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चित्तौड़गढ़ की मांगी बाई जैसी कई महिलाएं हैं सरकारी योजनाओं से कोसों दूर

शंभू: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले के गाँव भैरुखेड़ा (नाहरगढ़) की मांगी बाई भील का ससुराल होड़ा गाँव में था। सन् 2006 तक वह होड़ा गाँव की निवासी थी, उसके पति का नाम भूरालाल भील था। वह अपने ही परिवार की दूसरी औरत को लेकर भाग गया और कहीं दूर चला गया। मांगी बाई उस समय

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छत्तीसगढ़ का लोकगीत – सुवा गीत

दुर्गा दिवान: कार्तिक माह की अमावस के दिन छत्तीसगढ़ में दिवाली मनाई जाती है। दिपावली के दिन चारों तरफ दिया की रौशनी की जगमग होती है। इस दिन गौरा-गौरी (शिव-पार्वती) और भीमसेन की पूजा की जाती है। पूजा -अर्चना करने के बाद लड़कियां, महिलाओं के साथ मिलकर सुवा नृत्य करती हैं।  दिवाली के दुसरे दिन

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झारखण्ड के 21 साल- क्या बिरसा का सपना पूरा हो पाया ?

शशांक शेखर: आज धरती आबा बिरसा मुंडा की जयन्ती है और झारखण्ड स्थापना दिवस भी। झारखंड राज्य गठन हुए पूरे 21 साल हो गए। केंद्र सरकार द्वारा  आज के दिन को जनजातीय गौरव दिवस घोषणा की है तो वहीं राज्य में कई तरह के आयोजन हो रहे हैं।  इस लम्बे अंतराल में झारखंड ने काफी

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भारत का संविधान और देश में महिलाओं की स्थिति

एड. आराधना भार्गव: प्राचीन काल में कबीलाई समाज के समय, महिला परिवार व कबीले की मुखिया होती थी। समाज में महिलाओं का सम्मानजनक स्थान था। महिलाओं के नेतृत्व में ही कबीले के फैसले हुआ करते थे। द्वापर युग में भी महिलाओं को दैहिक आज़ादी दिखाई देती है। भारतीय समाज के लिए पाँचवीं और छठी शताब्दी

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बारेला समाज की महिलाओं का जीवन

सुरेश डुडवे: बारेला समाज, मध्यप्रदेश के बड़वानी, खरगोन, धार एवं झाबुआ जिलों में मुख्यत: निवास करता है। माना जाता है कि भील से ही भिलाला व बारेला समाज बना है। बारेला, भिलाला व भील समाज की भाषा एवं महिला-पुरूषों के पहनावे में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिलता है। हालांकि इनकी भाषाओं में समानताएं अधिक हैं,

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क्योंकि मैं लड़की हूँ मुझे पढ़ना है

कमला भसीन: एक पिता अपनी बेटी से कहता है –पढ़ना है! पढ़ना है! तुम्हें क्यों पढ़ना है?पढ़ने को बेटे काफ़ी हैं, तुम्हें क्यों पढ़ना है?बेटी पिता से कहती है –जब पूछा ही है तो सुनो मुझे क्यों पढ़ना हैक्योंकि मैं लड़की हूँ मुझे पढ़ना है पढ़ने की मुझे मनाही है सो पढ़ना हैमुझ में भी

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सहदोय डायरीज़: सहदोय में रहने का अनुभव

सहोदय के बच्चों ने अपने शब्दों और तरीके में अपने अनुभव, भावना, समझ, काम और यहाँ के माहौल के बारे में लिखे। स्कूल में टीचर बच्चों के रिपोर्ट और फीडबैक लिखते हैं। सहोदय, स्कूल नहीं है। यहाँ कोई निश्चित टिचर भी नहीं है। कोई शिक्षण का निश्चित वर्ग, समय या स्थल नहीं है। बच्चे हर

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नर्मदा बचाओ आंदोलन की आदिवासी नेता पेरवी बाई

युवानिया डेस्क: पेरवी, नर्मदा बचाओ आंदोलन और खेडुत मज़दूर चेतना संगठन की एक आदिवासी नेता, मध्य प्रदेश में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित 193 गांवों में से एक जलसिंधी से थी। नर्मदा बचाओ आंदोलन और खेडुत मज़दूर चेतना संगठन के साथ काम करते हुए, पेरवी को कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ा। शुरुआत में 1980

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संथाल आदिवासी समुदाय ऐसे मानता है सोहराय पर्व

युवानिया डेस्क:  सोहराय पर्वसे संथाल आदिवासियों का एक प्रमुख पर्व है। इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण धान पकाने में मदद करने के लिए जानवरों को धन्यवाद देना है। आदिवासी समाज के इस महान पर्व को लेकर झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा आदि राज्यों में बहुत पहले से तैयारी प्रारंभ हो जाती है।

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