दर्ज करवाते ही उसके घर वाले और उसकी बहन की ससुराल वाले उस पर हावी हो गए। श्याम और उसके पिता और भाई ने उसको मारा-पीटा भी और बोले तू कैसे एक महिला होकर थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज करवा सकती है। रीता को धमकाया कि जो बात हो गई उसको खत्म करो वरना सबको बहुत सारा पैसा देकर सुलहनामा करना होगा। उसे धमकाया कि अगर वह ज्यादा हाथ-पैर चलाएगी तो उसे भी मार डालेंगे।
इस सब के बावजूद रीता ने हार नहीं मानी। महिला पुलिस का नंबर जो उसने थाने जाकर आते समय ले लिया था, उस पर फोन किया और महिला पुलिस को बुलाकर सारी बातें बताई। इतने में वहाँ के प्रधान भी आ गए। महिला पुलिस से बातचीत करने लगे कि यह महिला तो ऐसे कर रही है लेकिन हम मामले को ज्यादा बढ़ाना नहीं चाहते हैं। आत्महत्या उस महिला ने खुद से की है किसी ने भी उसको मारा नहीं है। पर रीता ने फिर आगे आकर इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई और कहा कि अगर मेरी बहन के हत्यारे को सजा नहीं मिली तो मैं हाई कोर्ट तक जाऊंगी। महिला पुलिस ने रीता की बात सुनी और श्याम को पकड़ कर ले गई। श्याम के ऊपर मुकदमा चला, गाँव के प्रधान और वहाँ के अन्य पुरुष यह सब चुपचाप देखते रहे और रीता ने आवाज़ उठाकर श्याम को सजा दिलवाई। श्याम को कानून ने ₹ 50,000 का जुर्माना और 10 साल की सजा भी सुनाई।
ऐसे तबाह हुआ बाल विवाह के कारण दो लोगों का जीवन। बाल अवस्था में शादी होने के कारण उन्हें एक-दूसरे के साथ जीवन-यापन करने की समझ नहीं थी। श्याम अपनी मर्जी के मुताबिक जीवन चलाता रहा, नतीजा सामने यह आया। दोनों परिवार भी बर्बाद हुए, काश वे अपने बच्चों को समझ पाते। समय से पहले उनके ऊपर ज़िम्मेदारी ना डालते तो शायद सब कुछ बेहतर होताl संजू की बहन रीता की तरह हर एक महिला को महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार और क्रूर व्यवहार के प्रति आवाज़ उठानी चाहिए और पितृसत्ता के खिलाफ आगे आना चाहिए।

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