गुफरान:
नक्कार खाने से आती तुरही की आवाज़ें और हाथी, घोड़ों, बैल, बग्घी पर चढ़े प्रत्याशियों की खबरों से गुलजार रहने वाले लोकसभा चुनाव का हाल यह है कि इस बार 2024 का आमचुनाव ही आम लोगों की नीरसता को दूर नहीं कर पा रहा है।
लोकतंत्र में जिस तरह से मीडिया ने अपनी भूमिका सास बहू के धारावाहिकों की तरह स्थापित की है, उससे भी इस बार कुछ टीआरपी बढ़ नही रही है। तमाम टीवी डिबेट में चलने वाले लात-घूसे, चप्पल-जूते और गालियों के डायलॉग अचानक अनुराग कश्यप की फिल्मों की याद तो दिलाते हैं लेकिन कोई उत्साह पैदा नहीं करते।
फैजाबाद और आसपास पांचवें चरण में वोटिंग होना है। 20 मई को होने वाले चुनाव के लिए पांच मई को अयोध्या में कार्यवाहक पीएम का रोड शो हुआ। यह रोड शो वैसे तो नए बने 14 किलोमीटर के रामपथ पर पूरा किया जाना चाहिए था, लेकिन जनता की नीरसता के कारण यह सिर्फ 2 किलोमीटर तक ही सीमित रहा, वो भी राममंदिर के इर्द-गिर्द। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि इसका कारण यह भी है कि ये क्षेत्र बाहर से आए श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से सटीक बैठ रहा होगा। इस चुनाव से पहले तक जितने भी रोड शो नेता करते आए हैं वो फैजाबाद से अयोध्या की तरफ या अयोध्या से फैजाबाद तक कम से कम 10 किलोमीटर तो करते ही हैं। इस बार बीजेपी ऐसा नहीं कर पा रही। इसका सबसे बड़ा कारण 14 किलोमीटर लंबे रामपथ के नाम पर जितने लोगों के घरों को तोड़ा गया उजाड़ा गया (इनमे 90 प्रतिशत बीजेपी के कोर वोटर हैं) वो इस बार खामोश हैं और उनके घरों पर पहले की तरह लहराते बीजेपी के झंडे नही लग पाए हैं।
अगड़ा बनाम पिछड़ा
इस बार फैजाबाद लोकसभा का चुनाव काफी निर्णायक हो चला है। जहाँ बीजेपी ने अपने सिटिंग सांसद कई बार के विधायक पूर्व ऊर्जा मंत्री क्षत्रिय समाज के नेता लल्लू सिंह को उतारा है, वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से पासी समाज से आने वाले अनुभवी नेता और मिल्कीपुर से सपा विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री अवधेश प्रसाद को उतार कर मुकाबले को अगड़ा बनाम पिछड़ा कर दिया है। बीएसपी ने यहाँ से बीजेपी के बागी ब्राह्मण नेता को मैदान में उतार कर बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। हालांकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने यहाँ से पूर्व सांसद और दिवंगत कद्दावर नेता मित्रसेन यादव के आईपीएस रहे बेटे अरविंद सेन को मैदान में उतार कर इंडिया गठबंधन के लिए थोड़ी चुनौती खड़ी की है। इतना ही नहीं मित्रसेन यादव के दूसरे पुत्र सपा नेता और पूर्व मंत्री आनंद सेन यादव इस बार गठबंधन की ओर से प्रत्याशी न बनाए जाने पर खामोश हैं।
राम मंदिर भूमिपूजन से लेकर प्राणप्रतिष्ठा तक बड़े-बड़े इवेंट करने के बाद बीजेपी को लग रहा था कि वो यह सीट 4-5 लाख के मार्जिन से जीतेगी, लेकिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी चयन ने उनके माथे पर पसीना ला दिया है। इतना ही नहीं यहाँ के बीजेपी प्रत्याशी द्वारा संविधान बदलने के भाषण वाला एक वीडियो भी इस बीच वायरल हो गया, जिसने ओबीसी, इबीसी और एससी समाज को खासा नाराज़ कर दिया है। कुल मिला कर इस चुनाव में राममंदिर के मुद्दे पर संविधान की अनदेखी बीजेपी प्रत्याशियों के लिए भारी साबित हो रहा है। यह कितना नाराज़गी की वजह बनेगा यह 20 मई को पता चल जायेगा, लेकिन बीजेपी इस बात को समझती है और उसके प्रत्याशी लल्लू सिंह लगातार जनता के बीच सफाई देते घूम रहे हैं।
वोकल होते लोकल मुद्दे
युवाओं की बात करें तो कुछ दिन पहले जब सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक होने से रद्द हुई तो बड़ी संख्या में अयोध्या से फैजाबाद तक युवाओं ने विरोध मार्च निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया। लोकल मुद्दों में लोगों की ज़मीन, मकान का अधिग्रहण और उनका सही मूल्यांकन कर मुआवजा न मिलना भी अंदर-अंदर काफी काम कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ लगातार बढ़ती मंहगाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को नजरंदाज़ नहीं कर पा रही हैं। सौंदर्यीकरण के नाम पर एक तरफ सरकारी धन का अंधाधुंध इस्तेमाल और दूसरी तरफ सरकारी विद्यालयों का बुरा हाल होता जा रहा है। विद्यालयों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है, ऐसे में क्वालिटी एजुकेशन की प्रतिस्पर्धा में शिक्षा का निजीकरण और मनमानी फीस की वसूली ने अभिभावकों को विचलित कर रखा है। इस तपिश को सत्ता पक्ष के कार्यकर्ता बखूबी महसूस कर रहे हैं और शायद इस कारण ही वो प्रचार में उन्ही जगहों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहाँ उनका कोर वोटर है।
राममंदिर बनाम पीडीए
अगर आस-पास की बात करें तो गोंडा लोकसभा से बीजेपी ने वहाँ से सांसद कीर्तिवर्धन सिंह को फिर से टिकट दिया है जबकि सपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत बेनी प्रसाद वर्मा की बेटी श्रेया वर्मा को मैदान में उतारा है। अकबरपुर लोकसभा से बीएसपी से बीजेपी में गए रितेश पांडेय को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया है तो सपा ने अनुभवी नेता और विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री लाल जी वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। सुल्तानपुर में मेनका गांधी के खिलाफ सपा ने राम भुआल निषाद को उतार कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। अगर प्रत्याशी चयन को देखें तो सपा ने बीजेपी में जाने वाले पिछड़े और एससी समाज को मजबूर किया है कि वो इस बार वोट करने से पहले सोचे। अगर हम इन चार लोकसभा सीटों पर जातिगत नज़रिए से देखें तो जहाँ सपा ने दो कुर्मी, एक पासी और एक निषाद को उतारा है तो वहीं बीजेपी ने एससी, ओबीसी और इबीसी को नजरंदाज़ किया है, जिसको लेकर मध्य उत्तर प्रदेश में खासी चर्चा है। यही कारण है कि इन चार सीटों पर बीजेपी को अपने जीतने की संभावना बनाए रखने के लिए अयोध्या में राम मंदिर के होते हुए मोदी के रोड शो की ज़रूरत पड़ रही है। हालांकि जनता ने खामोशी बना रखी है। हम सभी जानते हैं कि बीजेपी का वोटर कितना वोकल होता है, लेकिन इस समय माहौल यह है कि सभी तरफ खामोशी है। दो दिनों पहले एक संघ के सदस्य रहे और बीजेपी के कार्यकर्ता से मुलाकात हुई वो निक्कर और सैंडो बनियाइन में अपने घर के बाहर गुटका लेने निकले थे, मैंने उनको पूछा कि अरे आप चुनाव में काम नहीं कर रहे, यहीं टहल रहे हो तो इस पर उनका जवाब था कि भईया पार्टी को अब हम जैसों की ज़रूरत नहीं रही, ठेकेदारी चल रही है।
जहाँ एक तरफ अखिलेश यादव ने पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के पीडीए फार्मूले के तहत प्रत्याशी चयन कर बीजेपी को चक्रव्यूह में फँसाने का प्रयास किया है, वहीं बीजेपी नेता अनंत हेगड़े के संविधान बदलने से शुरू हुआ बयान यहाँ लल्लू सिंह तक पहुँचता है और वीडियो वायरल होते हैं। हालांकि वो अपने वीडियो को एडिटेड बताते हुए पूरे क्षेत्र में घूम रहे हैं, लेकिन देश की मीडिया ने जिस तरह की फर्जी खबरों को सच साबित करने का कोर्स पिछले 10 वर्षों में चलाया है, उसकी वजह से लल्लू सिंह की इस सफाई को कितने लोग स्वीकार करेंगे यह संदेह के घेरे में हैं। वायरल वीडियो ने अपना काम कर दिया है।
यूँ तो सारा गुणा गणित का रिजल्ट कुछ दिनों में हमारे सामने होगा, लेकिन इस बार वैष्णव की फिसलन बड़ी है और विपक्ष की भूमिका में खामोश जनता है। देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है। फिलहाल तो ऊंट अभी सत्तापक्ष विरोधी पाले में दिख रहा है।

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