कैलाश भारती; गया, बिहार

बिहार के गया ज़िले के 5 ब्लॉक में भूमि अधिकार, वन अधिकार और दलित समुदाय के मुद्दों पर संघर्षरत मज़दूर किसान समिति के प्रमुख कैलाश भारती से 30 अप्रैल 2021 को टेलीफोन पर हुई बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट लिखी गयी है। 

इस बार की स्थिति पिछले साल से काफी अलग है, तब के लॉकडाउन में सब कुछ बंद हो गया था, लोगों को खाने-पीने की दिक्कतें हो रही रही थी, उसके अनुसार ही हमने बड़े स्तर पर अपने क्षेत्र में राहत पहुंचाने का काम किया। लोग तब भी डरे हुए थे लेकिन कोरोना बीमारी से किसी की जान नहीं गई थी। इस बार हालात पिछले साल के मुक़ाबले बहुत खराब हैं, लेकिन सड़क पर तो ट्रैफिक चल रहा है! आंशिक लॉकडाउन लगा है इस बार, कुछ दुकानें भी चल रही हैं। गया और बोधगया शहर से काफी सारे कोरोना के मामले सुनने में आ रहे हैं। 

हमारे क्षेत्र में अभी काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, संगठन के कार्यक्षेत्र के 5 ब्लॉक मोहनपुर, बराहचट्टी, फ़तेहपुर, डोभी और टेनकुप्पा के करीब 20 से 25 गांवों से यह खबर आ रही है कि बड़े पैमाने पर लोगों को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत हो रही है। मुझे भी कल रात से बुखार है और बदन दर्द भी हो रहा है, आज डॉक्टर से दवा ली है तो बुखार टूट गया है लेकिन सर्दी अभी भी है। अब क्या पता कि कोरोना है या मौसमी बुखार? कैसे पता चलेगा? टेस्ट करवाने की सुविधा गया में ही है जो हमारे गाँव रामपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर है। दो कमरों का हमारा घर है, रहने वाले 5 लोग हैं, खुद को अलग कैसे रखें? बहुत से लोगों का तो बस एक कमरे का घर है और 5 से 10 लोगों का परिवार तो होता ही है। 

(स्वास्थ्य सुविधाओं और पल्स ऑक्सीमीटर की उपलब्धता और वैक्सीन के बारे में पूछने पर)

आशा (एएनएम स्वास्थ्य कर्मी) का तो पता नहीं, कोई गाँव में दिख ही नहीं रहा है, इलाके के ज़्यादातर गाँव में यही स्थिति है। वो मशीन (पल्स-ऑक्सीमीटर) इधर कहीं नहीं देखा हमने, कभी दवा दुकान पे जाएंगे तो पूछेंगे। महंगा सामान कौन खरीदेगा इधर, इसलिए कोई रखता भी नहीं होगा? देखिये ब्लॉक के हस्पताल में डॉक्टर तो हैं नहीं, नर्स-कम्पाउंडर होता है बस, मोहनपुर, फ़तेहपुर और टेनकुप्पा 3 ब्लॉक का तो हमें ही पता है। जिला अस्पताल यहाँ के गाँवों से 30 से 50 किलोमीटर दूर है, बहुत से गाँव में हाइवे पे आने के लिए ही 10-10 किलोमीटर चलना पड़ना है। सबके पास तो अपना गाड़ी-घोड़ा नहीं है ना। फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी इंतजाम ठीक नहीं है। जब ज़्यादा तबियत बिगड़ जाता है तो लोग जाते हैं, 3000-5000 खर्च कर के। 

गाँव तरफ टीका कोई नहीं लगवा रहा है, बहुत तरफ से खबर आ रही है कि टीका ले के लोग मर रहा है। हम इसे लेकर गाँव में लोगों से बात करेंगे, लेकिन लोग बहुत डरा हुआ है इस बार, पिछले साल से ज़्यादा। अभी तो परदेसिया लोग घर नहीं आया है ज़्यादा इस बार, जब आएगा तो स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है और इस बार तो उन लोगों के लिए कोई क्वारंटाइन सेंटर जैसा भी प्रबंध नहीं है। लोगों में कोरोना का जांच कराने को लेकर भी बहुत डर है, लोग कहते हैं कि बीमारी पॉज़िटिव निकला तो पुलिस पकड़ के ले जाएगी। अभी शादी-ब्याह का सीजन भी चल रहा है, एक अच्छी बात ये है कि लोग इनमें कम संख्या में जा रहे हैं और मास्क भी लगा रहे हैं। 

संगठन के लोग लगातार गाँव के लोगों के संपर्क में हैं, हम पीडीएस पर नज़र रख रहे हैं ताकि पिछली बार की तरह लोगों को खाना-राशन की तकलीफ न हो। कोरोना बीमारी से बचने के लिए ज़रूरी सावधानियों के बारे में भी हम लोगों को जानकारी देंगे, साथ ही वैक्सीन को लेकर फैल रही गलत जानकारी को लेकर भी हम लोगों को आगाह करने का काम भी करेंगे।

महेश हेंब्रम; बांका, बिहार:

जिंदाबाद साथियों! मैं अच्छा हूं और आशा करता हूँ कि आप लोग भी अच्छे से होंगे। मैं आदिवासी किसान मज़दूर मुक्ति वाहिनी से महेश हेंब्रम। हमारे क्षेत्र में सर्दी, खांसी और बुखार लगभग हर गाँव में हो रहा है। लेकिन गाँव के डॉक्टर से ही इलाज लंबे समय तक कराने से लोग ठीक हो जा रहे हैं और परहेज़ भी ठीक से कर रहे हैं। अस्पताल जाना सबके लिए संभव नहीं है, और वहाँ के हालत पहले से भी बुरे हैं। बीमारी से बचाव का क्या उपाय है, अब यह खुद ही सोचना पड़ेगा। शायद मानसिक और शारीरिक अभ्यास से हमारा शरीर और फेफड़े मज़बूत हो सकते हैं। इसके लिए ये सब करने का प्रयास करिए-

  • सुबह का नाश्ता आठ बजे तक
  • गरम पानी पीना
  • तेल मसाला का सेवन कम करना
  • खट्टा-मीठा कम खाना
  • पानी अधिक से अधिक पीना
  • बड़ा स्क्रीन वाला मोबाइल (स्मार्टफोन) का इस्तेमाल कम करना
  • साग-सब्ज़ी का सेवन अधिक करें
  • अपना पेट साफ रखें

रोग के समय अपना खयाल रखना ज़रूरी है। समय की ज़रूरत है कि आप और आपका परिवार अपना खयाल रखें।

फीचर्ड फोटो आभार: फ्लिकर (यह फोटो प्रतीकात्मक है)

Authors

  • कैलाश भारती / Kailash Bharti

    कैलाश भारती, बिहार के गया ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। अपने क्षेत्र के संगठन- मज़दूर किसान समिति के साथ मिलकर अपने समुदाय के हक़-अधिकारों के लिए काम करते हैं।

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  • महेश, बिहार के बांका ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। अपने क्षेत्र के संगठन- आदिवासी मजदूर किसान मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर अपने समुदाय के लिए काम करते हैं।

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