छोटूसिंह रावत:

18 साल की उम्र के बाद हम सभी को वोट देने का अधिकार है और हम अपना नेता, सरकार चुन सकते हैं, फिर जीवन साथी क्यों नहीं चुन सकते? 18 साल की उम्र के बाद लड़की अपनी मर्ज़ी से किसी के साथ सम्बन्ध बना सकती है तो जीवन साथी क्यों नहीं चुन सकती?

अगर शादी की उम्र 18 वर्ष से 21 वर्ष हो जाती है तो इसका आने वाले समय में बहुत बुरा असर पड़ेगा। यह कानून शहरी क्षेत्र के लिए सही हो सकता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लिए, खासकर, जिन राज्यों में बाल विवाह होते हैं, उन राज्यों में लड़कियों पर हिंसा बढ़ सकती है। क्योंकि आज के समय मे हम देखते हैं कि 15-16 साल के बाद लड़के लड़कियों में दोस्तियाँ होना आम बात बन गई है। और इस उम्र मे लड़का लड़की एक दूसरे को पंसद करने लग जाते हैं। कुछ लड़के-लड़कियां तो 18 से पहले ही घर छोड़ कर चले जाते हैं जिसके कारण कुछ लड़के पोक्सो एक्ट में फंस जाते हैं।  इससे पोक्सो एक्ट में और ज़्यादा केस बढ़ सकते हैं। अभी भी, हर रोज अखबार मे खबरे देखते हैं कि 18 से कम उम्र में ही दोस्ती, प्यार के हो गया और घर छोड़ कर चले जा रहे हैं।  कुछ आत्महत्या भी कर रहे हैं। प्रेमियों का भागना और आत्महत्या और बढ़ जाएगी। ऐसे में यह कानून, अभी जो है, वो ही सही है।

कुछ कपल ऐसे होते हैं जिनमें लड़की 18 और लड़का 21 साल का होने का इंतज़ार करता है ताकि उम्र पूरी हो जाये तो कोर्ट मैरिज कर सके। लेकिन अब सरकार ने शादी की उम्र 18 से 21 कर दी तो जो कपल अपनी मर्ज़ी से शादी करना चाहता है उन पर हिंसा बढ़ सकती है क्योंकि 21 साल तक इतना लम्बा इन्तज़ार करना मुश्किल होगा। अभी लड़की, 18 वर्ष की होने पर वह पुलिस से मदद ले सकती है लेकिन यह कानून बनने के बाद 18 से 21 के बीच मे जिन कपल के साथ हिंसा होगी वो कहां से मदद लंगे? इस 18 से 21 के बीच के तीन साल की उम्र में लड़के और लड़कियों पर पुलिस, परिवार, समाज की तरफ़ से हिंसा बढ़ सकती है जिसके कारण अवसाद में आकर लड़का-लड़की आत्महत्या भी कर सकते हैं। 

देश में अभी बाल विवाह का कानून भी है, फिर भी राजस्थान के गाँवों में 50% से ज्यादा शादियाँ 18 वर्ष से पहले हो जाती हैं। अगर यह कानून बन गया तो बाल विवाह 90% तक बढ़ सकते हैं।  एक सवाल हमारा सरकार से यह भी है कि 18 साल वाले कानून से बाल विवाह बन्द नहीं हुआ तो क्या शादी की उम्र 21 वर्ष कर देने से बाल विवाह कम हो जाएँगे?

इसका सबसे ज़्यादा प्रभाव गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ सकता है। सरकार बोल रही है, इस कानून से लड़कियों की शिक्षा की स्थिति सुधरेगी। क्या सरकार के पास लड़कियों की शिक्षा की स्थिति का आंकड़ा है? क्या लड़कों के बराबर गाँवों में लड़कियां पढ़ाई कर पा रही हैं? आज के समय में गांव से केवल 50% लड़कियां 12वीं के बाद कॉलेज में जा पाती हैं। 12वीं तक भी 50% लड़कियां ही पढ़ पा रही हैं।

सरकार को लड़कियों के हित में कानून ही बनाना है तो इनके लिए शिक्षा, रोज़गार, आजीविका, योजनाओं के अवसर खोलें। लड़कियों की शिक्षा की स्थिति को कैसे बढ़ा सकते हैं जिससे यह भी लड़कों की तरह सक्षम बन सकें। इसके बारे में सरकार को सोचना चाहिए।

18 साल के बाद लड़की खुद सक्षम है और उसी पर ही छोड़ देना चाहिए और जब उसकी मर्ज़ी हो तब शादी कर सके।

फीचर्ड फ़ोटो आभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

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  • छोटू सिंह, राजस्थान के अजमेर से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वे असंगठित श्रमिक और बच्चों के साथ ज़मीनी स्तर के मुद्दों पर कार्यरत हैं और वर्तमान में सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन के साथ जुड़ कर काम कर रहे हैं।

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