अभिषेक:

मैं गत चार महीनों से अपने गांव के आस-पास स्वास्थ्य के मुद्दे पर काम कर रहा हूं। मैं इन गांवों में महिलाओं और आदमियों से बात करता हूं कि उनके और बच्चों के शरीर को कैसे स्वस्थ रखना है, स्वास्थ्य को कैसे सुधारें और स्वास्थ्य की समस्याओं के लिए क्या क्या कर सकते हैं। बच्चे का वज़न और ऊंचाई नाप कर, माता पिता को कुपोषण की जानकारी भी देता हूं।

एक बार जब मैं बच्चों का वजन ले रहा था तो राशिया नाम का व्यक्ति वहां पर दारू पीकर आया। थोड़ी देर बाद मैं उसके साथ बात करने लगा। बातों बातों में मैंने उसको समझाया कि दारू पीने से क्या-क्या नुकसान हैं और क्या-क्या बीमारी होने की संभावना है। उसकी पत्नी भी वहां आ गई और बताया कि उसके कहने पर भी नहीं मानता है। उसने बताया कि वह इसकी, शराब पीने की आदत से परेशान होकर महाराष्ट्र के धुलिया जिले में मज़दूरी करने चले जाते हैं। फिर ये अकेला पड़ा रहता है।  

नर्मदा के किनारे दारू छोड़ने की शपथ लेता राशिया

अगली बार जब मैं मोहल्ले में गया तो देखा कि घर पर कोई नहीं है। राशिया की पत्नी, बच्चों को लेकर मज़दूरी करने चली गई थी। राशिया ने कहा कि सब को मज़दूरी करने भेज दिया। बाद में वह रोज़ दारू पीता था। 

कुछ दिन बाद, मैं फिर से बच्चों का वज़न लेने गया तो उसके परिवार वाले कुछ दिन तक मज़दूरी करके वापिस आ गए थे। बच्चों का वज़न मज़दूरी से वापिस आकर कम हो गया था। मैंने राशिया को समझाया कि भाई इतनी उम्र से ही दारू पीने से आने वाले समय में बहुत बड़ी बीमारी हो सकती है और तेरे बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। उसे समझाया कि उसकी दारू की लत के कारण, घर चलाने का सारा बोझ उसकी पत्नी पर आ गया है। मज़दूरी करने व पति के दारू पीने की टेंशन के कारण वो भी बीमार पड़ जाएगी।

काफ़ी समझाने के बाद वह दारू पीना छोड़ने के लिए तैयार हो गया। हमारे क्षेत्र में लोग दारू छोड़ने के लिए नर्मदा नदी पर जाते हैं। मैं और उसकी पत्नी मिलकर उसे नर्मदा नदी पर लेकर गए और वहां पर दारू न पीने का वचन दिलाया। नर्मदा नदी का पानी हाथ में लेकर उसने यह बोल बोलकर दारू छोड़ी –

“हे नर्मदा मैया, मैंने जो भी गलती की है और जो भी किसी को अच्छा बुरा कहा हो, तो आज तेरे पवित्र पानी से नहा कर मेरे पाप धुल जाने चाहिए। हमेशा हमारे घर में सही बरकत देना नर्मदा मैया। आज से मैं दारू पीना बंद कर रहा हूं। जब भी मैं दारू पीना शुरू करूंगा तो फिर से तेरे पवित्र पानी से नहा कर चालू करूंगा।” – यह बोलकर राशिया ने नर्मदा नदी किनारे दारू छोड़ दी। 

उस दिन से राशिया ने दारू पीना बंद कर दिया। राशिया के चार बच्चे हैं – दो लड़के और दो लड़कियां। अब, जब भी मैं उसके घर के पास से गुज़रता हूं तो वह कहता है, “भाई अच्छा हुआ मेरी दारू छुड़वा दी। पहले मैं जब दारू पीता था, तो खाना कम खाता था, अब तो मैं अच्छे से खा रहा हूं।” मुझे भी अच्छा लगा कि उसने मेरी और परिवार वालों की बात सुनकर दारू पीना छोड़ दिया। 

पहले, राशिया दारू पीकर बदनाम हो गया था। अब वह खुद कह रहा है कि मेरे साथ मिलकर गांव के भले के लिए काम करेंगे। अब हमने दस लोगों का ग्रुप बनाकर, धीरे-धीरे कुछ भी समस्या को लेकर काम करने का सोचा है।

दारूबाज आदमियों से घर बर्बाद होता है। वह कभी आगे नहीं बढ़ पाते हैं। घर चलाने की पूरी ज़िम्मेदारी माता के ऊपर आ जाती है। इस कारण वह बच्चों की तरफ़ ध्यान नहीं दे पाती है और बच्चे कुपोषित हो जाते हैं। दारूबाज आदमी हाट जाते हैं तो दारू में पैसा खर्च कर देते हैं और घर के लिए फल-सब्जियां नहीं लाते हैं।

जब ऐसे कोई छोटे-छोटे अच्छे काम हो जाते हैं तो मुझे भी समाज के लिए काम करने लिए प्रोत्साहन मिलता है। हमारे क्षेत्र में शराब का बहुत चलन है। इस मुद्दे पर बहुत काम करने की ज़रूरत है। मैं सोचता हूं कि जब सरकार को पता है कि शराब, गरीबों के लिए एक खराब चीज़ है तो वे क्यों शराब के ठेके देती है? मुझे पता चला कि शराब से सरकार को बहुत आमदनी होती है। तो क्या यह सही बात है कि आय बढ़ाने के लिए सरकार कुछ लोगों का घर बर्बाद होने दे रही है? 

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  • अभिषेक जमरे एक आदिवासी युवा हैं जिन्होंने बी.ए. के बाद सामाजिक कार्य करने की सोच बनाई। आजकल वे अपने आस-पास के गांव में स्वास्थ्य की समस्याओं को हल करने में लगे हैं। ये आधारशिला शिक्षण केंद्र के छात्र रहे हैं।

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