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नमिता पूनम: पइढ़-लिख के भी जिनगी,ढ़पियाते दिन जाथे!आइज हिञा तो काइल हुवां कर,चक्कर काटते दिन सिराथे।१। गांव- समाज में तो… READ MORE
जलेश्वर महतो: आसार सावन भादों, होवत नखे खेत कादो,खेत में बीड़ा सुखथे,आरी बैठी किसान रोजे कांदथे,कहत में बीड़ा सुखथे…… ।।1।।… READ MORE
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सिम्मी: यूँ तो जिस किसी भी शिक्षक चाहे सरकारी हो या गैर सरकारी, हर कोई यह बताने और सिद्ध करने… READ MORE
सिद्धार्थ: ये बात साल 1994 की है, मेरी उम्र तब 9 साल की थी और मैं मेरे परिवार के साथ… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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