अजय कनोजे:

किसान, बेहद मेहनतकश और अपने काम के प्रति ईमानदार होता है, यह आप सभी जानते हैं। ठंड की चादर ओढ़कर, फटी एड़ियों को देखकर, कर्ज की मार से और बारिश की धार, महंगाई के विकराल रूप तथा उचित दाम न मिलने से किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, बिहार तथा समूचे देश के किसानों की हालत एक जैसी दयनीय व भयावह है। किसानों को उचित व निश्चित दाम मिलता ही नहीं है, यह एक हकीकत है। 

हर वर्ष की तरह किसान पर बोझ होता है, मजबूरी में, कम दाम में फसल को बेचना पड़ता है, जिसका पूरा फायदा उठाते हुए बिचौलिया अर्थात व्यापारी कम दाम में फसल खरीदकर बाज़ार में दोगुनी कीमत पर बेचकर मोटी कमाई कर जाता है। सही मायने में वास्तविकता तो यह है कि फसल के निकलते समय किसानों से खरीददारी करके, बिना मेहनत के ही किसानों से अधिक कमाई तो बिचौलिया कर लेता है। 

जिनके पास खेत है, किसानों का परिवार पूरा उसी खेती पर निर्भर होता है उसका आर्थिक और पालन-पोषण का आधार सिर्फ कृषि होता है, किसान सदियों से लेकर आज तक अत्यधिक आत्मनिर्भर है। आज़ादी के इतने सालों के बाद भी सरकार, किसानों के विकास नाम पर दफ्तरों और कागजों में ही विकास करती है, ज़मीन पर मदद न पहुँचने के कारण किसान की स्थिति ज्यों की त्यों है। 

इन सारी परिस्थितियों को भांपते हुए युवा कृषि छोड़ सरकारी नौकरी की तरफ रुख कर रहा है, निःस्वार्थ मेहनत से अपेक्षित मजबूती न मिलने के कारण किसानी छोड़ अन्य रोज़गार की तरफ प्रस्थान कर रहा है। पिता, दादा तथा अपने पुरखों की परिस्थितियों को देखते हुए पढ़ा-लिखा “युवा” कृषि को जोखिमों की चरम सीमा मानने लगा है। अनपढ़ युवा तो मजबूरन कृषि कर रहा है या अन्य राज्यों में पलायन करके सस्ती और जान पर खेलकर मज़दूरी कर रहा है। पढ़े-लिखे युवा हताश होकर कृषि नहीं करना चाहते। अच्छी कमाई की चाहत में सदियों से थका-हारा युवा खेती से दूर हो रहा है।

Author

  • अजय, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह वहाँ के स्थानीय मुद्दों और छात्र मुद्दों पर जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) के साथ जुड़ कर काम कर रहे हैं।

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3 responses to “आत्मनिर्भता की “थकान” से खेती से दूरी नाप रहा है आज का युवा”

  1. चतर सिंहः जमरे Avatar
    चतर सिंहः जमरे

    आपकी बातों में पूणतः सच्चाई है
    लेकिन सच्चाई यही हैं कि सरकार कभी नहीं सुनना चाहती
    क्योंकि
    उसको तो पूंजीपतियो की पेटी जो भरना हैं सरकार को सिर्फ चुनाव के समय
    निचले वर्ग के लोगो से कुछ पैसा ओर शराब का लालच देकर वोट लेना आता हैं

    1. Ritesh Dawar Avatar
      Ritesh Dawar

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  2. Sean Nicolson Avatar

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