गुरु ने दिया चेले को असल जीवन का ज्ञान (कहानी)

महेश हेंब्रम:

पुराने जमाने में जब स्कूल नहीं थे तो वन में कुटिया बनाकर गुरु ज्ञान होता था। एक बार 15 लड़के गुरु ज्ञान लेने के लिए जंगल में एक गुरु के पास गए। उनका 6 महीने का कोर्स पूरा होने के बाद गुरु ने कहा कि आप लोग घर जा सकते हैं तो उनमें से एक लड़का बोला कि मैं यहीं रहकर आपकी सेवा करना चाहता हूँ। गुरु ने जवाब दिया कि ठीक है बेटा तुम यहाँ रह सकते हो। इसके बाद वह एक लड़का गुरु की कुटिया में रहने लगा और बाकी सब अपने-अपने घर चले गए। 

अब वह लड़का गुरु के लिए जंगल से लकड़ियाँ लाने लगा, उनके लिए खाना बनाने लगा और उनकी सेवा करने लगा। एक दिन जब वह लड़का जंगल में लकड़ियाँ काट रहा था तो वहीं से बहुत से लोग कहीं जा रहे थे। लड़के ने यनसे पूछा कि आप लोग कहाँ जा रहे हैं? उन्होने जवाब दिया कि हम लोग गंगा नहाने जा रहे हैं। लड़के ने उनसे फिर पूछा कि उससे क्या होगा? जवाब मिला कि गंगा में नहाने से शुद्ध हो जाते हैं और सारे पाप धुल जाते हैं। यह सुनकर लड़का लकड़ियाँ ले कर गुरु की कुटिया में आया और गुरु से बोला कि मैं गंगा नहाने जा रहा हूँ। यह सुनकर गुरु बोले कि काम पूरा कर लो फिर चले जाना। लेकिन लड़का नहीं माना और बोला कि गंगा में नहाने से शुद्ध हो जाते हैं मैं तो अभी जाऊंगा। यह सुनकर गुरु बोले कि ठीक है जाओ लेकिन पहले मैं तुम्हें आज एक ऐसा मंत्र सिखाऊँगा जो मैंने ना तो पहले किसी को सिखाया है, ना ही किसी को नहीं आता है। गुरु ने लड़के को ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का मंत्र सिखाया और गंगा नहाने जाने की आज्ञा दे दी। 

जब लड़का गंगा के किनारे पहुंचा तो उसने देखा कि वहाँ चारों दिशाओं से आए बहुत सारे लोग नहा रहे हैं, भजन-कीर्तन कर रहे हैं और ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का जाप कर रहे हैं। इस मंत्र का जाप करते हुए लोगों को देखकर लड़के को बहुत गुस्सा आया और वह सोचने लगा कि गुरु ने उससे झूठ बोला है, अगर उन्होने यह मंत्र किसी को नहीं सिखाया तो इतने सारे लोगों ने यह कहाँ से सीखा? फिर लड़के ने जल्दी से स्नान किया और गुरु की कुटिया में लौट आया, लौटने के बाद वह गुरु से बोला कि मैं अपने घर जा रहा हूँ क्यूंकी आपने मुझसे झूठ कहा कि वह मंत्र आपने किसी और को नहीं सिखाया। यह सुनकर गुरु बोले कि ठीक है, तुम अपने घर जा सकते हो लेकिन जाने से पहले मेरा एक काम करते जाओ। गुरु ने लड़के को एक पत्थर दिया और कहा कि इसे बाज़ार लेकर जाओ और इसका दाम पता कर के आओ, लेकिन इसे बेचना नहीं है। साथ ही जब दाम पता करने जाओगे तो सबसे छोटी दुकान में सबसे पहले जाना, फिर उससे बड़ी दुकान में जाना और फिर सबसे बड़ी दुकान में जाना। 

गुरु की सारी बातें सुनने के बाद लड़का पत्थर लेकर बाज़ार चला गया। बाज़ार में सबसे पहले उसे एक बूढ़ी माँ साग बेचते हुए दिखी तो उसने सोचा कि यही सबसे छोटी दुकान होगी। वह उसके पास गया और पत्थर दिखाते हुए बोला, दादी माँ इस पत्थर का क्या दाम दोगी? पत्थर को देखकर बूढ़ी माँ ने सोचा इसे तुलसी गाछ के पास रख दूँगी तो अच्छा लगेगा, फिर दादी माँ बोली बेटा 2 मुट्ठी साग इसके बदले दे दूँगी। यह सुनकर लड़का आगे बढ़ गया और एक कपड़े की दुकान पर गया और दुकानदार को पत्थर का दाम बताने को कहा। दुकानदार ने पत्थर देखकर सोचा कि इसे दुकान में सजाकर रखूँगा तो अच्छा दिखेगा, वह बोला कि इसके बदले में 2 कपड़ों का सेट ले लो, यह सुनकर लड़का फिर आगे बढ़ गया। अगली दुकान सुनार की थी, सुनार ने जब पत्थर देखा तो वह तुरंत बोला कि पत्थर के बदले मेरा सामान, दुकान, घर सब ले लो। यह सुनने के बाद लड़का गुरु की कुटिया में वापस आ गया।

गुरु ने उससे पत्थर का दाम पूछा तो लड़के ने बताया कि, बूढ़ी माँ ने पत्थर का दाम 2 मुट्ठी साग लगाया, कपड़े वाले ने 2 सेट कपड़ा और सुनार ने उसकी सारी संपत्ति। लेकिन मैं समझ गया हूँ कि यह पत्थर नहीं हीरा है और सुनार ने इसे पहचान लिया था।

फीचर्ड फोटो आभार: यूट्यूब

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  • महेश, बिहार के बांका ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। अपने क्षेत्र के संगठन- आदिवासी मजदूर किसान मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर अपने समुदाय के लिए काम करते हैं।

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