गीत: घरों से निकली हैं लड़कियाँ

युवानिया डेस्क:

युवाओं के साथ की एक पहल – सामाजिक परिवर्तन शाला के वार्षिक युवा महोत्सव में जुड़े हिंदी ग्रुप के साथियों ने ये गाना लिखा और कंपोज़ किया था। 2018 के मानगाँव में ये युवा महोत्सव आयोजित हुआ था जिसमें भारत के अलग-अलग राज्यों से 150 से भी ज़्यादा युवा एकत्रित हुए थे सम्मलेन के लिए…

आप सब भी इस गाने का आनंद लें और अपने ग्रुप्स में भी इसको शेयर करें –

गीत के बोल –

जिन्हें कोई फिकर नहीं, डरने का डर नहीं x2
सड़कों पे निकली है लड़कियाँ  x2

उड़ती परिंदों सी ये, झूमती झरनों सी ये 
देखो चली है कहाँ लड़कियाँ  x2

ये कहीं रुकती नहीं, ये कहीं झुकती नहीं
सूरज की किरणों सी लड़कियाँ  x2

चुल्हों के थपलों से तप के बनी
धागों की गाठों को खोल चली
चली आज़ाद रे —- (पॉज)
घूंघट से निकली है लड़कियाँ  x2

छोटे से दिल के हैं सपने बड़े  x2
सपनों में सौ-सौ है रंग गढ़े  x2
क्या-क्या रंग गढ़े,
रंगों से निखरी हैं लड़कियाँ x2 

मंज़िल, की कोई फिकर नहीं
खतरों से लड़की ये डरती नहीं
क़दमों की चाप से, क़दमों की थाप से
दुनिया बनाती है लड़कियाँ  x2
धरती सजाती हैं लड़कियाँ x2

फीचर्ड फ़ोटो आभार: गेट्टी इमेजस

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