शम्भू लाल भील:

वर्तमान समय में बेरोज़गारी के चलते, आजकल युवा-युवतियाँ रोज़गार के लिए फ्रौड कंपनियों के झांसे में फंसते जा रहे हैं। यह कंपनियाँ युवा-युवतियों को रोज़गार यानी नौकरी के नाम पर तरह-तरह के स्कीम-लालच देकर फंसा लेती हैं और बाद में इन्हें फीस जमा कराने को बोलती हैं। ऐसे में इन युवाओं को मजबूरन नौकरी के लालच में पैसे जमा करने पड़ते हैं। मौके पर इच्छित पैसे नहीं मिलने के कारण यह लोगों से उधार लेकर पैसे जमा कराते हैं और यह कम्पनियाँ आगे चलकर उनके अनुसार बताई गई प्रक्रिया योजनाओं को चलाने पर मजबूर करते हैं, जिससे ये लाखों रुपए के कर्ज में डूब जाते हैं।

यह क्या है – यह एक ऐसा तैयार किया हुआ गुट या संगठन नेटवर्क है जिसमें होशियार ट्रेनर होते हैं जो आर्थिक रूप से कमज़ोर बेरोज़गार युवा लोगों पर मानसिक कब्जा कर उनको तरह-तरह के पैसे कमाने के तरीके बताकर, झांसे में फंसा लेते हैं। बाद में लाभ के नाम पर पैसे लेकर या तो भाग जाते हैं या फिर उसको और लालच देकर युवाओं, लोगों को एक चेन सिस्टम बनाने के लिए बोलते हैं जिसमें दोनों साइड में दो-दो लोगों को जोड़ना पड़ता है। इनसे उनको 10% कमीशन मिलता है और अगर केवल आदमी एक ही साइड जोड़ता है तो बोलते हैं सर और जोड़ो नहीं तो तुम्हारा काम पूरा नहीं होगा, और रिश्तेदारों को जोड़ो और लोगों को सर की उपाधि दी जाती है।

उद्देश्य – इस प्रकार के नेटवर्क या संगठन का उद्देश्य कमज़ोर वर्ग के लोगों एवं बेरोज़गार, कम पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी-पैसों का लालच देकर पूंजीवाद को बढ़ाना होता है।

कब और कहाँ – राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में सन 2007 से 2020 तक यह कंपनियाँ चली। यहाँ किसानों, मज़दूरों को बीमा के नाम पर दुर्घटना बीमाओं के नाम और एफडी या पोस्ट के नाम पर लूटा  गया। यहाँ तक कि कहा गया कि अगर किसानों को किसी प्रकार की दुर्घटना से मृत्यु हो गई तो उसको क्लेम में 2 लाख 5 हज़ार मिलेगा, इसके लिए पहले आपको 3500 से 10,000 तक फीस जमा करानी होगी। ऐसी ही स्कीमों में सैकड़ों लोगों ने फीस जमा कराई। 

प्रभाव – जो युवा लोग इस ठगी के शिकार होते हैं उसके जीवन पर आर्थिक और सामाजिक रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रोज़गार के लालच के चलते फीस जमा कर दी जाती है, जिसका उनको पुनः लाभ नहीं मिल पाता। इससे वह कर्ज में डूब जाते हैं। ऐसी स्कीमों में युवाओं पर समाज के लोगों को जोड़ने का प्रेशर रहता है। कई बार लोगों के बीच मतभेद भी हो जाते हैं, पारिवारिक क्लेश पैदा हो जाता है। इसके कारण यहाँ तक कि बहुत से लोग मृत्यु को भी गले लगा लेते हैं या गाँव छोड़ कर भाग जाते हैं और मानसिक बीमारी का भी शिकार हो जाते हैं।

समाधान 

  • इसके लिए ठगी होने से पहले, लोगों को संगठन व गाँव वालों से मिलकर बात करनी चाहिए।
  • सरकार को इन कम्पनियों के बारे मे जानकारी देनी चाहिए कि यह सही हैं या गलत हैं।
  • युवाओं और लोगों को इस तरह की फर्ज़ी तरीके के खिलाफ ट्रेनिंग देनी चाहिए, ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके। 
  • ठगी होने पर सरकार को ज्ञापन देकर इसकी जाँच के लिए एक कमेटी गठित करनी चाहिए, सरकार द्वारा एवं संगठन द्वारा जाँच का फास्ट ट्रैक कानून बनाना चाहिए।
  • संगठन के माध्यम से सख्त कानून बनाए जाने की पैरवी की जानी चाहिए, और ऐसी कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए, जिससे पुनः लोगों को उनकी राशि वापिस मिल सके।

Author

  • शंभू लाल भील / Shambhu Lal Bhil

    शम्भु लाल भील, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले से हैं। शंभू एक जागरूक युवा वार्ड पंच हैं और चित्तौड़गढ़ ज़िले में प्रतिरोध संस्था से जुड़कर, भील आदिवासियों की स्वास्थ्य संबंधित व अन्य समस्याओं को हल करने में लगे हैं। वे ‘हमारा स्वास्थ्य हमारे हाथ’ कार्यक्रम से जुड़े हैं।

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