अमित राजावत: नोट: नीचे दिया गया लेख लेखक द्वारा अपने शैक्षणिक भ्रमण एवं सोशल मीडिया ट्रेनिंग कार्यशाला (संभावना इंस्टीट्यूट, पालमपुर,… READ MORE
संजय पराते: यदि पत्रकारिता लोकतंत्र की जननी है या पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं, तो यकीन मानिए, 3 जनवरी… READ MORE
नीतिशा खलखो: लेख में व्यक्त किए विचार युवा साथी के स्वयं के हैं किसी पत्रकार का फ़ोन आता है आदिवासी… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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