Home

सेंधवा, म.प्र. की एक आदिवासी महिला मज़दूर की गाथा

शांता आर्य: जैसे ही खेतों में काम कम हो जाता है सुरमी बाई सोचने लगती है कि अब क्या काम करूँ? सेंधवा में कपास की जिनिंग (कपास के बीज और रेशे को अलग करने की प्रक्रिया) होती है, जहां काम मिल जाता है। सुरमी बाई, सेंधवा की जिनिंग फैक्ट्री में रात 8 बजे से सुबह

Continue reading

दलित आदिवासी मंच: लोगों का संगठन, लोगों के लिए

तेजस्विता: (04 नवंबर 2020) दोपहर बाद श्रुति टीम (तेजस्विता, एमलॉन और सिद्धार्थ), राजिम दीदी, देवेन्द्र भाई और ट्रेनर कुमुद दीदी, दलदली गाँव में महिला ट्रेनिंग मीटिंग के लिए निकल पड़े थे। ट्रेनिंग के लिए ले जाई जा रही सामग्री को देखकर मेरे अंदर भी ऐसी ट्रेनिंग में भाग लेने और सीखने की एक उत्सुकता थी।

Continue reading

ଜଲ ଜଂଗଲ ଜମୀନ୍ ଆମର ମାଁ ବୁଆ | जल, जंगल, ज़मीन हैं मां बाप हमारे

ଲୋଚନ ବରିହା (लोचन बरिहा): ଜଲ ଜଂଗଲ ଜମୀନ୍ ମାଁ ବୁଆ ରେ ଆମେ ଇ ମାଟିର ଛୁଆ ଜଂଗଲ ହେଉଛେ ଆମ୍ କେ ସାହାରେ ଆମେ ଇ ମାଟିର ଛୁଆ।।  ରାଜୁତି କାଲରେ ସେଟେଲମେଣ୍ଟ ବେଲ ରେ ଗାଁ କେ ଲେଖ୍ ଲୁ ଜଂଗଲ ସେ ଦିନୁ ରହିଛୁଁ କେତେକେ ସହିଛୁଁ ଆମର କେତେ କଲବଲ ତୁଇତ୍ କରିଛୁ କେତେ ଅନିଆଁ ରେ ସରକାର ଟିକେ ସୁନିଆଁ।।  ଜଂଗଲେ ରହିଛୁଁ ଜଂଗଲେ ଜିଇଁଛୁ ରେ ଜଂଗଲେ

Continue reading

अनायास: जेल तो यातनाओं का सफर है

अरविंद अंजुम: “मैंने मुख्य दारोगा से कहा कि मेरे बाल और मूंछ कटवा दीजिए। उसने कहा, गवर्नर ने सख्ती से मना किया है। मैंने कहा- मुझे मालूम है कि गवर्नर मुझे बाध्य नहीं कर सकते, परंतु मैं तो अपनी मर्जी से बाल कटवाना चाहता हूं। उसने कहा, गवर्नर से अर्ज करो। दूसरे दिन गवर्नर ने

Continue reading

THE ZION will be a mirage (स्वर्ग की कामना बस छलावा)

Mary Rajnee Toppo (मेरी रजनी टोप्पो): Now THE JUNGLE is black, ashy and dark, so is the human heart Red roads, red waters, the proof of the rape of nature River beds are thirsty, paddy fields are barren Trucks are the Rapists, leave the forest bleed Only the bright red flower gulping the green Who

Continue reading

हसदेव बचाओ पदयात्रा: जंगल बचाने के लिए गाँधीवादी सत्याग्रह

मोहन:  जल-जंगल-ज़मीन बचाने के लिए हसदेव बचाओ पदयात्रा की शुरुआत 4 अक्टूबर को हसदेव अरण्य क्षेत्र के मदनपुर गाँव के उस स्थान से हुई, जहाँ साल 2015 में राहुल गाँधी ने हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त ग्राम सभाओं के लोगो को संबोधित करते हुए उनके जल-जंगल-ज़मीन को बचाने के लिए संकल्प लिया था और कहा था

Continue reading

मंजिल की राहें

बाबूलाल बेसरा: ज़िंदगी एक सफर है,कठिन है राह, कम है समय, सामना कर मंजिल की ओर बढ़ना है,न कोई है मेरे साथ, अकेला हूँ मैं, आशाओं के साथ॥ दूर है मंजिल लंबा है सफर,अंधेरी है राहें, न कोई मेरे साथ,न जाने क्या होगी ज़िंदगी, किस पर मैं भरोसा करूं पता नहीं, मंजिल की तरफ जाऊँ कैसे ? सही गलत

Continue reading

आस्तिकता और नास्तिकता से परे है हमारी संस्कृति

पावनी: एक बार मेरे पापा के दोस्त हमारे घर आए हुए थे। दूर का सफ़र था इसलिए रात को वो हमारे घर ही रुके। उनके साथ बहुत मज़ा आया। साथ ही हमें पता चला कि वो एक नास्तिक हैं। हमारा एक रूढ़िवादी परिवार है और उसमें मेरे पापा भी अपने आप को एक नास्तिक मानते

Continue reading

शंकर गुहा नियोगी – जिन्हे देश के युवाओं का आइकॉन होना चाहिये

अमित: अब सोचता हूॅं कि ऐसा कैसे हुआ कि इतने सालों में कभी नियोगी से मिला ही नहीं? नियोगी से हम लोग कभी नहीं मिले लेकिन उनका संगठन, उनका संघर्ष और उनका जुझारू चरित्र हमारे लिये प्रेरणा स्त्रोत था। अनेक कारणों से नियोगी एक विशाल व्यक्तित्व थे, लेकिन अफ़सोस है कि देश के संघर्षशील युवाओं

Continue reading

Loading…

Something went wrong. Please refresh the page and/or try again.