लालमोहन मुर्मू:

ସେ ଦିନ ଥିଲା ୧୨ ଜୁଲାଇ ୨୦୨୧ ସକାଳ ପ୍ରାୟ ୧୦ ଘଟିକା ସମୟରେ ଆମ୍ବପଲାସ ଗ୍ରାମର ଓଡ଼ିଆ ଲୋକ ମାନେ ୩୦ରୁ ୪୦ ଜଣ ହାତରେ ଟାଙ୍ଗିଆ, କଟୁରି ଧରି ଆଦିବାସୀ ବସ୍ତି ଜାମୁନାଲିକୁ ଆସିଥିଲେ। ସେମାନଙ୍କର ଆସିବାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ଯ ଥିଲା ଆଦିବାସୀ ମାନକଂର ଦଖଲ ଜମି ଛଡେଇବା ପାଇଁ ତେଣୁ ଆଦିବାସୀ ମାନକୁଂ ଧମକ ଚମକ କରି ସେମାନେ ଫେରିଥିଲେ। ଫେରିବା ସମୟରେ ଜାମୁନାଲି ଗାଁର ପପୁ ମିର୍ଧା ନାମକ ଆଦିବାସୀ ଲୋକ ଆମ୍ବପଲାସ ଗାଁ ଛକ ଦୋକାନକୁ ମୋବାଇଲ ମରାମତି କରିବା ପାଇଁ ଯାଇଥିଲା। ସେଠାରୁ ଆମ୍ବପଲାସ ଗାଁ ଲୋକମାନେ ଉଠେଇ ନେଇ ଗାଁ ଭିତରେ ଠେଙ୍ଗା ରେ ନିସ୍ତୁକ ମାଡମାରି  ଗୋଟିଏ ଗୋଡ ଭାଂଗି ଦେଇଥିଲେ। ଜାମୁନାଲି ଲୋକ ଏହି ଘଟଣା ଯାଣିବା ପରେ ମହିଳା ପୁରୁଷ ମିଶି କି ଯାଇ ପପୁ ମିର୍ଧା କୁ ଉଦ୍ଧାର କରି ଥାନାରେ ଏତଲା ଦେବାକୁ ଯାଉଥିବା ସମୟରେ ଆମ୍ବପଲାସ ଗାଁ ର ୫୦ ରୁ ୬୦ ଜଣ ଅଣ ଆଦିବାସୀମାନେ ବାହାରି ଆଦିବାସୀ ଲୋକମାନକଂ ଉପରେ ଆକ୍ରମଣ କଲେ। ଠେଙ୍ଗା ଓ ପଥର ର ଆକ୍ରମଣ ଶିକାର ହେଲେ ଆଦିବାସୀମାନେ। ଏଥିରେ ୧୧ ଜଣ ଆଦିବାସୀ କ୍ଷତବିକ୍ଷତ ହେଲେ। ଜଣେ ଗର୍ଭବତୀ ମହିଳା ଥିଲେ ତା ପେଟରେ ପଥର ଫିଙ୍ଗି ଗର୍ଭ ନଷ୍ଟ କରିଦେଲେ। ଏ ସବୁ ଘଟଣାକୁ ନେଇ ତା ୧୩.୦୭.୨୦୨୧ ରିଖ ଦିନ ପର୍ଜଂଗ ଥାନାକୁ ଯାଇ ୭ଜଣ କଂ ନାମରେ ଏତଲା ଦାଏର କରିଥିଲୁ। ଦିନକ
ଦିନକ ପରେ ଦୁଇଜଣ ଅଭିଯୁକ୍ତ ନଗେନ ସାହୁ ଓ ବିନୋଦ ବେହେରା କୁଂ ଗିରଫ କରି କୋର୍ଟ କୁ ଫରୱାର୍ଡ କରାଯାଇଥିଲା। ତା ପରେ ରାଜନୈତିକ ଦଲର ଚାପ ଫଲରେ ଅବଶିଷ୍ଟ ୫ଜଣ ଅଭିଯୁକ୍ତ ଫେରାରେ  ରହିଗଲେ ଗିରଫ କଲେ ନାହିଁ। ଏସ୍ ଡି ପିଓ ପୋଲିସ ଅଧିକାରୀ କୁଂ ସାଂଗେ ସାଂଗେ ବଦଲୀ କଲେ। ସଂଗଠନ ତରଫରୁ ଉପଜିଲ୍ଲାପାଳ କଂ କାର୍ଯାଳୟ ଠାରେ ରେଲି ଓ ଗଣଧାରଣା ତା ୧୭.୦୮.୨୦୨୧ ରିଖ ଦିନ କରାଯାଇଥିଲା। କିନ୍ତୁ ଫେରାର ଅଭିଯୁକ୍ତ ହାଇକୋର୍ଟ ରୁ ବେଲ ଆଣି ଖଲାସ ହୋଇଥିଲା। ବର୍ତ୍ତମାନ କେସ କୋର୍ଟରେ ରନିଂଗ ଅଛି।

ଲାଲମୋହନ ମୁର୍ମୁ

आदिवासी लोगों पर अत्याचार

उस दिन 12 जुलाई 2021 को सुबह करीब 10 बजे, ओड़ीशा के ढेंकनाल ज़िले के अंबापलास गांव के 30 से 40 उड़िया लोग, हाथों में तलवार, चाकू लेकर आदिवासी बस्ती जमुनाली आए। उनकी यात्रा का उद्देश्य आदिवासी लोगों के कब्जे वाली ज़मीन को खाली करवा कर स्वयं कब्जा करना था। वे आदिवासी लोगों को धमकी देकर वापिस लौट गये।

उसी समय जमुनाली गाँव का पापू मिर्धा नाम का एक आदिवासी व्यक्ति अपने मोबाइल फोन की मरम्मत के लिए अंबापलास गाँव के चौक पर गया था। वापिस जाते समय, अंबापलास के ग्रामीणों ने उसे उठाया और डंडे से पीटा, जिससे उसका पैर टूट गया।

जब जमुनाली के लोगों को घटना की जानकारी हुई तो महिला और पुरुष पापू मिर्धा को बचाने गए और थाने मे जा कर शिकायत दर्ज कराने गए। उस समय अंबापलास गांव के 50 से 60 गैर आदिवासियों ने बाहर आकर आदिवासियों पर हमला कर दिया। आदिवासियों पर लाठियों और पत्थरों से हमला किया गया। ग्यारह आदिवासी घायल हो गए। एक गर्भवती महिला के पेट पर पत्थर फेंका तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। बच्चे का क्रिया कर्म कर दिया गया। 13.08.2021 को हम परजंग थाने गए और सात लोगों के नाम पर शिकायत दर्ज कराई. 
एक दिन बाद, दो आरोपियों – नागेन साहू और बिनोद बेहरा को गिरफ्तार कर अदालत ले जाया गया। राजनीतिक दल के दबाव के कारण शेष पांच आरोपियों को गिरफ्तार नहीँ किया गया। वे लोग फरार हो गए। एस. डी. पी.ओ पुलिस अधिकारी  का तत्काल तबादला कर दिया गया। संगठन ने 19.08.2011 को उप जिलाधिकारी कार्यालय में एक रैली और जन रैली का आयोजन किया। लेकिन फरार आरोपी जमानत पर रिहा हो गए।  मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।
लाल मोहन

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  • लालमोहन, ओडिशा के ढेंकानाल ज़िले के रहने वाले हैं। वे अपने क्षेत्र में आदिवासी चेतना संगठन के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं और समाज को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।

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