हफ़्सा नाज़: मैं माँ बन गई हूँ यक़ीन-सा नहीं आता है।एक मासूम-सा चेहरा मानों पूरी ज़िंदगी बन गया है।कहाँ मैं… READ MORE
ଶୁକ୍ଳ ଶବର || शुक्ल सबर : ୧)ମୁଁ କଣ ଲେଖୁ ମୋ ମା ପାଇଁ…..ସେ ତ ମତେ ଲେଖୁଛି……..ଆଉ ତାହାକୁ କେମିତି ମୁଁ ଭୁଲି ପର…….ଯିଏ… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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