अखड़ा रांची:

विडियो सीरीज़ ‘ग्राम  सभा की कहानी’, ‘ग्राम स्वशासन अभियान’ की एक पहल है, जिसे अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से ‘अखड़ा रांची’ द्वारा निर्मित किया गया है। इस पूरी सीरीज़ में झारखण्ड के कई ऐसे गाँवों से रूबरू करवाया गया है, जहाँ मौजूदा समय में लोग ग्राम सभा की सामूहिक शक्ति को समझ रहे हैं। अपने गाँवों की विकास योजना खुद तैयार कर रहे हैं और उसे धरातल पर ला रहे हैं। वैसे ही वे अब अपने हक और अधिकारों की बात अब करने लगे हैं।

यह फिल्म एक ऐसे गाँव की कहानी बयां करती है, जहाँ आज से कुछ साल पहले तक पीने का पानी लाने के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। लेकिन आज गाँव में ही तीन-तीन जलमीनार लगे हैं। यहाँ ज़रूरत की वो सारी सुविधाएँ उपलब्ध हैं जो गाँव वालों को चाहिए। और ये संभव हो पाया है ग्राम सभा के मजबूत होने से और उसकी शक्ति को पहचानने से। तो चलिए देखते हैं झारखण्ड के गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के पाठ (पहाड़ी क्षेत्र) में बसे लुपुंगपाठ गाँव की कहानी जहाँ के लोग अब अपने अधिकारों को पहचान कर अपने गाँव को एक नयी दिशा दे रहे हैं।

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  • नब्बे के दशक की शुरुआत कुछ युवा आदिवासी, आदिवासी समाज में विकास का मूल्यांकन करने एक साथ आए। उन्होने महसूस किया गया कि भले ही आदिवासी समुदायों के लोग सरकारी सेवाओं और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़े हैं, लेकिन बौद्धिक क्षेत्र यानी साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी पर्याप्त उपस्थिति नहीं है। इसलिए इस दिशा में काम करने के लिए एक समूह विकसित करने का निर्णय लिया गया और इस तरह 1996 में ‘अखड़ा’ का जन्म हुआ। आज अखड़ा, प्रतिबद्ध व्यक्तियों का एक समूह है, जिनमें ज्यादातर आदिवासी युवा युवा शामिल हैं, जो संस्कृति, संचार और मानव अधिकारों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। पिछले 20 वर्षों में अखड़ा ने 30 से अधिक वृत्तचित्र (डोक्यूमेंट्री) फिल्मों का निर्माण किया है और उनमें से कई को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है।

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