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कैसे खत्म कर दिए गए लैटिन अमेरिका के मूलनिवासी

सिद्धार्थ: 9 अगस्त को भारत सहित दुनिया भर में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। लेकिन आदिवासी हैं कौन? ट्राईबल, इंडिजीनियस, मूलनिवासी, अनुसूचित जनजाति और वनवासी जैसे कई शब्द हमने आदिवासी समुदायों के लिए प्रयोग होते हुए देखे, सुने और पढ़े होंगे। एक आम अवधारणा यह है कि जो लोग किसी भूखंड (क्षेत्र या देश) में

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हम आदिवासी, हमारा समाज और हमारी परम्पराएँ

देवानंद बोयपई: आदिवासी शब्द को तोड़कर देखें तो, आदि+वासी – यानि जल जंगल और ज़मीन पर आदि काल से निवास करने वाले विशेष समुदाय। इनका प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षपूर्ण था, खाद्य संग्रह, आखेट और कंद-मूल से इन्होने अपना जीवन-यापन शुरू किया। आज भी आदिवासियों की यह विशिष्ट पहचान और इसके उदाहरण देखने को मिल जाते

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कैसे मनाया गया देशभर में विश्व आदिवासी दिवस: फोटोस्टोरी

युवानिया डेस्क: ओड़िशा आदिवासी चेतना संगठन द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत किया गया एक गीत आदिवासी चेतना संगठन द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत किया गया संथाली नृत्य: मलयगिरी आदिवासी संघर्ष मंच द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत हो समुदाय का नृत्य: मल्यागिरी आदिवासी संघर्ष मंच द्वारा आयोजित

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आदिम संताल – संथाली कविता

पतिचरण मुर्मू: आदिवासी संताड़ सामाज कहानी।आबो संताड़ को ताहेंकाना राजा, रानी ।।ताहेंकाना को किसकू समाज।दिशोमरे ताहेंकाना अनकुवाः राज।।ताहेंकाना आबोवाः चाईगाड़।ताहेंकाना आबोवाः चाम्पागाड़।।आबोवाः गे ताहेंकाना कश्मीर।ओनागे ताहेंकाना काशीबीर।।सेदाय ताहेंकाना होड़ रापाः ।ओनागे नितो हड़प्पा।। आबोवाः संताड़सोमाज हाहाड़ागेया।ना:ह कोड़ा पे हिडीञ केद दोया।।श्राबोवाः सोमाज मेनाआ, घोरोम मेनाआआबो संताड़ ओल मेनाआः रोड मेनाआ देला बों लोगोनोआआदो बाबोन तायोमोआआसे

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गुनाईन ननोत: कुड़ुख़ कविता

कोर्दुला कुजूर: विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष कविता कुड़ुख़ भाषा में इन्ना एन्देर उल्ला  इन्ना एन्देर उल्ला सोहन बरा पाड़ोत बेचोत बरे नालोत तोकोत खुसमार’ओत भला – २ इन्ना नाम ओरमत ही  परब उल्ला ताली सोहान – २ बरा पाड़ोत बेचोत बरे नालोत तोकोत खुसमार’ओत भला – २ इन्ना नमहय माझीनू कोहां खुसी ओन्दरा सोहान

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मुंडा आदिवासी समुदाय का संछिप्त परिचय

सलोमी एक्का: मुंडा (या मुण्डा) जनजाति मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, बंगाल, और अंडमान में निवास करती है। संथाल, हो और खड़िया की तरह ही आस्ट्रो-एशियाटिक या ऑस्ट्रिक या आग्नेय भाषा परिवार में मुंडा, एक वर्ग है। मानव सभ्यता संस्कृति के विकास का सबसे प्रमुख आधार भाषा ही है। समुदाय के साथ

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“इसे हम खाते हैं और इसी में सांस लेते हैं, यह धूल हमें मार डालेगी”: यूपी के महोबा में खनन का सच

शैलेन्द्र राजपूत: उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले के कबरई क्षेत्र में पत्थर खनन से हज़ारों की मौत पर सरकारों ने चुप्पी साध रखी है। मैं इसी इलाके के एक गाँव मकरबई का रहने वाला हूं। मेरे गाँव में बहुत सारे पहाड़ थे पर ज़्यादातर तोड़ दिए गए खनन द्वारा। मेरे गाँव में एक सड़क भी

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सहोदय संस्था की पहल याद दिला रही हैं पुरखों की विरासत

अनिल, रेखा और सहोदय के बच्चे: वर्तमान में सहोदय में 22 बच्चे, और पांच व्यस्क रह रहे हैं। कल (07 जुलाई 2022) हमारा एक और सपना पुरा हुआ। कल डंगरा गाँव के साप्ताहिक सब्ज़ी बाज़ार में हम अपने यहाँ के और कुछ दक्षिण भारत और महाराष्ट्र की यात्रा के दौरान एकत्रित किए देशी सब्जी, फूल

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धान रोपाई के समय गाये जाने वाले क्षेत्रीय लोकगीत

युवानिया डेस्क: देश-भर में मानसून दस्तक दे चुकी है, और हर क्षेत्र में खेती का काम अपने चरम पर है। पेश है एक झलक देश भर के अलग-अलग क्षेत्र में धान रोपणी के समय गाये जाने वाले लोकगीत – ओडिशा के बलांगीर क्षेत्र में गाये जाने वाला गीत – महाराष्ट्र में गाये जाने वाला गीत

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