आकांक्षा भारती:

आप सभी इलेक्शन के बारे में जानते हैं कि यह क्या है, क्यों है, क्या करता है, कैसे कार्य करता है और किसके लिए कार्य करता है, वगैरा-वगैरा।

इलेक्शन का नाम सुनते ही ध्यान में आता है कि एक नेता है, उसके विपक्ष का एक नेता है, दोनों में से जनता के वोट के आधार पर जो जीत जाता है, उसी की सरकार आएगी। वह कार्य करेगा जनता के लिए, पर क्या आप यह जानते हैं कि कई लोग वोट के बारे में जानते ही नहीं या वोट के बारे में जानते हैं लेकिन वोट देने जाते नहीं! शायद उनको तरीका नहीं पता और इसमें ज्यादातर औरतें ही होती हैं, जिनको वोट के बारे में पता तो होता है पर वह वोट करने नहीं जाती या यूं कहें कि वह वोट तो करती हैं पर उनके दिमाग में यह बैठा दिया जाता है कि उनको किन्हें वोट करना है। उनको वोट किसे देना है यह उनका निर्णय नहीं होता। वह अपने भाई या पिता या पति के निर्णय पर वोट देने जाती हैं। उनको यह अधिकार नहीं होता कि वह खुद के विचार से खुद के निर्णय ले पाएँ और वोट कर पाएँ। लेकिन इनमें उनकी गलती नहीं होती, यह विचार उनके दिमाग में पहले से ही डाल दिया जाता है।

ज़्यादातर औरतों को या लड़कियों को तो यह लगता है कि यह बस एक कार्य है। बस कर दो, उस पर विचार करना या उस पर बातचीत करना ज़रूरी नहीं है। कई लड़कियां 18 साल की हो जाती हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि उनका वोट देना कितना ज़रूरी है। बाकी लोगों की तरह उनका वोट भी बहुत महत्वपूर्ण है यह समझने के पीछे के पीछे उनकी शिक्षा का हाथ भी होता है। वोट देना कितना महत्वपूर्ण है या वोट देना क्यों ज़रूरी है, यह उन्हें पता नहीं होता, कई शिक्षित लड़कियां भी इनमें आती है। वह वोट देने नहीं जाती है, इस पर वह बात नहीं करना चाहती। कुछ औरतों से मैंने एक सर्वे के समय यह पूछा था कि वोट के बारे में आपके क्या विचार हैं? तो उन्होंने कहा कि “काहे दें वोट? ज़रूरी है क्या? हमारे 1 वोट से क्या बदल जाएगा? और वैसे भी हमें तो घर में ही रहना है, खाना बनाना है, हमारे वोट का क्या करना?” 

यह सुनते ही मैंने सोचा कि इनके विचार या इनकी बात, यूं कहें कि घर तक ही सीमित है। कुछ औरतें कहती हैं, “हमका कुछ मिले ना, वोट काहे करें?” इन सब की इस हालत का जिम्मेदार इनका अशिक्षित होना है। जब तक वह अशिक्षित रहेंगी, वोट के बारे में क्या ही जानेंगे? तो सबसे पहले आप अपने घर की बेटियों को पढ़ाएं और औरतों को इन सब की जानकारी दें। घर की औरतों के साथ यह बात करें कि वोट देना क्यों ज़रूरी है। उनसे यह बात करें कि उनके वोट करने से क्या बदल जाएगा, उनके सरकार को लेकर क्या विचार हैं, या सरकार कैसी होनी चाहिए। मैं अपने विचार में यह ज़रूर कहूंगी कि आप उनसे बात करेंगे तो वह आपको नई-नई चीजें बताएंगे। लेकिन सबसे पहले इनकी शिक्षा पर ध्यान दें। मैं खुद वोट डालने नहीं जा पाती, क्यूंकी किसी गलत व्यक्ति को वोट देने से अच्छा है कि मैं वोट ही ना दूं।

Author

  • आकांक्षा, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद-अयोध्या ज़िले की रहने वाली है और संविधान मित्र मंडली की सदस्या हैं। आकांक्षा किशोरियों के साथ उनके स्वास्थ्य और हक-अधिकारों पर अवध पीपल्स फोरम के साथ समुदाय में काम करती हैं। वर्तमान में वह जी.एन.एम की विद्यार्थी हैं और अपना तालीम घर-शहादत अली खां की छावनी में शिक्षिका हैं।

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One response to ““हमें तो घर में ही रहना है, खाना बनाना है, हमारे वोट का क्या करना?””

  1. Suresh Avatar
    Suresh

    आकांक्षा जी, बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर आपने लेख लिखा है। आपकी बात से मैं बिल्कुल सहमत हूँ कि अधिकतर लोगों को वोट के महत्व के बारे में जानकारी नहीं होती है। बिल्कुल हमारी जिम्मेदारी बनती है कि आसपास के लोगों में राजनीति चेतना ला सके। रही बात आपने कहा मैं स्वयं वोट डालने नहीं जा पाती, क्योंकि किसी गलत व्यक्ति को वोट देने से अच्छा किसी को ना दूं। मुझे लगता है कि हमारे सामने जो भी राजनीतिक दल के सदस्य दिखाई देते हैं वे हमें गलत, भ्रष्टाचारी दिखाई देते हैं। इसलिए आपने इस प्रकार की सोच बना ली है।
    इसलिए हमें एक अच्छे राजनीतिक प्रतिनिधि का चयन करने की आवश्यकता है जो वाकई में जनता के लिए अच्छा कार्य कर सके। आप भी अच्छे प्रतिनिधि की तलाश कीजिए व वोट डालकर आइये।

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