पुष्पा कुमारी: आदिवासी समाज में महिलाओं का जीवन हमेशा से संघर्ष भरा रहा है। उनका जुड़ाव ग्रामीण परिवेश से रहा… READ MORE
दशरथ जाधव: दलितांच्या मुलांना शाळेत सार्वजनिक रित्या पाण्याचा पिण्यासाठी वापर करू दिला जात नव्हता तसेच त्यांना इतर सवर्ण मुलांपासून दूर… READ MORE
तन्मय और शो: शो: हम्म…मेरे आंगने में तुम्हारा क्या काम है? तन्मय: क्या बात है… सुबह-सुबह रेडियो चालू? शो: अरे…… READ MORE
दशरथ भाऊ: आज पासून मी माझ्या जीवनातील वेगवेगळे प्रसंग, अनुभव आणि घडामोडी, तसेच माझे सामाजिक परिवर्तनाच्या लढ्यातील योगदान; माझे सहकारी,… READ MORE
अभिलाषा श्रीवास्तव और असीम हसनैन: “मेरे कॉलेज की लड़कियाँ बहुत साहसी थी। वे कुछ न कुछ नया करती रहती थी।… READ MORE
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कमलजीत कौर: “हुर्रर्रर्र… हेहेहेहे…हौ…हेहेहेहे…हौ…” सूरज ने डरावनी सी आवाज़ निकाली और देखते ही देखते बाग़ से भागते पक्षियों ने आसमान… READ MORE
विश्वजीत नास्तिक: रखा गया इन्हे कुछ इसतरह कि इन्हेपता ही न चलेवे किस नरक में जी रहे हैं। सरकारी कर्मचारी,… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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