साधना उइके:

मेरा नाम साधना उइके है, मैं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की रहने वाली हूँI मेरा जन्म भोपाल के एक छोटे से गाँव प्रेमपुरा में हुआ था और मैं एक छोटे मध्य वर्गीय परिवार से हूँI घर की सबसे बड़ी बेटी होने के कारण बचपन से ही संघर्ष मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया थाI

मेरे पापा भोपाल में रहकर काम करते थे, हम सभी भाई-बहन उनके साथ भोपाल में ही रहते थे और मेरी माँ गाँव में रहकर दादा-दादी व घर की देखभाल करती थीI कक्षा 6 के बाद से पापा के साथ मिलकर मैंने ही अपने छोटे भाई-बहनो को संभाला हैI घर के काम के साथ-साथ पढ़ाई भी किया करती थीI ऐसे ही करते-करते मैंने अपनी दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी कीI

मेरी ज़िन्दगी में बड़ा बदलाव

शुरुआत से ही मैं पढ़ने-लिखने में कमज़ोर रही हूँI कभी स्कूल और कॉलेज में मैंने टीचर के सामने कुछ नहीं बोला क्यूँकि मैं बहुत डरती थीI जब मैंने कॉलेज शुरू किया तो अपने सेकंड ईयर में मैं एक विद्यार्थी संगठन से जुड़ी, जिसका नाम गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन थाI इस यूनियन से जुड़ना मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा फैसला रहा, क्यूँकि यहीं से मैंने अपने जीवन का संघर्ष शुरू कियाI सीखते-सीखते वर्तमान में, मैं जयस की नारी शक्ति प्रदेश अध्यक्ष हूँI

मेरे माता-पिता भी सभी के माता-पिता की तरह डरते थे और मुझे बाहर नहीं निकलने देते थेI मुझसे कहते थे कि ज़माना खराब हैI मगर एक अच्छी बात यह थी कि मेरे पापा मुझे समाजिक बातें बताते रहते थे कि किस तरह से हम पर शोषण और अत्याचार हो रहा हैI पहले हम एक परिवार और समूह में अच्छे से रहते थे, मगर फिर हालात बदल गएI तो शायद पापा की वजह से ही मेरे अंदर समाज का दर्द रहा जिसने मुझे सामाजिक संगठनों से जोड़ दियाI 2018 से मैंने सामाजिक संगठन के माध्यम से दुनियादारी की बात समझी और अपनी आवाज़ उठाने लगीI अपने आप में मज़बूती लायी, बोलना सीखा और आज मैं तीन साल के अंदर अपने आप में बहुत कुछ बदला हुआ देखती हूँI कभी स्कूल और कॉलेज में न बोलने वाली लड़की आज मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज की बेटी, युवा नेता के रूप में नेतृत्व कर रही हैI मैं अपनी पढ़ाई के साथ-साथ दिन-रात अपने समाज को जागरूक करने व शोषित-पीड़ित लोगों के लिए आवाज़ उठाने में लगी हूँ, ताकि हमारा समाज कुछ गलत होने पर आवाज़ उठाए और साथ ही अपने जल-जंगल की भी रक्षा करेI

मैं समाज की बेटी, संगठन के साथ मिलकर किसी भी जाति व धर्म की लड़ाई हो, लड़ती हूँ और साथ ही आदिवासी समाज के मान-सम्मान व संस्कृति, भाषा, जल-जंगल-ज़मीन के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करती हूँI मैंने अपना जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया हैI मैं यह सब कुछ इसीलिए कर पायी हूँ क्यूँकि मेरे माता-पिता मेरे साथ खड़े हैंI

2018 से 2023 के बीच मैंने बहुत से आंदोलन में हिस्सा लिया हैI गलत होने पर आवाज़ उठाई है व हर दिन लोगों को जागरूक करने में लगी रहती हूँI इसके साथ ही मैंने 2021 मैं श्रुति संस्था द्वारा सामाजिक परिवर्तन कार्यशाला में हिस्सा लिया था जिससे मेरा वैज्ञानिक दृष्टिकोण बना हैI इसमें जुड़कर मेरे सोचने-समझने व अलग-अलग नज़रिए को देखने की क्षमता बढ़ी है, जिससे मैं समाज में और अधिक तर्क के साथ में काम करने लगी हूँI इस साल 30 जुलाई से मैंने जयपुर से दिल्ली तक पैदल यात्रा निकाली थी, जिससे मुझे बहुत कुछ अनुभव मिला हैI मैं अब दुनिया के कोने-कोने में अपने काम को निडरता के साथ में करना चाहती हूँ, बहुत कुछ सीखना चाहती हूँI

मैं अपने माता-पिता के लिए भी एक सपना देखती हूँ कि उनको एक घर बनाकर दूँI मेरे घर वालों ने बहुत मुश्किल समय देखा हैI हम अपनी बहुत-सी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाए, फिर भी मेरे माता-पिता समाज के हित में ही सोचते हैंI उन्होंने हमें अच्छे विचार दिए हैंI मैं आगे हमेशा अपने माता-पिता के और अपने समाज की महान हस्तियों के विचारों पर चलकर अपने व समाज के लिए निरंतर कार्य करती रहूँगी, यही मेरा खुद से वादा हैI इसी के साथ जय जोहार!

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  • साधना उइके भोपाल, मध्य प्रदेश से हैं। वह गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन से जुड़ी हैं और आदिवासी समुदाय के मुद्दों पर काम कर रही है। साथ ही साधना सामाजिक परिवर्तन शाला से भी जुड़ी हुई हैं।

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