पिछले कुछ सालों से लगातार वैज्ञानिक तथ्यों को दरकिनार कर, मिथकों को प्राचीन विज्ञान बताते हुए सच साबित करने की जैसे होड सी लगी हुई है। ऐसे प्रयासों को समाज के कुछ प्रभावशाली लोगों का समर्थन प्राप्त है जो निजी राजनीतिक हितों के लिए ऐसा कर रहे हैं। इसी कड़ी में रामसेतू का नाम भी पिछले कुछ समय से खूब उछाला जा रहा है। आइये जानते हैं कि मुकेश चितोरिया के इस लेख में कि इस रामसेतू के वैज्ञानिक तथ्य आखिर हैं क्या।

मुकेश चितोरिया:

रामसेतू 18 लाख वर्ष पूर्व टेक्टोनिक प्लेट्स के घर्षण द्वारा उत्पन्न हुआ, जो समुद्र तल तक गड़ा हुआ है। जबकि मानव जाति के जन्मे हुए अभी 1 लाख वर्ष भी नहीं हुए, करोड़ों वर्षो पूर्व के डायनासौर्स (Dianasaurs) के अवशेष भी मिल गये मगर वानर सेना का कोई अता पता नहीं। इस प्रकार के सेतू जापान-कोरिया के बीच में भी हैं, और इससे कई गुना बड़ा सेतु तुर्की द्वीप मे भी है।

राम सेतु को अधिक पुराना होने के कारण आदम पुल (Adams bridge) भी कहा जाता है। राम सेतु पर नासा ने रिसर्च कर बताया कि यह पुल प्रकृति निर्मित है, मानव निर्मित नहीं। यह समुद्र में पाये जाने वाले मूँगा (CORAL) में पाये जाने वाले केल्शियम कार्बोनेट के छोड़े जाने से निर्मित श्रंखला है, जिसकी लंबाई 30 किमी है।

नासा ने इसके सैम्पल लेकर रेडियो कार्बन परिक्षण से बताया कि यह सेतु 17.5 लाख वर्ष पुराना है। मूंगा (Coral) समुद्र के कम गहरे पानी में जमा होकर श्रंखला बनाते है। विश्व में मूँगा से निर्मित ऐसी 10 श्रृंखलाएँ हैं, इनमे से सबसे बड़ी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट पर है। इसकी लंबाई रामसेतु से भी कई गुना अधिक 2500 (किमी) है।

विभिन्न देशों में मौजूद विश्व की इन सभी मूँगा श्रंखलाओं को सेटेलाईट के द्वारा देखा जा चुका है। नासा के रिसर्च अनुसार रामसेतु जब 17.5 लाख वर्ष पुराना है, तो इसे राम निर्मित कैसे कहा जा सकता है? जबकि मानव ने खेती करना/कपड़े पहनना 80 हजार वर्ष ईसा पूर्व सीखा है। मानव ने लोहा (Iron) की खोज 1500 ईसा पूर्व की है। मानव ने लिखना 1300 ईसा पूर्व सीखा है। फिर राम नाम लिखकर दुनिया के पहले पशु सिविल इंजीनियर भालू नल-नील ने इसे कैसे बना डाला?

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