जसिंता केरकेट्टा:

हम नहीं जानते थे कैसी होती है कोई सरकार
जन्म लेते और होश संभालते ही हमने देखा सिर्फ़ जंगल और पहाड़
हमें बताओ साहब, कैसी होती है सरकार?

जंगल-पहाड़ हमें साफ़ पानी, साफ़ हवा पोषण भरा भोजन देते हैं
स्त्रियों को बेख़ौफ़ जंगल में घूमने की आज़ादी देते हैं
पुरुषों को स्त्रियों की तरह थोड़ा लजाना सिखाते हैं

गाँव के भीतर डर शब्द भी घुसने से पहले थोड़ा डर जाता है
और आदमी नहीं जानता है क्या होता है आदमी से डरना
पहाड़ सिखाता है हमें प्यार में डूबकर जीना और ज़रूरत पड़ने पर इस प्रेम के लिए मर जाना

क्या तुम्हारा समय, तुम्हारा समाज, तुम्हारी सरकार
सिखा सकते है हमें ऐसा कुछ करना?
क्या हमारे लिए तुम्हारी सरकार बचा सकती है जंगल-पहाड़?

एक दिन हमने सोचा चलो कुछ नहीं तो सरकार से एक अस्पताल माँगकर देखते हैं
हम जंगल के भीतर एक अदद अस्पताल माँगते रहे
पर हमारे बच्चे उसके इंतज़ार में मरते रहे

हमने कहा कोई स्कूल ही दे दो फिर
पर ऐसी भाषा में दो शिक्षा कि बच्चे पढ़कर पहाड़ न छोड़ने लगें
यह सुनते ही उनके बचे-खुचे स्कूल भी दम तोड़ने लगे

फिर एक दिन सरकार सड़क का प्रस्ताव लेकर आई
हमने कहा पाँच फुट से ज्य़ादा चौड़ी सड़क
नहीं चाहिए जंगल को, वह पचास फुट सड़क जबरन देना चाहती थी

हमने शर्त रखी तुम्हारे साथ आई पुलिस, कंपनी, दलालों की फ़ौज पर पहले
जंगल में घुसने की पाबंदी लगा दो
फिर चाहो तो यहाँ चौड़ी सड़क बना दो

यह सुनकर उसने क्या किया?
माओवादी, विकास विरोधी कहकर गाँव के गाँव जेल में डाल दिया
मारा, पीटा उँगलियाँ तोड़ दी हमारी और सफ़ेद काग़ज़ पर अँगूठा लगवाया

रातभर इन पहाड़ों ने सुनी हमारी चित्कार, तो ऐसी है साहब! तुम्हारी सरकार
यह जंगल-पहाड़ ही हमारे हक़ में हमारी तरफ़ सदियों से खड़े हैं
जिसके लिए हमारे पुरखे दुश्मनों से हर काल में लड़े हैं

हम भी इनके लिए हर हाल में लड़ेंगे यह जीवन भी तो इन्हीं ने दिया है
इसलिए पीढ़ी दर पीढ़ी हमने इन पहाड़ों से बेइंतहा प्रेम किया है

© जसिंता केरकेट्टा (पुरानी कविता। यह राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित होने वाले तीसरे कविता संग्रह ” ईश्वर और बाज़ार” का हिस्सा है)

फीचर्ड फोटो आभार: जेसिन्ता केरकेट्टा की फेसबुक वॉल से

जेसिन्ता की अन्य कविताएं आप उनकी फेसबुक वॉल पर जाकर पढ़ सकते हैं।

Author

  • जसिंता केरकेट्टा एक आदिवासी स्वतंत्र पत्रकार और कवि हैं। रांची, झारखंड  की रहने वाली हैं और वह कुरुख / उरांव समुदाय से हैं। कई विदेशी भाषाओं में इनकी कविताओं का अनुवाद किया जा चुका है।

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One response to “पहाड़ और सरकार – एक कविता”

  1. Raghunath Rana Avatar
    Raghunath Rana

    Zindabad sathiyon

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