खेती के प्रति युवाओं की सोच

दीवान डुडवे: 

हमारा देश कृषि प्रधान है और कृषि हम भारतीयों के लिए रोज़गार का सबसे बड़ा साधन है। मौजूदा दौर में युवा शिक्षित हो गए हैं, वे जानने लगे हैं कि वर्तमान व्यवस्था में उनकी क्या अवस्था है? तथा उनकी क्या आवश्यकता है? इस व्यवस्था, अवस्था तथा आवश्यकता पर विचार करने पर पता चलता है कि वर्तमान व्यवस्था में उनके साथ पक्षतापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। इसी कारण आज के युवा खेती के कार्य को चुनना नहीं चाहते हैं। इसके पीछे कुछ और कारण हैं। आज का युवा समझ गया है कि हर कोई अपनी वस्तु की कीमत का न्यूनतम मूल्य तय करने का अधिकार रखता है, लेकिन किसानों को अपनी उत्पादक वस्तुओं की कीमत तय करने का अधिकार नहीं है, ऐसा क्यों? मेरा मानना है कि खेती की ओर युवाओं का रुख कम होने का यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है। 

वर्तमान का शिक्षित युवा यह भी जानता है कि पूर्व की सरकार हो या वर्तमान की सरकार हो, उसने सभी किसानों की उत्पादित वस्तुओं के न्यूनतम मूल्य देने में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है। आंकड़ों के आधार पर कहा जाए तो देश में केवल 5 से 6 प्रतिशत किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल पाता है। 

वर्तमान में खेती का कार्य अधिक खर्चीला होता जा रहा है साथ में उत्पादन भी कम हो रहा है, जिससे युवाओं का मन खेती से हटकर अन्य व्यवसाय या नौकरी की तरफ जा रहा है। 

इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि सरकार की किसानों के प्रति नकारात्मक भावनाएँ, अपेक्षित उत्पादन का न होना, महंगाई के कारण खेती में उपयोग की जाने वाली सामग्री का भाव बढ़ जाना आदि कारणों से युवा वर्ग खेती की ओर से ध्यान हटाकर अन्य व्यवसायों की ओर बढ़ रहा है। 

Author

  • ग्राम देवली, जिला-बड़वानी, मध्यप्रदेश के रहने वाले दीवान डुडवे बिरसा ब्रिगेड व आदिवासी छात्र संगठन से जुड़े हैं और वर्तमान में एल.एल.बी. की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

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