दिल्ली के सरकारी स्कूल

मंगेश कुमार:

मेरा नाम मंगेश कुमार तिवारी है। मैं अपने परिवार के साथ पिछले 13 वर्षों से दिल्ली में रहता हूं। यहां मैं एक कोठी की देख-रेख करता हूं। एक दिन मैं अपने एक रिश्तेदार के घर मंडावली गया था और मेरे रिश्तेदार की लड़की जिसकी उम्र मेरे बेटी के उम्र के बराबर लगभग 10-11 वर्ष होगी वह जोर-जोर से अंग्रेजी की किताब पढ़ रही थी। मैंने पूछा बेटा किस क्लास में पढ़ती हो? उसने छठी कक्षा बताई। तो मैंने स्कूल का नाम पूछा तो उसने सरकारी स्कूल बताया। तो मैंने अपने रिश्ते में लगने वाले भाई से पूछा कि लड़की का नाम आपने कब लिखवाया? तो उन्होंने बताया कि उनको लड़की नर्सरी से ही सरकारी स्कूल पढ़ रही है। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए भी लड़की बहुत होशियार है, तो मैंने बात आगे बढ़ाते हुए उनसे फीस के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि फीस वगैरह नहीं लगती, उल्टा सरकार ने बच्चों को स्कूल ड्रेस और कॉपी का खर्चा उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। उनकी बात सुनकर मैंने भी यह फैसला किया कि, मैं भी अपना पैसा प्राइवेट स्कूल में के चक्कर में क्यों बर्बाद करूं? क्यों ना अपने बेटी का नाम भी सरकारी स्कूल में लिखवा हूं।

मैंने उनसे एडमिशन की सारी जानकारी ली और मार्च-अप्रैल महीने का इंतजार किया और जब मार्च का महीना आया तो मैंने अपनी लड़की का नाम पांचवी कक्षा में लिखवा दिया था। यह मार्च 2019 की बात है। नाम लिखवा कर मुझे बहुत तसल्ली महसूस हुई। मैं प्राइवेट स्कूल की बढ़ती फीस से काफी परेशान था। हर महीने 1500 ₹ फीस देनी पड़ती थी। और साथ में कापी-किताबों और स्कूल मेंटेन चार्ज मिलाकार सालाना 40 से 50000₹ खर्च हो जाते थे। जिससे आर्थिक रूप से बहुत परेशान रहते थे। सरकारी स्कूल में नाम लिखवाना बहुत आसान है। सिर्फ बच्चे की आधार कार्ड और फोटो एड्रेस की जानकारी जरूरत पड़ती है। जब स्कूल खुल गई, तो बेटी को पहुंचाने मैं ही उसके स्कूल जाता था। जब स्कूल पहुंचते तो वहां एक बड़ा सा गेट लगा हुआ है। जहां दो गार्ड हमेशा खड़े होते दिखते थे। पैरंट्स को बिना परमिशन अंदर जाना मना था। सुरक्षा का बहुत इंतजाम था। वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए थे। यह सब देख कर मैं बहुत खुश हो रहा था। और पछता भी रहा था कि क्यों नहीं मैंने जल्दी नाम सरकारी स्कूल में लिखवाया? अच्छी पढ़ाई के साथ मेरे काफी पैसे भी बच जाते। एक दिन बेटी ने बताया कि पापा कल हमारे स्कूल में टीचर पेरेंट्स मीटिंग है और आपको मम्मी को आना है। हम लोग सुबह 8:00 बजे ही स्कूल पहुंच गए स्कूल को बहुत अच्छे से सजाया हुआ था। स्कूल परिसर में अच्छी साफ-सफाई थी हमें एक क्लास में बुलाया गया। वहां टीचर पहले से ही उपस्थित थे, हमने टीचर को गुड मॉर्निंग बोला टीचर ने बताया कि आपकी लड़की काफी होशियार है। सिर्फ हिंदी और मैथ्स थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है।

लड़की की क्लास बहुत अच्छे तरह से सजाई हुई थी। बच्चों ने कुछ पेंटिंग बनाकर दीवारों पर लगाई थी। और डेस्क बेंच भी नए-नए लगे थे। यह देखकर हमें बहुत सुकून लगा कि, हम लोग सरकारी स्कूल के बारे में पता नहीं क्या-क्या सोचते थे? और हमें यह सकून लगा कि अब हमारी बेटी की पढ़ाई अच्छे से सस्ते में हो सकेगी। स्कूल परिसर बहुत बड़ा था। हर जगह पानी पीने के लिए वाटर कूलर रखे हुए थे। क्लास के सामने क्यारियां बनी हुई थी, जिसमें पेड़ पौधे लगे हुए थे। टीचर का व्यवहार बहुत अच्छा था। उन्होंने बेझिझक अपना मोबाइल नंबर हमें दिया, और कहा कि कोई भी सवाल हो तो फोन कर हम से पूछना। और हां लड़की का खाता अवश्य खुलवा लेना, जिससे इसके स्कूल ड्रेस और किताबों के पैसे आएंगे। सचमुच दिल्ली के सरकारी स्कूल बहुत बदल गए हैं।

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