भरत भट्ट: दूर कहीं एक दीपक जल रहा था,मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल पल रहा था,तुम्हें सोचते सोचते रात इतनी… READ MORE
सूर्यकांत गिरि: तुम तो एक पहेली हो, मैं कैसे तुमको सुलझाऊँ।नीरव रजनी में जगने पर, मैं कैसे मन को बहलाऊँ… READ MORE
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श्रुतिका साह: मैं रचूंगी तुम्हारे लिएइस शताब्दी की सबसे विवादित नज़्म,जिसकी शुरुआती पंक्तियों में ज़िक्र होगाउस दीये काजोमैं तुम्हारे अंतस… READ MORE
अंजू मल्होत्रा: मैं और मेरी तन्हाई,अक्सर ये बातें करते हैं,आप होते तो कैसा होता,आप ये कहते, मैं वो कहती,आप इस… READ MORE
पावनी: शायद हर कोई किसी न किसी चीज़ के लिए बना होता है।कोई बना होता है बहती धाराओं के लिए,… READ MORE
युवानिया डेस्क: यह पॉडकास्ट नीतिशा खलखो द्वारा डॉ. शांति खलखो के लेख पर बनाया गया है। कर्म पर्व, प्रकृति प्रेम… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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