गिरीश चंद्र: उत्तर भारत के तर्कशीलों और ज्ञान-विज्ञान को लेकर समाज में जागरूकता का काम कर रहे संगठनों एवं लोगों… READ MORE
जितेन्द्र तबियाड: मैं बहुत ही गरीब परिवार में, एक छोटे से गाँव डेडली आसियाबाद, ज़िला डूंगरपुर, राजस्थान में पला-बढ़ा हूँ।… READ MORE
संजीव कुमार: अगर रुकूँ तो जाऊं कहाँ, अगर रुकों तो जाओं कहाँमेरे यूँ रुक जाने से, यूँ थक बैठ जाने… READ MORE
भरत भट्ट: दूर कहीं एक दीपक जल रहा था,मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल पल रहा था,तुम्हें सोचते सोचते रात इतनी… READ MORE
नंदिनी शर्मा: नौकरी जीवन का एक हिस्सा है,पर पूरा जीवन नहीं।।यह बात जानते हुए भीहम काम के बीच कहीं इसे… READ MORE
भरत भट्ट: वो गुज़र रही है धीरे से मेरी लाश के ऊपर सेचार क़दम चढ़े है मेरे, कफ़न के ऊपर… READ MORE
भारत के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों-चित्तौड़गढ़, ग्वालियर, दमोह, छिंदवाड़ा तथा आदिवासी अंचलों-से प्राप्त अनुभवों को संकलित करने पर महिलाओं की स्थिति… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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