प्रफुल्ला कुमार मिश्रा : ଶିଖ ସନାତନ ଜୈନ ମୁସଲମାନଇସାଇ ହୁଅ କି ବୌଦ୍ଧମାଆ ତ ଗୋଟିଏ କୋଳେ ତା କୋଟିଏଅଭିନ୍ନ ବାସନା ସୌଧ।। ଦୁଃଖ କଷ୍ଟ… READ MORE
गुफरान : सिनेमा और साहित्य जब एक-दूसरे से संवाद करते हैं, तो वे केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं रहते, बल्कि… READ MORE
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महेश हेंब्रम: संविधान हमारे लिए ज़रूरी हैं, संविधान से देश चलता है। संविधान गरीब वर्ग के लिए है। धर्म से… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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