एमलॉन तिर्की:

मैं इस वक्त मेरे गाँव खमारी मुंडा में हूं, मैं भी कोरोना महामारी के संक्रमण का शिकार हो चुका हूं। बीमारी के दौरान मैं घर में अलग रह रहा था, 17 दिन पूरे होने के बाद इस महीने की 12 तारीख को मैं कोरोना टेस्ट के लिए नज़दीकी अस्पताल में गया। मेरे कोरोना टेस्ट का रिज़ल्ट नेगेटिव आया। उसी दिन करीब 140 लोगों ने उसी जगह कोरोना टेस्ट करावाया और उसमें से करीब 110 लोग कोरोना से संक्रमित निकले। कोरोना संक्रमित लोगों ने टेस्ट के बाद डॉक्टर से दवाई लिखवाई और अलग से खड़ी एक बोलेरो गाड़ी (जो कोरोना के लिए अलग से दवाई लाई थी), से दवाई ले रहे थे। 

इससे ज़ाहिर तौर पर यह पता चलता है कि अब गाँव-गाँव में और गाँव के हर एक घर में कोरोना महामारी अपना पैर पसार चुकी है। हर घर में किसी को सर्दी, किसी को ज़ुकाम, किसी को बुखार और किसी को सरदर्द हो रहा है। लेकिन लोग कोरोना निकलने के डर से अस्पताल जाकर टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। कोरोना परीक्षा करवाने का एक डर यह भी है कि कोरोना पॉजिटिव आने से लोग उनके घर नहीं आएंगे और तुच्छ नज़र से देखेंगे। इसलिए बिना टेस्ट किए लोग खुद ही जड़ी-बूटी से अपना इलाज कर रहे हैं।

मैं जिस डॉक्टर से ऑनलाइन कंसल्ट कर रहा था उन्होंने कुछ रक्त परीक्षण (खून की जाँच) करने के लिए सुझाव दिए थे। जब मैंने इसके लिए अस्पताल में कहा तो उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि कोरोना के टेस्ट की वजह से अन्य रक्त परीक्षण स्थगित कर दिए गए हैं। और पूछने पर पता चला कि पिछले 2 हफ्तों से यह बंद हैं। लोगों से बात करके यह भी पता चला कि पिछले कुछ समय से केवल कोरोना का ही टेस्ट हो रहा है। 

करीब 6 पंचायतों के लिए किंजिरकेला में स्थित यह एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र है। पिछले साल गाँव-गाँव में कोरोना परीक्षा की मुहिम चल रही थी। पर इस साल गाँव में टेस्ट नहीं हो रहा है और स्थिति को लोगों के भरोसे पर ही छोड़ दिया गया है। गाँव में सर्दी-खांसी-ज़ुकाम तेजी से फैल रहा है। मुझे संदेह है कि यह कोरोना बीमारी के ही लक्षण हैं और इसके लिए अगर अभी कुछ अगर न किया गया तो आगे चलकर काफी परेशानियाँ हो सकती है। गाँव में तो अभी तक सरकारी अस्पतालों पर लोगों को भरोसा नहीं है। ऐसा इसलिए भी क्यूँकी इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले कई लोगों की भी मौत हो गई है। इस गलतफहमी को दूर करने के प्रयास बड़े स्तर पर किए जाने की ज़रूरत है, ताकि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र का लाभ लोगों को मिल सके।

एमलॉन द्वारा लिए गए गाँव के लोगों के इंटरव्यू

फीचर्ड फोटो आभार: द इंडियन एक्सप्रेस, डाउन टू अर्थ, जागरण

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  • एमलॉन, सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं और दिल्ली की संस्था श्रुति के साथ काम कर रहे हैं। 

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