प्रफुल्ला कुमार मिश्रा :

ଶିଖ ସନାତନ ଜୈନ ମୁସଲମାନ
ଇସାଇ ହୁଅ କି ବୌଦ୍ଧ
ମାଆ ତ ଗୋଟିଏ କୋଳେ ତା କୋଟିଏ
ଅଭିନ୍ନ ବାସନା ସୌଧ।।

ଦୁଃଖ କଷ୍ଟ ଭୋକ ସମାନ ରୂପକ
ସଭିଏଁ ବିବ୍ରତ ଆଜି
ସଭିଙ୍କର ପିଲା କ୍ଷୁଧାର୍ତ୍ତ ଭୋକିଲା
ଜୀବନ ଲାଗିଛି ବାଜି।।

ସଭିଙ୍କ ସପନ ହେଉଛି ଦହନ
ଧନୀଏ ଲୁଟନ୍ତି କୋଟି
ଯୁବକ ବୟସେ ଘର କୋଣେ ବସେ
ବେକାରି ଖୋଜୁଛି ରୋଟି ।।

ଗୀର୍ଜା ଗୁରୁଦ୍ୱାର ମସ୍ଜିଦ ମନ୍ଦିର
ଧର୍ମ ନାମେ ଚାଲେ ଦ୍ୱେଷ
ବିକାଶ ର ଥାଟ ଭରାଏନି ପେଟ
ବଦଳେ ଦେଶର ବେଶ।।

ଧର୍ମ ସ୍ଥଳୀ ମାନ ସୌନ୍ଦର୍ଯ୍ୟ କରଣ
ଝଲସି ଉଠୁଛି ଆଖି
ଜନତା ଜୀବନେ ମିଳୁ ନାହିଁ ଦିନେ
ଖାଇବାକୁ ମନ ଲାଖି ।।

କୁମେରୁ ସୁମେରୁ ନେତା ଧର୍ମଗୁରୁ
ସ୍ବାର୍ଥ ଲାଗି କୋଳା କୋଳି
ମାନବ ମଧ୍ୟର ଟଣା ହୁଏ ଗାର
ଧର୍ମ ନାମେ ଲଢ଼ା ଲଢ଼ି ।।

ତାଙ୍କ ପିଲା ସର୍ବେ ପଢ଼ିବେ ବଢ଼ିବେ
ଧରିବେ ଶାସନ ଡୋରି
ଧର୍ମ ରକ୍ଷା କହି ସୈତାନ ସଜେଇ
ପିଲେ ହେବେ ମରାମରି।।

ସତ କହି କେହି କାରାଗାରେ ରହି
ବିତାଏ ଜୀବନ କାଳ
ଦୋଷୀ ଖୋଲା ଖୋଲି ଆନନ୍ଦେ ଘୁରଇ
ନାଚୁଛି ମୁଜୁରା ତାଳ।।

ଧର୍ମ ଭେଦ ଭୁଲି ଭାଇଚାରା ବୋଳି
ଗାଇବା ଏକତା ମନ୍ତ୍ର
ହୁଗୁଳିବ ବେଣ୍ଟ ଭାଙ୍ଗିଯିବ ମେଣ୍ଟ
ଝଲସିବ ଗଣତନ୍ତ୍ର।।

इस कविता का हिंदी अनुवाद शीर्षक “जगमगायेगा गणतंत्र” है। वह इस कविता के जरिए यह बताना चाह रहे हैं कि यह देश एक माँ है, जहाँ कई तरह के धर्म, संप्रदाय और विचारों को मानने वाले लोग हैं। पर इस देश में आज के दौर में सभी के जीवन में  दुःख, कष्ट और भूख है और इसके लिए जान की बाजी लग रही है। इस देश में धनवान धन लुटे जा रहे हैं और युवा वर्ग बेरोज़गार घूम रहे हैं। देश में धर्म के नाम पर लोगों को आपस में बांटा जा रहा है और धार्मिक स्थलों को सजाया जा रहा है और वहीं यह धर्म के नाम पर लड़ाने वाले अपने-अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर देश के शासन व्यवस्था पर कब्ज़ा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ देश के अधिकांश ग़रीब मध्यवितों को धर्म के रक्षक बनाने के नाम पर उन्हें हैवान बनाया जा रहा है। इस देश में आज सच बोलने वाले को जेल में बंदी बनाया जा रहा है और जो असल गुनहगार हैं वह आज़ादी से मौज कर रहे हैं। इसलिए कवि अपने काव्य में लिखते हैं कि देश में जब सभी कोई धर्म-भेद को भूल कर, भाईचारा और एकता के मंत्र को अपनाएंगे तो यह सारे देश को बांटने वालों की शक्ति टूट जाएगी और तब ही हमारे गणतंत्र जगमगायेगा।

Author

  • प्रफुल्ला, ओडिशा के नयागढ़ ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह संचार संगठन के साथ जुड़कर वहां के आदिवासियों के बीच स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

    View all posts

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading