विजय: 

साथियों,

बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है। केवल लिखने  से इसका हल नहीं होगा, इस पर हम सभी साथियों को काम करना पड़ेगा और कल का एक बेहतर रास्ता बनाना पड़ेगा। 

मैं अररिया में जहाँ रहता हूँ, वहीं बगल में एक महादलित परिवार अपना छोटा सा घर बनाकर गुजर-बसर करता है। उस व्यक्ति के तीन छोटे-छोटे और बहुत प्यारे बच्चे हैं। बड़े बच्चे का नाम भोला, बीच वाले का नाम सावन और छोटी बहन का नाम रेखा है। ये सभी छोटे हैं। बड़ा 6 साल का, बीच वाला 5 साल का और रेखा 3 साल की होगी, लगभग। अफ़सोस की बात यह है कि इन तीनों प्यारे बच्चों के पापा शराबी हैं। 

उनकी इस शराब की लत के चलते वह बच्चों को खाना-पीना सही से नहीं देते हैं। कभी-कभी सभी बच्चे हमारे घर पर आ कर खाते हैं। मेरी पत्नी, चाँदनी बहुत प्यार से उन सभी को खाना खिला देती है। बच्चे खुश हो जाते हैं और इससे हम सभी को भी बहुत खुशी मिलती है। 

भोला के मम्मी-पापा अक्सर आपस मे लड़ते रहते हैं। अभी दस दिन पहले की बात है, बच्चे को खाना खिलाने को लेकर दोनों पति-पत्नी के बीच अच्छा-खासा झगड़ा हो गया। झगड़े के बाद, भोला की मम्मी तीनों बच्चों को दस दिन पहले, छोड़कर अपने मायके चली गई । इधर बच्चे अपने पापा के साथ रह गए।

आज उनके पापा शराब पी रहे थे, उसी समय अररिया पुलिस उनको उठा कर ले गई। अब बच्चे परेशान हैं और अभी चाँदनी के साथ मेरे घर पर हैं।

इन बच्चों का क्या कसूर है? इस उम्र में बच्चे को अच्छी शिक्षा, अच्छा खान-पान नहीं मिलेगा तो उस बच्चे का क्या भविष्य कैसा होगा? देखा गया है कि ऐसे ही बच्चे फिर गलत रास्ते अपना लेते हैं। चोरी-चकारी करने लगते हैं। 

मैं, आप सभी साथियों को यही बताना चाहता हूँ कि ऐसी घटना हर रोज़ कहीं न कहीं हो रही है। आपके इलाके में भी ऐसे परिवार होंगे। हम कार्यकर्ताओं का इस पर ध्यान नहीं जाता है और अगर ध्यान चला भी जाता है तो हम एक-दूसरे का सहारा नहीं बनते हैं। मेरी आप सभी साथियों से गुज़ारिश है कि ऐसे गरीब परिवार के साथ खड़े होइए और एक दूसरे का सहारा बनिये। 

मैने इस परिवार की मदद करने के लिए अररिया के सरकारी कर्मचारियों से भी निवेदन किया है। पिता की कमज़ोरी की सज़ा बच्चे क्यों भुगतें? यदि कोई सरकारी योजना ऐसे बच्चों के लिए हो तो उन्हें ज़रूर उसका लाभ दिलवाने में मदद करनी चाहिए। ऐसे परिवार और ऐसे बच्चों के लिए काम करना होगा, जिससे बच्चों को हम अच्छे भविष्य की ओर बढ़ा सकें। यदि सरकारी योजनाएं दिलवाने में भ्रष्ट सरकारी सिस्टम अड़ंगे डालता है तो ऐसे भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ़ हम सब को एकजुट होकर लड़ना पड़ेगा। 

फीचर्ड फोटो प्रतीकात्मक है। फोटो आभार: इंडियन एक्सप्रेस

Author

  • विजय बिहार के अररिया ज़िले में Going to School संस्था के साथ मिलकर सरकारी स्कूल में 9वीं से 12वीं कक्षा के बच्चो को इंटर्नशिप करवाने का काम कर रहे हैं । पूर्व में अन्य सामाजिक संगठनों व संस्थाओं में भी कार्य कर चुके हैं।

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