अमित:

गत दिनों एक मज़ेदार खबर आई – हरियाणा की एक लड़की ने एक पण्डित के खि़लाफ़ शिकायत दर्ज करवा दी। हालांकि यह खबर हरियाणा के जागरण अखबार में सितम्बर 2021 में छपी थी, लेकिन इसकी पुष्टी नहीं की गई थी। फिर भी इसके हवाले से यहाँ लेखे लिख रहा हूँ, क्योंकि यह आइडिया बहुत अच्छा लगा। लड़की की शादी के पहले लड़के से कुण्डली मिलाई गई। लड़की का कहना था कि पण्डित जी ने कुण्डली मिलाकर बताया था कि शादी सफ़ल होगी और कोई विघ्न नहीं आयेगा। कुण्डली मिलाने के लिये पण्डित जी ने रू.11,000 दक्षिणा भी ले ली। लेकिन शादी के बाद से ही खटपट शुरू हो गई और तीन महीनों में ही शादी टूट गई। ऐसा तो सदियों से अपने देश में होता चला आ रहा है। इसमें कोई नई बात नहीं है लेकिन इस कहानी में नई बात यह है कि शादी टूटने के बाद लड़की ने सोचा कि पण्डित ने उनके साथ धोखा किया और वह इस शिकायत को लेकर थाने चली गई।

काफ़ी आना कानी करने के बाद पुलिस को धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करना पड़ा और पण्डित जी को गिरफ्तार किया गया। संभवतः इस तरह का यह पहला केस है। लड़की की हिम्मत और सूझ-बूझ की दाद देनी चाहिये। हर साल देश में करोड़ों रूप्ये खर्च करके, बड़े बड़े सेमीनार किये जाते हैं सोचने के लिये कि देश के लोगों में वैज्ञानिक चेतना कैसे विकसित होगी या इस पाखण्ड को कैसे रोका जाये। सबसे आसान तरीका इस बहादुर लड़की ने दिखाया है – कानून का सहारा लेना और ऐसे पाखण्डियों के खि़लाफ़ शिकायत दर्ज करवाना। ओ माई गॉड फ़िल्म की याद आ गई जिसमें एक व्यापारी, कांजी लालजी मेहता की भूमिका में परेश रावल, भगवान के खि़लाफ़ ही मुकदमा दर्ज कर देते हैं।

इसी तरह की एक और घटना गत दिनों मध्य प्रदेश के आलीराजपुर के हाट में हुई। 25 जून को एक भाईसाहब घोड़ा गाड़ी पर माइक लगा कर काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी बेच रहे थे और प्रचार कर रहे थे कि इसे पहनने से इंसान बीमार नहीं पड़ेगा और घर में बरकत आयेगी, मतलब अमीर हो जायेंगे। उनका दावा था कि ऋषि मुनियों ने तपस्या करके यह राज़ ज्ञात किया है। ये भाईसाहब उत्तर प्रदेश से सैंकड़ों किलोमीटर का सफ़र तय करके आदिवासियों को यह ज्ञान बॉंटने आये थे। काफ़ी लोग इनकी बातों में आकर अंगूठी खरीद रहे थे।

इनकी बदकिस्मती थी कि वहीं हाट में शंकर तड़वला भी घूम रहे थे। ये एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लगभग चार दशकों से आलीराजपुर ज़िले के आदिवासियों की समस्याओं के लिये संघर्ष कर रहे हैं। शंकर भाई ने इनसे बहस करी और इनसे इनके दावों की पुष्टि करने के लिये सबूत मांगा जो कि, ज़ाहिर है वह घोड़े वाला नहीं दे पाया। फिर उनसे शंकर भाई ने व्यापार करने का लाइसेंस मांगा, वह भी नहीं था। शंकर भाई ने इन्हे समझाया कि ये फ़र्जी धंधा बंद करें और एक शिकायत पत्र पुलिस अधीक्षक को भी लिख कर दिया।

ये दोनो प्रसंग प्रेरणादायक हैं और अनुकरणीय भी। लोगों को भ्रमित करके पैसा ऐंठने वालों को सबक सिखाने का यह अच्छा तरीका है। अंधविश्वासों के खि़लाफ़ बोलने वाले कार्यकर्ताओं के लिये और वैज्ञानिक चेतना के प्रसार के लिये यह अच्छी मिसाल है।

Author

  • अमित, सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं और मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले में एक वैकल्पिक शिक्षा के प्रयोग पर शुरू हुआ स्थानीय स्कूल – आधारशिला शिक्षण केन्द्र चलाते हैं।

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