ନୂଆ ଭାରତ ମାୟା (लौटा दो वो पुराना भारत)

ପ୍ରଫୁଲ୍ଲ କୁମାର ମିଶ୍ର (प्रफुल्ला मिश्रा):

ଫେରାଇ ଆଣ ସେ     ପୁରୁଣା ଭାରତ

       ନୁଆ ଭାରତରେ ନାହିଁ  ମନ,

ନୂଆ ପୁରୁଣାର           ଫରକ ବଢୁଛି

       ଇଏ କଣ ସେହି ହିନ୍ଦୁସ୍ଥାନ।

ଅଖଣ୍ଡ ଭାରତ          ଗଢି ଚନ୍ଦ୍ରଗୁପ୍ତ

      ମନେ ଭରିଦେଇଥିଲେ ସୌର୍ଯ୍ୟ

ବିବେକାନନ୍ଦଙ୍କ         ନିର୍ଭୀକ ସଂସ୍କାର 

       ଦିଏ ସମାଜ ଦର୍ଶନ ମାର୍ଗ।

କେତେ ବୀର ବୀରା     ବିଦ୍ୱାନ ସଂସ୍କାରି 

    କୋଳରେ ଜନ୍ମିଛନ୍ତି ସନ୍ତାନ,

ଭାରତ ଗରିମା        ଭାସ୍କର୍ଯ୍ୟ ମଣ୍ଡିତ

     କରି ଦେଇଛନ୍ତି ବଳିଦାନ।

ବିବିଧତା ସ୍ରୋତେ      ସଂହତି ସ୍ଥାପନା

      ବିଶ୍ୱବ୍ୟାପୀ ଦିଏ ବାରତା

ଜୀବନ ଜିଇଁବା          ଧର୍ମ ଉପାସନା

       ଅଛି ଅଭିବ୍ୟକ୍ତି ସ୍ୱାଧୀନତା।

ସଂବିଧାନ ଗ୍ରନ୍ଥେ         ବିଧାନ ରଚିଲେ

        ବାବା ସାହେବ୍ ଆମ୍ବେଦକର,

ମର୍ଯ୍ୟାଦାର ସହ         ଜୀବନ ଧାରଣ

        ସଭିଙ୍କ ମୌଳିକ ଅଧିକାର।

ଜାତି ଧର୍ମ ବର୍ଣ୍ଣ          ହୋଇ ମଧ୍ୟ ଭିନ୍ନ

        ଗର୍ବେ କହିଥାନ୍ତି ଭାରତୀୟ,

ଜାତୀୟ ସୌରଭ        ତ୍ରିରଙ୍ଗା ଗୌରବ

         ଏକ ଦେଶ ଅଟେ ପରିଚୟ।

ଦେଶ ଆଗଉଛି         ବିକାଶ ହେଉଛି

         ଦିନୁଦିନ ନୁଆ ଭାରତରେ

ଧନୀପତି ଧନ           ବଢ଼ି ବଢ଼ି ଯାଏ

         ଶ୍ରମିକ ମୂଲିଆ ଅର୍ଦ୍ଧାହାରେ।

ପବ୍ଲିକ ସେକ୍ଟର          ଘରୋଇକରଣ

        ଶିକ୍ଷିତ ବେକାରୀ ହାତ ଜାମ

ଶାସକ କହୁଛି            ବେପାର କରିବା

        ନୁହଁଇ ସରକାରର କାମ।

ଶାସକ ଦଳର            ଦୋଷ ତୃଟି ଲାଗି

        ବିରୋଧୀଙ୍କୁ ପଚାରେ ମିଡ଼ିଆ,

ନ୍ୟାୟାଳୟ ଦିଏ          ଦୋଷୀକୁ ପ୍ରସ୍ତାବ 

        ଧର୍ଷିତାକୁ ହେବାପାଇଁ ବାହା।

 ଶୁଖିଲା ଭାଷଣ           ଦରଦାମ୍ ବୃଦ୍ଧି

         ଯୁଆଡ଼େ ଚାହିଁବ ଘୋଟାଲା,

ନୂଆଭାରତରେ            ଜନ ସାଧାରଣ

         ଟ୍ୟାକ୍ସ ବୋଝରେ ଘାଇଲା।

ଆତ୍ମ ନିର୍ଭରର            ଛଦ୍ମବେଶ ତଳେ

         ବଢେ ବ୍ୟୟ ଅଟକଳ କାୟା,

ପ୍ରତିଶୃତି ଦେଇ           ଆଇନା ଦେଖାଇ

        ରଚ ନୂଆ ଭାରତର ମାୟା।

            ପ୍ରଫୁଲ୍ଲ କୁମାର ମିଶ୍ର

हिन्दी अनुवाद:

लौटा दो वो पुराना भारत,

नए भारत में नहीं है मन।

नया – पुराना का बढ़ रहा फर्क,

ये क्या वही हिंदुस्तान है।

अखंड भारत जीत कर चंद्रगुप्त,

हमारे मन में लाया था शौर्य।

विवेकानंद का निडर संस्कार,

समाज को देता है मार्ग दर्शन।

कितने ही वीर, महापुरुष, विद्वान,

जैसी संताने जन्मी हैं इसकी कोख में।

भारत की गरिमा भास्कर मंडित किए,

दे कर कई बलिदान।

विविधता के पश्चात संहति का स्थापना,

पूरे विश्व को देता है ये पैगाम।

जीवन जीने की, धर्म उपासना की,

है स्वाधीनता अभिव्यक्ति की।

संविधान ग्रंथ में, विधान रचे,

बाबा साहेब अंबेडकर।

मर्यादा के साथ जीवन जीने का,

सबका है मौलिक अधिकार।

शासक दल की गलतियों के लिए,

विरोधी दल को पूछे मीडिया।

न्यायालय देता दोषी को प्रस्ताव,

बलात्कार पीड़िता से करने को ब्याह।

झूठे भाषण की हुई ज़बरदस्त वृद्धि,

जिधर भी देखो घोटाला।

नया भारत में जनमानस है,

टैक्स बोझ से घायल,

आत्मनिर्भर के छद्म भेष के नीचे।

Author

  • प्रफुल्ला, ओडिशा के नयागढ़ ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह संचार संगठन के साथ जुड़कर वहां के आदिवासियों के बीच स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

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